Tuesday, August 17, 2010

एक युगल गीत -------समीरलाल (उडनतश्तरी वाले ) के साथ-------एक नया (अभिनव )प्रयोग

आभार समीर जी का !!! जो उन्होंने (मेरे साथ) युगल गीत गाया -------

16 comments:

गिरीश बिल्लोरे said...

बेशक अभिनव
बधाई समीर जी और आप को

दीपक 'मशाल' said...

झूम झूम गया... मुग्ध हो गया इस जुगलबंदी पर..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

यह प्रयोग बहुत सफल रहा!
--
जुगलबन्दी सुनकर मन प्रसन्न हो गया!

Udan Tashtari said...

आनन्द तो मुझे भी बहुत आया..अभिनव प्रयोग रहा.

संजय भास्कर said...

मुग्ध हो गया इस जुगलबंदी पर..

अनूप शुक्ल said...

बहुत खूब! समीरलाल के स्वर में सुना था। अब आपको गाते हुये सुना तो और अच्छा लगा। बहुत सुन्दर!

रचना. said...

अतिसुन्दर!!!!! मनमोहक, मनभावन!! :)

राजीव तनेजा said...

ये अभिनव प्रयोग बहुत ही सफल रहा..

संजय कुमार चौरसिया said...

jugalbandi bahut sundar

प्रवीण पाण्डेय said...

सुर का गुरुत्व और कविता की सुरीली शहनाई। मज़ा आ गया।

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत ख़ूब... आप और समीर जी को बधाई

मीनाक्षी said...

चंचल नदी की नटखट धारा सा सुर अर्चनाजी का
भेद भरे गहरे सागर का गांभीर्य लिए स्वर समीरजी का
बेहद खूबसूरत प्रयोग...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

अभिनव प्रयोग. ऐसी और पोस्टों का इंतज़ार है।

Anupama Tripathi said...

waah ...bahut sundar prayog ....

badhaii evam shubhkamnayen ...!!

Rajiv said...

ADBHUT!

Rajiv said...
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