Wednesday, September 29, 2010

सुनिए मीराबाई का एक भजन



   

Monday, September 27, 2010

खेल-खेल में मेरी एक कविता बच्चों को समर्पित...

आज किसी की नहीं मेरी एक कविता मेरे स्वर में सारे बच्चों को समर्पित--




एक प्रेरणादायक प्रसंग यहाँ भी 

Sunday, September 26, 2010

प्रिय बेटी,समर्पित ये दिन तुझको



१,२-मै और बेटी,३-माँ के आस-पास दोनो बेटीयाँ (भाभीयाँ)४-निशी-पापा के साथ५-मेरे साथ प्रान्जली(देवेन्द्र) व सुहानी(राजेन्द्र)६-जीतेन्द्र के साथ वैदेही(वैदेही से मिलिये यहाँ )
और बेटीयों को समर्पित ये कविता--(मोबाईल पर मेसेज मिला था)

ओस की बूँद सी होती है बेटियाँ
स्पर्श खुरदरा हो तो रोती है बेटियाँ
रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को
दो-दो कुलों की लाज होती है बेटियाँ
कोई नहीं एक-दूसरे से कम
हीरा है अगर बेटा
तो सच्चा मोती होती है बेटियाँ
काँटों की राह पर ये खुद ही चलती रहेंगी
औरों के लिए फ़ूल बोती है बेटियाँ
विधी का विधान है
यही दुनियाँ की रस्म है
मुट्ठी भर नीर सी होती है बेटियाँ...

Saturday, September 25, 2010

जस्ट फ़ॉर चेंज......

देवेन्द्र का गाया एक गीत-- पल-पल दिल के पास ...


मैं-- अफ़साना लिख रही हूँ...


मैं-- न जाने क्यों ...


मैं-- हा हा हा हा 


बस एक झलक ...

ना मालूम उसका
मेरी गली में फिर आना हो ना हो
या मेरा ही कभी 
उसके घर जाना हो ना हो
मिल लूँ बस एक झलक 
पलक झपकते ही उसे
शायद फिर कभी 
पलक झपकने का बहाना हो ना हो ...

Thursday, September 23, 2010

ये आंखों की नमी भी न

मेरी आँखों में रह-रह कर कुछ भर जाता है ,
छूने से गीला लगता है,
पर पानी नहीं है वो,
क्योंकि पानी की तो कमी हो गई है,
अरे हाँ, खारा- सा लगता है-
कहीं समंदर तो नहीं?
पर नहीं समंदर हो नहीं सकता,
क्योंकि हर समय नहीं रहता-
भरा आँखों में कुछ,
और वापस नहीं जाता,
आँखों से बह जाता है,
हाँ,याद आया-शायद आंसू,
माँ कहती थी-आंसू खारे लगते हैं।
पर आंसू क्यों होंगे?
वो भी तो कब के सूख चुके,
फ़िर भला ऐसा क्या है?जो-
गीला है,पानी जैसा है,खारा है,
और मेरी आँखों को भर देता है,
और जब देखो तब मेरी आंखों को,
नम  कर देता है |

Wednesday, September 22, 2010

जी करता है जी लूं--

मेरे नसीब में नहीं है, जीना प्यार की जिंदगी
दिल करता है ले लू, जो मिले उधार की जिंदगी
सुन -सुन कर किस्से, खुशियों भरे गुलशन के
जी करता है जी लू, थोड़ी सी बहार की जिंदगी ....

Tuesday, September 21, 2010

मै कौन हूँ ?

मुझे पता है- मैं कौन हूँ?
मैं हर समय रहने वाली आत्मा हूँ,
जो न कभी मरूँगी,न मिटूंगी,
बस---रहूँगी और डटूंगी,
हर उस जगह पर
जो मेरे लिए बनाई गई है।
मुझे पता है-मेरी जगह निश्चित नहीं है,
इसलिए मैं घूमती हूँ यहाँ-वहाँ,
अन्य लोगों से मिलने के लिए,
जिनसे मेरा मिलना जरूरी है,
हर उस जगह पर,
जहाँ वे मेरा इंतजार कर रहे हैं।
मुझे पता है- मुझे हर वो काम करने हैं,
जो मुझे दिए गए हैं,
मै सिखती हूँ उन्हें ,मेहनत से,
करती हूँ उन्हें, मनोयोग से,
पर हो जाते हैं कुछ गलत,
और इसी कारण से शायद,
मै आत्मा हूँ,मेरी जगह निश्चित नहीं है,
और मेरे काम बाकी रह जाते है हमेशा ...

और यहाँ सुनिए फ़िरदौस की गज़ल

Sunday, September 19, 2010

शाम अधूरी मीत याद बिन----एक गीत गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" जी का

बिना किसी भूमिका के सुनिए गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" जी का ये गीत-----



इनका ही एक और गीत सुन सकते हैं यहाँ 

और एक चित्रों से सजा ब्लॉग देखिए यहाँ

Friday, September 17, 2010

बता सकते हो?

कांटो में फंस चुकी हूँ ,हंसने को कहते हो क्यों
न  ठौर न ठिकाना,बसने को कहते हो क्यों
एक भी सुराख ना मिला अब तक मुझे
यूं किरण बनकर चमकने को कहते हो क्यों...

Wednesday, September 15, 2010

दुख नहीं होता पर बुरा लगता है मुझे भी ...कंचन की तरह ...

यूं तो अपने होठों पर ऊँगली रखकर चुप बैठना मुझे पसन्द है,पर मुझे शिकायत है "उससे"-"वो" एक बार,दो बार नहीं हर बार ऐसा क्यों करता है? "वो" मुझे जो भी काम देता है मैं मन लगाकर,न आता हो, तो सीखकर उसे पूरा करती हूँ,पर हर बार जब काम पूरा होकर परिणाम देने वाला होता है,"वो" उस काम से मुझे दूर कर देता है,ये बात तो ठीक नहीं?-----बुरा लगता है मुझे भी ..पर ठीक है,हर बार सोच लेती हूँ-"वो" सब जानता है तो कुछ अच्छा सोचकर ही ऐसा करता होगा।


सबसे पहली बार मुझे याद है तब मुझे व्यक्तिगत खेलों की चेम्पियनशीप मिलने वाली थी,हम सब सहेलियों को साथ जाना था पुरस्कार वितरण समारोह में,साथ जाने के लिए मेरा छोटा भाई भी था,और भी सहेलियाँ अपने भाई बहनों को ले जा रही थी । हमें करीब एक -डेढ़ किलोमीटर चल कर जाना था,जब हम आधे रास्ते पहुँचे तो मेरी बुआ का लड़्का अपने दोस्तों के साथ ८-९ ट्राफ़ियाँ हाथों मे दबाए भीड़ के साथ मिला,बोला-जल्दी नहीं आ सकती थी?,हर बार नाम पुकार रहे थे अर्चना और मुझे जाना पड़ रहा था,मेरे दोस्त हँस रहे थे,और हम वहाँ से ट्राफ़ियाँ पकड़ कर वापस लौट लिए। मैं अपने भाई को धीरे चलने के लिए कुछ नहीं कहूँगी,क्योंकि वो तो बहुत छोटा था,और फ़िर पैदल दूर तक चलना,वो भी क्या करता बेचारा? रास्ते में कीचड़ की नाली  पार करवाने में उसकी चप्पल नाली में गिर पडी थी,उसे निकालने में हमें समय लग गया और फ़िर गंदी कैसे पहनता वो?..............पर "उसने" तो सोचना था,"उसे"तो सब पता होता है न?


फ़िर  जब पढ़ाई करने की समझ आने लगी और पढाई पूरी होते ही पिताजी के साथ ऑफ़िस में वकालात सीखने के सपने आना शुरू ही हुए थे कि शादी करवा दी "उसकी" पसंद के लडके से ..नौकरी/कामकाज के चक्कर से दूर कर दिया ,मुझे वहाँ से हटा दिया।किसी तरह एक-दूसरे को समझकर भाषा,व्यवहार में तालमेल बिठाया और दो बच्चों के साथ गाडी पटरी पर चलने की राह पर आई ही थी कि "उन्हें" ही हटा दिया,जबकि पसंद "उसकी" ही थी ।मुझे पता था कि उस समय मेरी दादी ही मुझे सीखा सकती थी कि अब अकेले बच्चों को कैसे बड़ा करना तो दादी को भी दूर कर दिया..खैर!


बाद में फ़िर पिता-भाईयों के सहारे जीवन शुरू करने ही वाली थी कि मेरी मेरे बच्चों के साथ होस्टल मे रहने की व्यवस्था करके पिता के साथ से वंचित कर दिया---तो बुरा नहीं लगेगा क्या मुझे?---फ़िर भी मैने अपने होठों से ऊंगली नहीं हटाई...........खैर किसी तरह बच्चों को बड़ा किया और बेटा पढ़ाई पूरी करने ही वाला था कि एक रोड़ा अटका दिया..........उसको पार किया और अब सब ठीक होने वाला था कि फ़िर .....


दुख नहीं होता...पर बुरा लगता है मुझे भी "उसने" कुछ तो सोचना चाहिए.........सब कुछ तो उसके हाथ में होता है न ?---------------


अब सुनिये एक बहुत ही साधारण सी भारतीय लड़की कंचन सिंह चौहान जी का ये गीत----------



इसे आप उनके ब्लॉग ह्रदय गवाक्ष  पर पढ़ सकते हैं






Sunday, September 12, 2010

क्या बात ...क्या बात...क्या बात ...

शब्द ने कहा भावों से
आया हूँ उबड़ खाबड़ राहों से
कहीं भाव बिखरे पड़े हैं
तो कहीं शब्द छिटके पड़े हैं
हम बनेंगे नहीं मीत
तो बताओ बनेंगे कैसे गीत
होता है जब माहौल रूहानी
तभी तो बनती है कोई कहानी
मैं अकेला कुछ नहीं कर पाउंगा
तुम साथ नहीं दोगे तो मर जाउंगा
आकर पास जरा मेरी तरफ़ देख
मिलकर बना लें हम कोई लेख
मिलन की खुशबू से
भीगो दें हम अपनी सविता
और शायद फ़िर हमारे प्यार से
जन्म ले कोई कविता ...

Friday, September 10, 2010

Thursday, September 9, 2010

टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी..............

टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी जीती रही मै
कतरा कतरा गम पीती रही मै
जख्मो पर लगे कच्चे टाँके
बार-बार रह रह कर सीती रही मै ...

Sunday, September 5, 2010

ब्लॉगजगत के सभी गुरुजनों को सादर नमन ....शुभकामनाएं........

सादर नमन ........ब्लॉग जगत से जब से परिचय हुआ है ,तब से किसी न किसी व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने को मिला है ....सभी गुरुजनों को मेरा नमन ..... वे अपना आशीर्वाद  बनाए रखेंगे मुझ पर ...इसी आशा के साथ .....
आज प्रस्तुत है दिलीप की लिखी एक वन्दना.....   "दो मुझे वरदान माँ ".........................उनके ब्लॉग " दिल की कलम " पर आप इसे पढें......

Thursday, September 2, 2010

जन्माष्टमी पर्व पर एक भजन ----मुरलीधारी -दिन भर करिये /सुनिए /पढ़िए

जय श्री कृष्ण ...


आज ये भजन प्रवीण पाण्डेय जी के ब्लॉग से--------सुनिए 



और यहाँ पढ़िए ....न् दैन्यं न् पलायनम

और यहाँ सुनिए     गिरीश जी    के आलेख के साथ रचना के गाये स्त्रोत्र ...

Wednesday, September 1, 2010

अबूझ पहेली - बुझो तो जानू ........आज भी पुरानी पोस्ट बस यूं ही माइंड फ्रेश ....

आज मैं कुछ लिखना चाहती हूँ , पर हाथ नहीं चल रहे,
आज मै कुछ दूर चलना चाह्ती हूँ पर , पाँव नहीं उठ रहे ,
आज मैं कुछ कहना चाह्ती हूँ पर ,होंठ नहीं खुल रहे ,
थक चुकी हूँ कहते -सुनते---" जो होता है अच्छे के लिए होता है ",
पर--वो होता ही क्यों है ? , जो अच्छा नहीं होता ! ,------

कोई लिखता है , कोई पढता है , कोई खाता है , कोई पीता है ,
कोई आता है , कोई जाता है , कोई जीता है ,कोई मरता है ,
कोई हँसता है , कोई रोता है , कोई गाता है ,कोई बजाता है ,
कोई खोता है , कोई पाता है , कोई जागता है, कोई सोता है ,
कोई उठता है , कोई बैठता है, कोई कहता है , कोई सुनता है ,
कोई देखता है , कोई बोलता है , कोई समझता है , कोई बूझता है ,----
----------------??????
???????????????????????????
???????????????????????????????????
----उफ़फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ,
अजीब पहेली है ये दिमाग को घुमा के रख दिया क्या आप बतायेंगे ???-----

" जो जीता है --- वो खाता है --- जो खाता है --- वो पीता है --- जो पीता है --- वो मरता है --- यानि कि जो जीता है --- वो मरता है --- अब जो मरता है --- वो जाता है --- जो जाता है --- वो आता है --- जो आता है --- वो पाता है --- जो पाता है --- वो खोता है --- जो खोता है --- वो रोता है --- यानि कि जो मरता है --- वो रोता है --- अब जो रोता है --- वो हँसता है --- जो हँसता है --- वो गाता है --- जो गाता है --- वो बजाता है --- जो बजाता है --- वो सुनता है --- जो सुनता है --- वो बोलता है --- यानि कि जो रोता है --- वो बोलता है ---- अब जो बोलता है --- वो खोलता है --- जो खोलता है--- वो ढोलता है --- जो ढोलता है --- वो रखता है --- यानि कि जो बोलता है --- वों रखता है --- जो रखता है --- वो देता है --- जो देता है --- वो लेता है --- जो लेता है --- वो बाँटता है --- जो बाँटता है --- वो पाता है--- यानि कि जो रखता है --- वो पाता है --- जो पाता है --- वो दिखता है --- जो देखता है --- वो लिखता है --- जो लिखता है --- वो फ़ंसता है --- जो फ़ंसता है --- वो देता है --- यानि कि जो पाता है वो देता है --- अब जो देता है --- वो बचता है --- जो बचता है --- वो बोलता है --- जो बोलता है --- वो छपता है --- जो छपता है --- वो छन जाता है --- जो छन जाता है --- वो दिखता है --- जो दिखता है --- वो बदल जाता है --- यानि कि जो बचता है --- वो बदल जाता है --- अब जो बदल जाता है --- वो संभल जाता है --- जो संभल जाता है --- वो चलता है --- जो चलता है --- वो थकता है --- जो थकता है --- वो रुकता है --- जो रुकता है --- वो झुकता है --- जो झुकता है --- वो मानता है --- जो मानता है --- वो जानता है --- जो जानता है --- वो ज्ञाता है --- जो ज्ञाता है --- वो त्राता है --- यानि कि जो बदल जाता है --- वो त्राता है --- अब जो त्राता है --- वो माता है --- जो माता है --- तो भ्राता है--------------शायद इसीलिए --- ऐसे ही ये सब होता रहता है !!!!!!!!!!!!!!!!!!! --- ---------- जो---------------!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!




मेरी इस  पोस्ट पर कुल दो टिप्पणिया मिली थी |पोस्ट ही ऐसी थी |मुझे पता था कोई भी पढेगा तो घूम जाएगा शायद शीर्षक देखकर ही चकरा गया |फिर मैंने इसे अब थोड़ा आसान कर दिया ....दूसरी पोस्ट में ....


पहले जो शब्द मै लिख रही हू उनको ध्यान से पढ़ कर दिमाग में बैठा लीजिये | शुरू करू ?------
ये रही लिस्ट ------
जन्म ,म्रत्यु , पुनर्जन्म , खाना , शराब , नेता ,चोरी , रिश्वत , पुलिस , बयान , ख़बर ,
 चेनल , पैसा , मैडम , राहुल-------- (अब इन जैसे कई शब्दों की लिस्ट हो सकती है कुछ आपकी तरफ़ से भी) ------हो जाए----
ये क्रम में नही जमे है जहां मर्जी हो पढें ( मतलब --क्या ,कौन ,कैसे ,किससे , कहां )-----------समझे ???????? --- हा हा हा --------!!!!!!!!!!!!!!!



अब पुराने कमेंट्स भी पढ़ने हो तो यहाँ जाए ......

पहेली 
हल