Friday, April 30, 2010

पिछले दिनो...........इन पन्नों पर ..................मैने पढ़ा.......

चंद लाईने .....जो मैने लिखी .......साथ दी गई लिन्क की कविताओं को पढकर........आप शायद आप भी कुछ लिखेंउन्हें पढकर ......... ........



हाँ---- दुख और आँसू.........
हाँ दुख सचमुच ही लहू को ठंडा कर देता है ,
तभी तो आँखें भर आती हैं ,
ओस की तरह ,
और ठंडा लहू जब रगों में दौडता है ,
आँसू जम जाते हैं आँखों में........मौन के खाली घर में ......


मेरे डसने के बाद आदमी जिन्दा नही बचता,
मगर तुम्हारे डसने के बाद तो,
जीते-जी ही- मरते रहता है ......एक साँप धीरे से जा बैठा ----

एक चमकीली... काली-काली कविता.........छोटी-छोटी बातें ...पर मैने पा ली कविता......... एक था काला......


हाए!!! मौला !!!
होश गँवाकर
ये क्या-
कर गया ???
इन्सान तो रस्ते पर आया नहीं
और
शैतान गुजर गया.................देखो न !!!!!!!! कब तक वो देखता ??????

Link
तडप-तडप के जी रहा अब,कि उसका अक्स भी बदल गया,
जला था सिर्फ़ वो,पर उसका सब कुछ झुलस गया........शबनमीं लू में................



आशा करती हू ------
हंसों के वे जोडे वापस आएंगे
रिश्तों के टूटे मोती भी साथ लाएंगे
गूंथेंगे माला
पहनाएंगे दादी को
सुनाएंगे कहानी
और याद करेंगे नानी को
खेलेंगे खेल और
सूने घर में भर देंगे शोर
निराश हों
होगी एक दिन फ़िर वही सुहानी भोर......जुडेगी फ़िर रिश्तों की डोर


मुझे याद करते ही हाजिर रहूंगी...
माँ हूँ तेरी---मुँह से कुछ कहूंगी.....


और अगर फ़िर भी बच जाए ,
तो बारिश मे भी लाएं,
हम जैसे नन्हे मुन्नों को,
इंद्रधनुष दिखलाएं..............सूरज से विवेक पूर्ण रिक्वेस्ट .............


जरूरतें होने लगती हैं
सपनों पर हावी
पर विश्वास
जिन्दा रखता है
सपनों को भावी....."
या
जरूरतें होने लगती है
हावी--- सपनो पर ...
और विश्वास जिन्दा रहता है
भावी सपनों पर .....विश्वास और सपने ---

Monday, April 26, 2010

इस समस्या का हल सुझाएं.............


विशेष -----यह पोस्ट सिर्फ़ हिन्दी लेखन में होने वाली मात्रा संबंधित अशुध्दियों के बारे में है -------अगर हम हिन्दी का प्रसार चाहते हैं तो ..........

(वैसे तो अंग्रेजी शब्दों के जाने से इस हिन्दी को शुद्ध नहीं कहा जा सकता )पर फ़िर भी ...............

आज एक बात पूछना चाहती हूँ--------मेरी एक बुरी आदत के कारण इन दिनों मै परेशान हूँ..........ज्यादा तो मै पढती नहीं ........पर जितना भी पढती हूँ उसमें ----------जहाँ भी गलती देखी नहीं कि बस लगी सुधारने ......मान तो सब लेते हैं पर कभी -कभी सुधारते नहीं .................एक बारगी लगता भी है कि नहीं बताऊं..........किसी को बुरा लग सकता है ... पर अपनी इस आदत से लाचार हूँ .......वैसे मुझसे भी गलतियाँ होती रहती है ......(मुझे कोई बताता ही नहीं )....पर कोई गलती करे और हम देखते रहें ये भी तो ठीक नहीं ???

"
गलतियाँ मालूम हो जाने पर अपनी आदतें सुधार लेना चाहिए ऐसा मेरे बडों ने मुझे सिखाया है ..........इससे अपना विकास ही होता है "--------.(ये हर तरह से होने वाली गलतियों पर लागू होता है )......

एक चिन्ता भी लगी रहती है कि
ब्लॉग (ब्लॊग --इसे समीर जी की टिप्पणी से लेकर ठीक किया है ....)कैसे टाईप होगा ?नहीं मालूम ) तो दुनिया भर के लोग पढते हैं ........और.......... हिन्दी - लेखन में अगर अशुद्धियाँ होती हैं तो जिन्हें हिन्दी आती है, वे तो समझ लेते है पर जिन्हें नहीं आती वे उसी को सही मान लेते हैं.......................कभी -कभी तो मात्रा की अशुद्धियाँ होने पर अर्थ ही बदल जाता है। .......... ऐसे तो हिन्दी- लेखन भी अशुद्ध होते जाएगा ...................
तो मुझे बताईए क्या मै अशुद्धियाँ बताना जारी रखूँ या बन्द कर दूँ ?????

Saturday, April 24, 2010

आप भी जानिए.............अपने आप को.....................

जबसे ब्लोग बनाया कुछ न कुछ नया सीखा है मैने ...........यहाँ आकर ही पता चला ......कि मै क्या -क्या कर सकती हूँ..........पहले कुछ लिखना सीखा .......फ़िर चित्र लगाना.........फ़िर गाना रिकार्ड.............. करना ........फ़िर पोड्कास्ट..........कराओके......... और अब कहानी का पोडकास्ट...........


आज मै इस पोस्ट के माध्यम से दो लोगों का आभार मानना चाहती हूँ------पहले तो आदरणीय गिरीश जी का जिन्होने मुझे इस काबिल समझा.....................और अपने ब्लोग पर जगह दी......
.

दूसरे आदरणीय अनुराग शर्मा जी (स्मार्ट इंडियन) का जिन्होने मुझे ये मौका दिया .....आज आवाज पर मेरी आवाज मे सुनना न भूलें सुदर्शन जी की कहानी ------------" साईकिल की सवारी ".........
....धन्यवाद

Friday, April 23, 2010

दो गीत ----------------दो आवाज -------------------दो भाव----------एक नकारात्मक...................एक सकारात्मक

आज सुनिए दो गीत .............
दोनो एकदम अलग भाव लिए ..............
दोनो के बोल दिल को छू लेने वाले ...............
दोनो एकदम अलग आवाज मे................
एक मैने गाया है ............
एक मेरे भाई देवेन्द्र पाठक ने ............पेशे से वकील है ..........(हम दोनो बहनो के कारण उसने भी अपना ब्लोग बना लिया........लिखने की आदत पड गई .पर समय नही मिलता पोस्ट करने के लिए .....लिख -लिख कर इकठ्ठा कर रहा है ......बाद मे कभी पोस्ट करने के लिए ..........पर हम है कि उसके पीछे पडे रहते है अब गाना भी शुरू करवा दिया है ...............शायद कभी मेरे साथ युगल गीत भी गा ले ).............

१---

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२-----

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Thursday, April 22, 2010

सोचो जरा ......................

( चित्र गूगल से साभार )


ईश्वर न होता तो क्या होता ?
धरती न होती, आसमां न होता ।

माँ न होती तो क्या होता ?
शायद मैं न होती, तू न होता ।

हम न होते , तो क्या होता ?
कर्म न होता ,धर्म न होता ।

धर्म न होता तो क्या होता?
तू-तू ,मै-मै न होती ,झगडा न होता ।

झगडा न होता तो क्या होता ?
हम न बंटते , और प्यार होता ।

और जरा सोचो .............


प्यार होता----- तो क्या होता ???
मिल के रहते , और गम होता




Tuesday, April 20, 2010

फ़ितरत इन्सान की -------इन्सान खुद बनाता है ...................

इस पोस्ट को पढने से पहले पढें-------------इसे...
( क्योंकि इसके बाद ही मै ये सोच पाई हूँ )---



हर कोई बस अपनी ही किस्मत बदलना चाहता है ,
सिर्फ़ अपना घर ही बसाता है भले दूसरों का उजड जाए ,

छोटी-सी चादर भी अगर सबसे बाँट ले कोई ,
तो क्या मजाल किसी की कि कोई भूख
से मर जाए

गर काटा न होता किसी ने बेवजह पेडों को अब तक,
हरी होती वसुन्धरा-
पानी के लिए कोई न लड पाए

बुरा सोचने से किसी का- भला कब हुआ है आज तक ?,
गर अच्छा सोचें जो इन्सां-
तो सबका भला न हो जाए ?


ठान ले जो धनिया अपनी बेटी को पढाना ,
बेटी के साथ ही उसकी-
सारा गाँव भी पढ जाए

ख्ह्वाहिश है मेरी- राह के पत्त्थर हटाने की ,
इस उम्मीद में कि मेरे बाद कोई ठोकर न खा जाए............


फ़ितरत इन्सान की -------इन्सान खुद बनाता है ........
सब सकारात्मक सोचें- तो शायद ये दुनिया बदल जाए.........

Monday, April 19, 2010

Saturday, April 17, 2010

आप भी किसी की जान बचा सकते है .........(आओ पुण्य कमाएं).......

आज मेसेज मिला - मोबाइल पर -----क्या कोई डॉक्टर साहब (निशुल्क ) बताएंगे ???-------सही है या नहीं ??? इसे फारवर्ड करने से कोई फायदा हो सकता है ???-----किसी का ?????? .....यदि हां.....तो आप भी करें....... यदि ना तो , मै भी डिलीट करूँ .....................पढ़िए ...............

---अंग्रेजी में है -------(जिंदगी से जुडा मामला है "अर्थ का अनर्थ" न हो इसलिए ...(same to same)-------


"VERY IMP MSG"---

If U are Alone & Sudenly Get "CHEST PAIN" dat Radiates 2 Ur
Left arm , Up 2 Ur Jaw, den It May B "HEART ATTACK" If No one 2 Help & Hospital Is Far, den Dont Wait , U Help Urself --cough Repeatedly & Vigorously --Tek Deep Breath B4 Every Cough.
--Deep Breath Gets Oxygen 2 Lungs
--Coughing Keeps Blood Circulation Alive...

Pls Forward This As Much As U Can.

Who Knows One Day Ur Message 'll Save One's life.. kindness Costs Nothing..

Wednesday, April 14, 2010

पिछले पन्नों पर.......................


काश
सूरज
के इस दर्द को उसके दोस्त समझ पाते ....
और सूरज के साथ उसके जैसे ही , उससे दोस्ती निभाते ...
अब देखना सूरज अपने --पल-पल का बदला लेगा...
चाँद , रात और सितारों के सात हम सबको भी जला देगा.......दिल की कलम पर एक प्रेम कहानी ....बहुत पुरानीजरा हट के पर ... ...

आने वाले समय मे टी.वी. भी उठाकर फ़ेंक दिए जाएंगे........आज माता-पिता अपने बच्चों के लिए समय नही निकाल पाते तो भविष्य मे ये बच्चे ......ईश्वर आपके लिए क्या करे ........खुशदीप.....

साहिल की गोद में जब सूरज कर सो गया
सोने से पहले ही तमस ने उसका मुँह भी धो दिया...
तमस को बुलाया था रोशनी ने जान देकर
रोशनी को रोया चाँद ठंडी चादर लेकर...
चाँद को सहलाया समन्दर ने आगोश में लेकर
और तब सूरज चल पडा चाँद को सहिल की गोद देकर..... मै आप और सब ...........ओम आर्य के साथ............


राम नाम सत्य है ----

ये ब्लोगर बडा मस्त है,
ब्लोगिंग से त्रस्त है,
बुढापे का कष्ट है,
गूगल भी ध्वस्त है,
अन्य ब्लोगर पस्त है,
"ये" ही सर्वत्र है,
(क्योंकि इसमें)
आंतरिक युवत्व है ।...............समीर जी के लिए ........उडनतश्तरी पर............. (पोस्ट ढूंढ पाना मुश्किल )


इस पेशे की पहली शर्त अच्छा स्वभाव होना ही है .....(हालांकि ये समय बिताने के बाद ही पता चलता है )..........मुक्त विचारो का संगम ---कभी ख़ुशी कभी गम

अभी तो नाचना शुरू ही किया था ...............मारा क्यों???????????????
..........भला इतने लोगों के बीच में अच्छा लगता है क्या ??? ......


पिछले दिनों स्वादिष्ट संगीत का का रसास्वादन भी करवाया ...........मनीष जी ने


आज
आशीर्वाद दे ----मेरे पोते ---युगांश को-----

(मेरे ताउजी के बड़े बेटे के बेटे का बेटा मेरा पोता हुआ ना ....) उसके जन्मदिन पर-----(एक वर्ष का हुआ है आज )(पुरानी फोटो ही उपलब्ध है अभी )

और याद रखें------- लविज़ा कों आशीर्वाद देना है --------३० अप्रेल कों ........(दूसरी वर्षगाँठ पर ) .............

और अंत में ये बता दू कि ......चर्चा करते ही ......भीड़ बढ़ जाती है नए पुराने सब की

Sunday, April 11, 2010

इसे दोहराने की जरूरत लगती है ...इस पर अमल करने की कोशिश करें........एक भजन जो हम गाते है...

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(मैने व रचना ने गाया है )



"भला किसी का कर न सको तो , बुरा किसी का मत करना,
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम , काँटे बनकर मत रहना ।

बन न सको भगवान अगर तुम , कम से कम इंसान बनो,
नही कभी शैतान बनो तुम , नही कभी हैवान बनो,
सदाचार अपना सको तो पापों मे पग धरना ,
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम , काँटे बनकर मत रहना ।
भला किसी का कर न सको तो ............

सत्य वचन न बोल सको तो, झूठ कभी भी मत बोलो,
मौन रहो तो भी अच्छा है , कम से कम विष मत घोलो,
बोल यदि पहले तुम तोलो, फ़िर मुँह को खोला करना ,
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम , काँटे बनकर मत रहना ।
भला किसी का कर न सको तो ............

घर न किसी का बसा सको तो , झोपडियाँ न ढहा देना,
मरहम -पट्टी कर न सको तो , क्षार-नमक न लगा देना,
दीपक बनकर जल सको तो , अँधियारा भी मत करना,
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम , काँटे बनकर मत रहना ।
भला किसी का कर न सको तो ............
"

Saturday, April 10, 2010

आने वाले दिनॊ मे शायद आपमें से किसी के काम आ जाए .. ........





--------इस माह के खतम होते-होते गर्मियो की छुट्टियाँ शुरू हो जाएगी ..............कईयों की श्रीमतिजीयाँ
बच्चॊ को लेकर मामा के घर चली जाएगी और उसके बाद श्री लोगों का जो हाल होने वाला है..........उसके लिए ये पुर्वाभ्यास ....... आज ये ...........पेरोडी ( विरह गीत ) .............
चाहें तो अपनी आवाज मे रिकार्ड करें......................
-----(साथ की पेंटिंग वत्सल की बनाई हुई है) .................

इसे पिछ्ले साल सागर जी की एक पोस्ट पर टिप्पणी के रूप मे भेजा था , तब पोडकास्ट करना नही आता था।आभारी हूँ सागर जी की जिन्होने अपना अमूल्य समय देकर प्लयेर लगाना सिखाया ............(ब्लोग जगत में मदद करने वालों की कमी नही है ------बस मदद मांगने की देर है...........

पढिए सागर जी का २९/०६/२००९ को मुझे भेजा ये मेल -----

""""आदरणीय अर्चना जी,
मेल का जवाब बहुत देरी से देने के लिये क्षमा चाहता हूं। मैने ईस्निप्स पर आपका एक खाता खोला है। जिसकीआपको एक मेल मिली होगी। मेल में एक वेरिफिकेशन का लिंक होगा बस उस पर एक बार क्लिक कर दें। क्लिककरने के बाद ही आपका खाता चालू होगा।; और वहां हम अपने गाने अपलॊड कर उन्हें अपने ब्लॉग पर आसानी सेबजा सकेंगे।
जब आप वेरिफिकेशन वाले लिंक को क्लिक करलें मुझे बतायें जिससे मैं आपके और रचनाजी के गाये गीत कोवहां अपलोड कर सकूं और उसका सचित्र तरीका आपको बता सकूं।
मैं गाने को अपने ब्लॉग पर भी लगा देता हूं, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी यह पॉडकास्ट का तरीका सीखें।
मैं कई दिनों से आपसे पूछने वाला था कि आपकी बहन कौनसी रचनाजी हैं.. लेकिन रचना बजाज जी ने ही बता दिया कि आप उनकी बहन है। :)
एक बार फिर से क्षमा मांगता हूं।""""""


पेरोडी ( विरह गीत )





“गई हो जो सजनी तो जल्दी ही लौटें ,
किचन में हो जायेंगे कॊकरोच छोटे—
गई हो जो —

रोटी जल जाए सब्जी जो छौंके,
सब्जी जल जाए रोटी जो पलटें,
रोटी जले , सब्जी जले ,हलके-हल्के —
गई हो जो सजनी —-
कमर टूट जाए कपडों को धोके ,
कभी ना हो पाए झाडू और पोछे
आ भी जाओ काम करेंगे हम तुम मिलके—
गई हो जो सजनी —-

Friday, April 9, 2010

उफ्फ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!अभी से ये गर्मी !!!!!!!!!!!!!!1

कल बहुत गर्मी थी !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

(अखबार में छपा था ये फोटो कल ------पत्रिका से साभार )

पता नहीं आज क्या होगा ???????????????????

Thursday, April 8, 2010

उसका खजाना ....



इसे आप संस्मरण कह लीजिए या कोई कहानी पर है ये आपबीती ................मेरे लिए इस घटना के मायने अलग है ..........ये वो घटना है ,जिससे मेरे सोचने का तरीका बदला है ...............
बात उन दिनों की है जब मै और मेरी बेटी नागपूर गए थे ..............और ट्रेन में हबीबगंज के पास हमारा एक बेग चोरी हो गया था ...................बहुत घबरा गई थी मै ................ऐसा पहली बार हुआ था ,हमारे साथ परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं था | बेग के साथ ही, मेरे पास जो थोड़े बहुत सोने के आभूषण थे, सब चोरी चले गए थे |दिमाग में
अजीब -अजीब से विचार आ रहे थे एक क्षण में ही सारी बुरी घटनाए जो अब तक घटी थी ,एक-एक कर याद आ गई थी , आंसू निकल पड़े थे मेरे............ ................बहुत समय लगा था इससे उबरने में ...................









जब इन्दोर वापस आए तो एक दिन स्कूल जाते समय बस की खिड़की से बाहर देख रही थी ............रास्ता तो वही रोज का रहता था ,..............पर एक आदत -सी पड़ चुकी थी कि--------जहां -जहां मंदिर ,मस्जिद, गिरजाघर पड़ते है वहाँ सर झुका देना ..................जो परिचित दिखाई पड़ जाए तो मुसकराकर नमस्ते करना ............... हर चौराहों पर सफाई करने वाले द्वारा बनाई रंगोली देखना .........और ......ये तुलना भी करना कि बस जल्दी आई है या काम जल्दी ख़तम कर दिया है ..................सड़क के किनारों पर रोज सोने वालो कों देखना कि वे उठे या नहीं,( मन में तो ये रहता है कि वे सकुशल है या नहीं ,दिखाई नहीं पड़े तो चिंता हो जाती है कि कहा रह गए होंगे......मन कों समझाना पड़ता है कि शायद जगह बदल ली होगी ).................रास्ते में पन्नी बीनने वाले बच्चों और औरतो के जत्थे भी दिखाई देते है ...............
.......और उस दिन भी ..........गुजरते हुए कूड़े के ढेर पर एक पन्नी बीनने वाली महिला कों बैठे देखा ,......उसकी गोदी में २-३ माह का एक बच्चा था ................ वो महिला अपने बच्चे कों दूध पिलाने के लिए कूड़े के ढेर पर ही बैठ गई थी .............और बच्चा भी सबसे बेखबर हो ममत्व का आनंद ले रहा था .........पर जिस दृष्य ने मुझे झिंझोरा था-------- वो ये कि उस महिला ने एक हाथ से अपना पन्नी भरा बोरा कसकर पकड़ा था , साथ के बाकी लोग पन्नी बीन रहे थे ,शायद उसे लग रहा था कि बच्चे कों दूध पिलाने के चक्कर में कोई उसके पन्नी के बोरे से पन्नी चुरा लेगा और उसके चहरे पर इतनी देर पन्नी न बीन पाने का तनाव भी साफ़ दिखाई दे रहा था ..................और मै ................मेरे दिमाग में से वो सूटकेस चोरी वाली बात जा ही नहीं रही थी ......................मै उसका शोक मना रही थी ....................तभी एक विचार आया -----------मेरे पास वो सूटकेस था और इसके पास , ...............इसके पास शायद ये पन्नी का बोरा ...................मुझे उसके चले जाने का दुःख है और इसे इसके चले जाने का वही डर है उसकी परिस्थिति में उसके पास पन्नी का बोरा ही उसका सोना था, ................बस सोने कि तुलना का ख्याल आते ही मेरे होठो पर मुस्कराहट छा गई ..............सोचा मै उस खजाने के लिए रो रही हू और ये इसके लिए खजाने के बराबर है ..................मुझसे कई गुना बड़ा है इसका खजाना ............................... .........
...............

(सभी चित्र गूगल से साभार )

Wednesday, April 7, 2010

आप भी लिखे ..................दो पन्क्तियां.............

आज देखिए बेटे की ये पेन्टिंग ......................



और पढिए इस पर मेरे दिल से निकली ये पन्क्तियां.............


जाने कब से घूम रहा था ,थका समय का पहिया
पीठ टिकाकर थोडा सुस्ताया,जगह देख कर बढिया

अब आप भी लिखे ........इस पर आपके दिल से निकली..............
दो पन्क्तियां.............



इन्होने लिखी दो पंक्तियाँ......
परमजीत बाली
बिन पहिये के सब रुक जाता
समय का है यह पहिया
जीवन तब तक ही चलता है
जान गये हम भैया।


जनदुनिया
मंजिल दूर अभी बहुत है, सोचने का मौका मिला
नई ऊर्जा से फिर घूमेंगे, सोच रहा है पहिया





Tuesday, April 6, 2010

जिसको इसका काम पड़ता है उसे पता हो जाता है .....










पिछले हफ्ते करवाई------- मोम से सिकाई ----------बहुत उत्सुकता थी जानने की............
एक बॉक्स जो बिजली से गरम होता है उसमे मोम कों पूरी तरह पिघला लिया जाता है फिर एक टब में पिघला हुआ मोम डालकर उसे ब्रश से हिलाकर थोडा ठंडा (जितना गरम मरीज सह सके कर लेते है )--------इस पिघले मोम में शरीर के जिस हिस्से का उपचार करना होता है उसे रखकर उस हिस्से पर ब्रश से मोम की गरम-गरम सतह चढ़ाई जाती है,त्वचा के संपर्क में आते ही मोम जमने लगता है -----करीब आधा इंच मोटी सतह जमने के तुरंत बाद इस हिस्से कों प्लास्टिक के टुकडे से ढँक देते है ---उसके ऊपर एक मोटे कपडे से ढँक देते है जिससे मोम जल्दी ठंडा नहीं होता गर्मी बनी रहती है ------करीब १५-२० मिनट बाद जब मोम पुरी तरह ठंडा हो जाता है तब कपड़ा और प्लास्टिक हटाकर , उंगलियों और पंजे कों आगे पीछे हिलाते /चलाते हुए (पैर के के उअपचार में )मोम की सतह कों तोड़कर शरीर से अलग कर दिया जाता है ............. इसमे जो मोम उपयोग में लिया जाता है उसमे कुछ केमिकल मिले होते है जो त्वचा कों नरम बनाये रखते है ,और सतह से काफी अन्दर तक उतक कों गर्मी पहुचाते है (ऐसा डॉक्टर ने बताया ,पर केमिकल का नाम नहीं बताया --कहा medicated wax होता है ) सिकाई के बाद बहुत ही आराम महसूस होता है त्वचा का रंग लाल हो जाता है लगता है खून उतर आया हो फिर उपकरणों से आवश्यक कसरते करवाई जाती है----मुझे ९ दिन करवाने में ही बहुत आराम हुआ है .................जब पहले दिन डॉक्टर के पास गई थी तो पूछा था आखिर ये होता क्या है ?पहले कभी नहीं सुना या किसी कों भी पता नहीं है हर कोई पूछता है ये क्या है ?---उनके मुखड़े पर मुस्कान छा गई हंसकर बोले जिसको इसका काम पड़ता है उसे पता हो जाता है ................. बस बाकी ठीक .......कल से स्कूल जाना शुरू कर दिया है ........लकड़ी टिकाकर ...............शायद ८-१० दिनों में बिना सहारे के चलने लगूँ... ........................

(सभी चित्र गूगल से साभार )