Saturday, June 30, 2012

अपनापन - एक कहानी



कहानी -- अपनापन  
लेखिका -- रचना बजाज
पॉडकास्ट-- अर्चना चावजी





इस कहानी और कई सारी अन्य कहानियों को  आप रेडियो प्लेबैक इंडिया पर  "बोलती कहानी"
कार्यक्रम के अन्तर्गत सुन सकते हैं 

Saturday, June 23, 2012

हवाओं में गुम खुशबू...


जो बात एहसास में है वो पाने में नहीं..........संजय अनेजा जी की एक पोस्ट...

काश कभी य़ूँ भी हो...


Thursday, June 21, 2012

रिश्ता -तुमसे मेरा...

(ये कोई कविता नहीं है बस बात की है मैंने और दिलीप ने)...

अक्सर ऐसा होता है कि
जिंदगी आपको इतना पत्थर कर देती है कि
सबसे दूर जाने का मन करने लगता है
पर कुछ रिश्ते कभी नहीं टूटते
जैसे - तुमसे मेरा....

हमारा रिश्ता ही ऐसा है कि
तुम मुझसे दूर नहीं जा सकते
और
मैं तुम्हें जाने नहीं दे सकती...
बिछड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता..
ये तुम भी जानते हो और मैं भी..
बाँध कर रखा है एक डोर से..
जो दिखाई नहीं देती....










Monday, June 18, 2012

ह्म्म्म...

यादों के मौसम की गुनगुनी धूप के बीच
तसवीर हाथ में ले
मेरा हौले से पुकारना
ह्म्म्म.. कह कर तुम्हारा आना
और मेरी बन्द पलकों की नमीं में ही छुप जाना
धीमे से मुस्कुराना
मुझसे मिलना,और
मुझे तनहा छोड़
चुपके से गुम हो जाना
रोज़ मिलकर बिछड़ जाना
अच्छी आदत नहीं........

-अर्चना

Sunday, June 17, 2012

Friday, June 15, 2012

कॄष्ण की चेतावनी -- रामधारीसिंह ‘दिनकर’

आज प्रस्तुत है रामधारीसिंह "दिनकर" जी की एक कविता  ---
कॄष्ण की चेतावनी--

इसे सुनिये मेरी आवा़ज़ में  ---

Thursday, June 14, 2012

मेरी दुनियाँ है माँ तेरे आँचल में--- देवेन्द्र का गाया गीत..


माँ से बढ़कर कोई नहीं....कोई प्रस्तावना नहीं कोई,भूमिका नहीं...

                                         शशी मासी,नीरू मासी और माँ

हम भाई-बहन भी माँ को कहते ही नहीं कभी ...पर हम भी चाहते  हैं माँ से कहना ---

-----------  माँ SSSSS माँSSSSS मेरी दुनिया है माँ तेरे आँचल में......

-----------  मम्मा ...मम्मा......तू गुस्सा करती हैSSSS बड़ा अच्छा लगता है ..... 
                                                     
आज हम सबकी भावनाओं को  देवेन्द्र ने स्वर दिया है ----
आप भी सुनिये ---

                

                                         हम और माँ---





Tuesday, June 12, 2012

आभासी रिश्ते...आभासी नहीं हैं...१


(ये मैं पहले 30 दिसंबर 2010 को पोस्ट कर चुकी हूं आज नये सिरे से करना पड़ रहा है वहाँ प्लेअर नही चलने की वजह से )

ब्लॉग जगत में आभासी रिश्तों के बारे में बहुत कुछ कहा गया ...मैने भी बनाए रिश्ते यहाँ...जो सहयोग मुझे मिला उसके लिए आभारी हूँ सभी की...मुझे लगता ही नहीं कि हम लोग मिले नहीं हैं..रिश्तों के बारे में बातें करते हुए .मैने लिखा कुछ इस तरह ---
चाचा, पिता,बेटे -बेटी और मित्र मिले हैं मुझको घर -घर
साहस मेरा और बढ़ेगा,नहीं रहूँगी अब मैं डर -डर
 सूख चुके हैं आँसू मेरे ,जो बह रहे थे अब तक झर -झर
उफ़न चुका गम सारा बाहर,भर चुके सारे नदिया निर्झर
मर चुके कभी अरमान मेरे जो,जी उठेंगे अब वो जी भर
फ़ूल उगेंगे हर डाली पर, हो चुकी सब डाली अब तर
छिन चुका था मेरा सब-कुछ,भटक रहे थे अब तक दर-दर
सुर सरिता की सहज धार में,अब पाया है स्नेह भर-भर
परबत-समतल एक हो गए ,मैं जा पहूँची अभी समन्दर
चाह मुझे सच्चे मोती की ,लेना चाहूँ सब कुछ धर-धर

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" जी नें सुधार करके मेरी भावनाओंको शब्द दिए और उसका नतीजा निकला ये गीत---

नित नाते संबल देते हैं
क्यों कर जियूं कहो मैं डर-डर
सूख चुके हैं आँसू भी मेरे
जो बहते थे अब तक झर-झर
उफ़न चुका गम सारा बाहर
शुष्क नहीं नदिया या निर्झर
प्राण हीन अरमान मेरे प्रिय
जी लेंगे कल को अब जी भर
रिमझिम ऐसे बरसे बादल
हरियाये तुलसी वन हर घर
छिना हुआ सब मिला मुझे ही
दिया धैर्य ने खुद ही आकर
सुर सरिता की सहज धार ने
अब तो पाया है स्नेह मेह भर
परबत-समतल एक हो गए
जा पहुंचा मन तल के अन्दर
चाह मुझे सच्चे मोती की
पाना चाहूं सहज चीन्ह कर

जिसे मैंने गाया कुछ इस तरह ----



Monday, June 11, 2012

किस्मत की लकीर

किस्मत की लकीर
किताबों में नहीं होती
लिखी होती है सिर्फ़ हाथों में
और हाथ करते हैं विश्वास
मेहनत पर
खुद की लकीरों को नहीं मानते
करते हैं दिन रात काम
दिलाते हैं मुकाम
तुम्हें और मुझे
तुम और मैं
और फ़िर वही
बारिश की शाम
उठा लेते हैं
एक -एक जाम
अपनी अपनी किस्मत के नाम 

और खीच देते हैं लकीर
अपने और अपनों के बीच

उछालकर एक -दूसरे पर कीच ......
-अर्चना

Friday, June 8, 2012

जादू की झप्पी...




 जादू की झप्पी...
आओ मुझसे मिलो
बिना झिझके
गले भी लगो
मैने बना लिया है
मौन का एक खाली घर
जहाँ मैं हूँ और मेरे कंधे
रो कर थके हुओं को
सोने के लिए
एक जादू की झप्पी के बाद
रोने की नहीं होती कोई वजह
और इसीलिए
मेरे घर में हमेशा बची रहती है जगह...

Thursday, June 7, 2012

चंदा की डोली...

सब कुछ भुला देती है,
सपने सजा देती है,
 ये चंदा की डोली ...


 



Tuesday, June 5, 2012

हसीन मुलाकातें...कुछ यादें ...कुछ बातें

खुद से मिलना 
खुद को पाना 
खुद से मिलकर फिर 
खुद में समां जाना 
कितनी हसीन होती है ये मुलाकातें 
खुद से जब करती हूँ खुद की बातें 
न कुछ बोलना 
न कुछ सुनना 
बस  दिल का दर्द दिल ही में घोलना 
फिर उसे नम आँखों से तोलना 
ख़ामोशी सब कुछ बयां क़र जाती है 
ये सब होता है तब 
जब सिर्फ और सिर्फ  
तुम्हारी याद आती है 
 
-अर्चना
एक गीत--- न जाओ सैंया....