Monday, September 26, 2011

एक गज़ल -दिगम्बर नासवा जी की

13 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत बढ़िया ग़ज़ल

सदा said...

आपकी आवाज में गजलों की प्रस्‍तुति बहुत ही बढि़या लगी ...।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

प्रवीण पाण्डेय said...

आपके सुरों ने रचना का मान बढ़ा दिया।

मनोज कुमार said...

बहुत सुंदर लय में आपने इस ग़ज़ल को प्रस्तुत किया है।

Srikant Chitrao said...

बहोत अच्छी गजल और उतनीही अच्छी प्रस्तुति शैली| धन्यवाद|

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बहुत ख़ूबसूरत गज़ल.. और जिस तरह तरन्नुम में आपने गाया है वो बिलकुल सही तौर पर गज़ल के मूड को अभिव्यक्त करता है!!

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है...

संजय भास्कर said...

... नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं....
आपका जीवन मंगलमयी रहे ..यही माता से प्रार्थना हैं ..
जय माता दी !!!!!!

दिगम्बर नासवा said...

आपकी आवाज़ का जादू गज़ल को नयी ऊँचाई दे रहा है ... शुक्रिया इस गज़ल को आवाज़ देना के लिए ...

abhi said...

मजा आ गया!!

अरुण चन्द्र रॉय said...

नासवा जी बढ़िया लिखते हैं... आपके स्वर में गज़ल और भी अच्छी हो गई है..

अनुपमा पाठक said...

बहुत अच्छा लगा आपको सुनकर!