न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
Saturday, April 16, 2011
नवरात्रि ८- अरूंधति सुब्रमण्यम की कविता
नवरात्रि पर्व के आठवें दिवस पर "शरद कोकास" नामक ब्लॉग पर प्रकाशित कविता----
अनुवादक- अनामिका
5 comments:
आपकी मधुर आवाज ने कविता को कालजयी बना दिया ...आपका आभार ..!
सुनने में अच्छा लगा।
वाह
क्या बात है जी
बहुत सुन्दर।
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति मधुर आवाज, धन्यवाद
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