Saturday, October 17, 2015

खाना

चलिए आज बताती हूँ......कंडे/उपले और ओवन के अभाव में बाटी खाने का मन हो तो कैसे बनाएँ
सबसे पहले डेढ़ नंबर पर पीसा आटा /बाटी का आटा लेकर तेल का मोयन दें
आटे में आधा चम्मच नमक मिलाकर गुनगुने पानी से नरम बाँध लें.....गूँदना नहीं है .....
हथेली पर चपटे गोले बना लें
कढ़ाई या मोटे पेंदे का तपेला लेकर घी डालें...पिघलने पर बाटी छोड़ते जाएं
पलट कर सेंक लें व् साइड में हटाते हुए सारी बाटियाँ हल्का भूरा होने तक सेंक लें
थोड़ा-थोड़ा ढंकते रहें.....आँच धीमी रखें पूरा समय .......
डरे नहीं ...घी कम ही लगेगा ...smile emoticon
ट्टी-मीठी दाल के साथ खाएं (ईमली -गुड़ वाली)

Tuesday, October 13, 2015

ईनाम VS ईमान

मायरा - नानी ये पुरस्कार क्या होता है?
नानी- पुरस्कार मतलब होता है ईनाम 
मायरा - ईमान 
नानी - नही ,ईनाम 
मायरा-?
नानी - मतलब , जिसको अच्छा काम करने पर लेते  हैं -, ईनाम ...

मायरा - अच्छा ! तो...ईनाम को दिया नहीं जाता ?
नानी- दिया जाता है न ! ईनाम को  अच्छा काम करने पर देते हैं.....
मायरा - दे भी सकते हैं, ले भी सकते है|..... लेनेवाला दे भी सकता है,देनेवाला ले भी सकता है .... :-)
नानी- हम्म !...चुप्प ...बंद कर चटर-पटर !
मायरा - और ईमान को?
नानी-........ 
मायरा - और ईमान?,ईमान  भी कुछ होता है क्या ?
नानी - ईमान को देते हैं तो कोई लेता नहीं ....और जिसको अपने पास रखते है, देने से कोई लेता नहीं वो - ईमान  
मायरा - आपको कभी मिला ईनाम ?
नानी - नहीं
मायरा - तो आप देते हो ?
नानी -नहीं .... 
मायरा - तो क्या आप ईमान देने मे लगे हो जिसको कोई लेता नहीं   ... 
नानी ----------------???

Sunday, October 11, 2015

होना ही था

जब पेड़ कटें नदियाँ सूखे 
तालाबों को तो गारा होना ही था 
और महके माटी ज्यों चन्दन
मन को तो पारा होना ही था ....



अपनों ने ही दी जब घुड़की 
ध्रुव को तो तारा होना ही था 
और करनी ही थी नटखट लीला 
कान्हा को तो कारा होना ही था ....


यादों की बंसी जब गूँजी 
अंसुअन को तो खारा होना ही था
तूने थाम रखी जब मन की डोरी 
अरे! मोहे तो थारा होना ही था ....


लाज न हो आँखों में जब 
आँचल को तो झारा होना ही था 
कीमत ही नहीं जब पशुधन की 
धन लक्ष्मी को चारा होना ही था .....

-अर्चना 

Saturday, October 10, 2015

दिवाली की मिठाई

.2 कटोरी मैदा 
मोयन के लिए 3 छोटे चम्मच शुद्ध घी
तलने के लिए घी
दूध
1 चम्मच गेहूँ का आटा
एक तार की चाशनी तैयार कर लें इलायची इच्छानुसार मिलाएं स्वाद के लिए 
एक कटोरी में 2 चम्मच घी में 1 चम्मच गेहूं का आटा मिलाकर रख लें रोटी के ऊपर लगाने को 
मैदे की रोटी बेलें, घी-आटा लगाकर लपेट लें, चाक़ू से छोटे टुकड़े काटें, उन टुकड़ों को चपटा बेल लें ...
चिरोटी को घी में गुलाबी तलकर गुनगुनी चाशनी में डुबोकर निकालते जाएं ....बस हो गई मिठाई तैयार
.
3 कटोरी शक्कर चाशनी बनाने को, ..2-3 इलायची
मैदे में 3 चम्मच घी का मोयन हल्के हाथ से मिलाएं......दूध से नरम आटा बाँध लें,
.कब बुला रहे हैं खाने पर?...grin emoticon

Thursday, October 8, 2015

तैराकी मायरा की

मायरा पानी से नहीं डरती......उम्र है अभी एक साल पाँच महीना
मुझे तैरना नहीं आता था .... जब हॉस्टल मे वार्डन का जॉब मिला तो हॉस्टल के बच्चे छुट्टी के दिन स्विमिंग कराते थे ,और मेरी ज़िम्मेदारी होती थी उनके साथ खड़ी रहूँ..... किसी भी दुर्घटना की संभावना से ही डरी रहती थी .... आखिर तय किया की पहले खुद सीख लूँ ...और वही किया भी मेरी उम्र होगी कोई 37 साल ....
लेकिन अब मायरा ...देखिए खुद ही





Tuesday, October 6, 2015

एक मुलाक़ात बरसों की

हम जो सोचते हैं वो होता नहीं, और जो होता है वो हम सोचते नहीं....
इस बार बहुत पहले से तय था की 3 माह की छुट्टी लेकर वत्सल के साथ बंगलौर में रहूँगी ...जब ये बात सलिल भैया....चला बिहारी फेम .......को बताई तो कहने लगे ...इस आभासी दुनिया में एक उम्मीद थी की इंदौर रहोगी तो कभी न कभी मुलाक़ात होगी मगर बंगलौर यानि ....मुश्किल!
...पर होना तो कुछ और ही लिखा था ...पारिवारिक कार्य से गांधीनगर जाना पड़ा और जब ये खबर भैया को दी....तो पट से बेग उठाया ..मौके को भुनाया और भाभी संग मिलने चले आए ...भावनगर से अहमदाबाद .......और वहां से गांधीनगर तक मैं लिवा लाई.....
दिन बिताया साथ में गप्पे लड़ाते.....खाने में तो ज्यादा कुछ खातिरदारी कर नहीं पाई .....पर मिलने मिलाने में कसर बाकि न रही......
दो यादगार मुलाकातें मेरी यादों का हिस्सा बनी ...एक तो आप जान गए ....
और दूसरी.....आनंद से ......उसके बारे में विस्तार से फिर कभी....