Monday, October 31, 2011

बस धन्यवाद कहना है ....

पिछले दिनों जन्मदिन पर  इतनी बधाईयाँ और प्यार मिला जिसे भूला नहीं पाउंगी कभी..और ये सिलसिला अब तक नहीं रूका है ...

मेरे बच्चो, भाईयों और परिवार ने चकित कर दिया पूरे २४ घंटों तक ...
जैसा उधर पा रही थी वैसा ही इस ब्लॉग परिवार में भी  ..

 इस स्नेह की शुरूआत हुई थी गत दिनों मेरी रायपुर ट्रिप के साथ ....... 
(रायपुर ट्रिप पर लिखना बाकी है इन रिश्तों की अगली कड़ी में.).....

कहा था मैनें पहले भी कि--------- आभासी रिश्ते आभासी नहीं होते 

सब कुछ तो लिख नहीं पा रही अभी न  फोटो ही हैं मेरे पास..........

..फ़िर कभी सही पर क्या कहूँ आभार व्यक्त करने को शब्द नहीं हैं मेरे पास ...बहुत देर हो गई है ............पर बस धन्यवाद कहना है सबको....
और ये तरीका ही नज़र आ रहा है.........




Sunday, October 23, 2011

शुभ-दीपावली

दीपावली के पर्व पर आप सभी को बधाई व शुभकामनाएं....

















वैदेही-संदीप की बनाई रंगोली पर दीपक सजा रही है...


देवेन्द्र द्वारा लक्ष्मी पूजा ...

हमारा घर - खरगोन



और अब ये जिम्मेदारी मुझ पर...
 गुलाबजामुन तैयार...!!!...आईये आप भी...खाईये
 वत्सल भाई साहब ,बहनों के साथ (पल्लवी,प्रान्जली,निशी और सुहानी)


 और फ़िर आतिशबाज़ी का मजा सबके साथ ......फ़ुलझड़ी....
 नहीं.....फ़ुलझड़ियाँ..................
 मन्जू भाभी,माँ और बड़ी बुआ(ताई) भी...
-- बुआ के साथ उर्वशी भाभी....
 ..........................अनार ..............
............... चकरी.....................
 ...........अहा ! ! ! ...............



 और अन्त में एक ग्रुप फोटो...
(वत्सल फोटोग्राफ़र हो तो मिस नहीं करता) ........










 सभी फोटो २०१० की दीपावली के ...

Saturday, October 15, 2011

इश्क़ --- मौन की भाषा

आज एक ऐसी रचना जो गहरे तक असर कर गई पहली ही बार पढ़ने में ..शायद आप भी ऐसा ही महसूस करें

पंजाबी नहीं जानती तो उच्चारण गलत हो सकते हैं बल्कि हैं भी......... पर भाव भाषा के ऊपर सवार हों जाएं तो क्या किया जा सकता है ......और फ़िर कह्ते हैं न कि मौन की भी अपनी भाषा होती है ....



इसे ...यहाँ ...........और इस जैसी  कई रचनाएं पढ़ सकते हैं आप यहाँ --

Wednesday, October 12, 2011

याद न जाए....बीते दिनों की..


जब देखो तब मास्टरनी..मास्टरनी.....ऐसा मैनें क्या सीखा दिया? ..जरा बताना तो.!!...मैनें उसे डाँटते हुए कहा।

सॉरी ..मास्टरनी......फ़िर एक बार कह दिया उसने ....

सुनते ही अपने चेहरे की मुस्कुराहट को नहीं रोक पाई थी मैं...और वो नहीं देख पाया था ----मेरी आँखों को मुस्कुराते हुए---- जिसे मैं दिखाना चाहती थी.... मेरा (एक्स) बेस्ट फ़्रेंड...


जब देखो तब मास्टरनी..मास्टरनी.....ऐसा मैनें क्या सीखा दिया? ..जरा बताना तो.!!...मैनें उसे डाँटते हुए कहा।

सॉरी ..मास्टरनी......फ़िर एक बार कह दिया उसने ....

सुनते ही अपने चेहरे की मुस्कुराहट को नहीं रोक पाई थी मैं....और उसने देख लिया था मेरी आँखों की मुस्कुराहट के पीछे छुपे दर्द को---- जिसे मैं छुपाना चाहती थी.... मेरा बेस्ट फ़्रेंड....

लम्हे गुजरे....वक्त बीता.....आज हर कोई पुकारता है --मास्टरनी... मास्टरनी....हालांकि चेहेरे पर मुस्कुराहट तो आज भी आ जाती है पर पत्थर हो चुकी आँखों के पीछे छुपा दर्द कोई देख नहीं पाता...पानी बन बह जाता है

.....याद आता है बहुत .....मेरा बेस्ट फ़्रेंड .....


Sunday, October 9, 2011

आखिर क्यों?..

आखिर क्यों

क्यों....
आखिर क्यों ?........

सवाल इतने सारे 
कौन सा पूछूँ पहले  
इसी सोच में हूँ ....

क्यों होता है ऐसा?
क्यों नहीं होता वैसा?
क्यों करते हैं ऐसा?
क्यों नहीं करते वैसा?
ऐसा करने से क्या होगा?
वैसा कर लिया तो क्या हो जाएगा?
नहीं आ पाता है समझ कुछ?
क्या मिलेगा उसे ऐसा करने से?
मैं क्या करूँ?
क्यों करूँ?
....
ये वो सवाल हैं,
जो दिन भर मथते हैं मुझे,
और
अनायास ही ऊँगली चली जाती है

होंठों पर..

कह उठती हूँ मैं...
चुप!!!!!

आखिर क्यों?

--अर्चना

Wednesday, October 5, 2011