न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
Thursday, May 24, 2012
सपना मेरा ...
किसी अपने का सपना हो तो अच्छा लगता है
कोई सपने वाला अपना हो तो भी अच्छा लगता है
किसी सपने का अपना हो जाना जिंदगी बना देता है
और किसी अपने का सपना हो जाना जिन्दगी मिटा देता है ....
9 comments:
शब्दों की ज़ादूगरी ...
बहुत सुन्दर
सुंदर शब्दों में सुंदर सी कविता
बिल्कुल सच कहा ...
शब्दों का उलट फेर ...
ये जीवन भी तो उलट फेर है ...
अपनों का सपना और सपनों का अपना, दोनों ही अच्छे लगते हैं।
सपने के बारे में सच कहा आपने...
हलके-फुल्के अंदाज़ में बहुत ही गहरी बात!!
सपने आखिर सपने हैं, चाहे अपने हों या पराए।
सपनों की दुनिया
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