न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे, न ही किसी कविता के, और न किसी कहानी या लेख को मै जानती, बस जब भी और जो भी दिल मे आता है, लिख देती हूँ "मेरे मन की"
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Sunday, April 30, 2017
Tuesday, July 28, 2015
बारिशों के मौसम में "उड़नतश्तरी" के साथ एक प्रयोग
पाँच साल पहले एक प्रयोग के तौर पर समीर लाल "समीर" जी के एक ऑडियो के साथ अपने ऑडियो को मिक्स कर ये पॉडकास्ट तैयार किया था ....
इसे उनके ब्लॉग उड़नतश्तरी पर सुना था ...
पुरानी पोस्ट पर ऑडियो प्ले नहीं हो रहा है .. इसलिए आज फिर से पोस्ट किया .. तब और अब सुनने वाले भी बदल गए हैं ..नई खेप आ गई है नेट पर ..शायद नया लगे .
इसे उनके ब्लॉग उड़नतश्तरी पर सुना था ...
पुरानी पोस्ट पर ऑडियो प्ले नहीं हो रहा है .. इसलिए आज फिर से पोस्ट किया .. तब और अब सुनने वाले भी बदल गए हैं ..नई खेप आ गई है नेट पर ..शायद नया लगे .
Saturday, March 2, 2013
तेरी बिंदिया रे.... चुरा ली है मेरी निंदिया रे ....
एक पोस्ट समीर लाल जी की उनके ब्लॉग "उड़नतश्तरी" से . .. कई दिन ....बल्कि साल कहूँ तो भी ठीक होगा से पढ़ रही हूँ ,महीना पंद्रह दिन में याद आती रही है,कई बार कोशिश की रिकार्ड करने की पर मेरी आवाज में कभी अच्छी नहीं लगी मुझे , पोस्ट ही ऐसी है कि पुरूष स्वर में ही अच्छी लगेगी हमेशा ऐसा ही लगा और फिर बनी ये पोस्ट --
और ये रूप भी बिंदिया का --
दासी फिल्म से एक गीत - गायक -मन्नाडे
बिन्दिया जागाए हो रामा निंदिया न आए ....
और ये रूप भी बिंदिया का --
दासी फिल्म से एक गीत - गायक -मन्नाडे
बिन्दिया जागाए हो रामा निंदिया न आए ....
Tuesday, July 5, 2011
माँ मुझे अपने आँचल में छुपा ले,गले से लगा ले,कि .........
माँ....बच्चे के मन की हर बात को वो पहले से ही जान जाती है ...... माँ के न होने का अहसास ही सिहरन पैदा कर देता है...किसी भी उम्र के हो जाएं अगर माँ है तो बचपन जिंदा रहता है......और प्राकॄतिक आपदाओं मे अपनों को खोना वैसे भी दुखद होता है.....और वो माँ हो तो ..............."सुनामी". मे अपनी माँ को खो चुके बच्चे की भावनाओं को व्यक्त करते हुए समीर लाल "समीर" जी का एक गीत ‘माई’ पढ़ा /सुना ....और खुद महसूस किया-------
(एडिट किया पद्मसिंह जी ने)
(एडिट किया पद्मसिंह जी ने)
Friday, March 11, 2011
" मेरी कहानी"----मेरी जुबानी...
मुझे लिखना नहीं आता.....या कहूँ कि व्यक्त करना नहीं आता खुद को ...बस पढ़ लेती हूँ,जहाँ लगता है मेरी बात सुनी जाएगी या उस पर ध्यान दिया जाएगा,वहाँ कहती हूँ,वरना चुप रहना पसन्द करती हूँ।
समीर लाल जी की ---------------(शब्द नहीं आ रहा क्या लिखूँ,गलत न हो जाए इसलिए जगह खाली छोड़ दी है )--"देख लूँ तो चलूँ"....कुछ ने पढ़ ली, कुछ पढ़ रहे हैं, कुछ पढ़ेंगे।
मुझे भी मिली, (मालूम नहीं था मिलेगी या नहीं),मैनें पढ़ी (छपने से पहले)...बिल्कुल शीर्षक की तरह ---देख लूँ तो चलूँ.......पूरी अभी भी नहीं पढ़ी। मैने अपना हिस्सा पढ़ा और मुझे यकीन है रचना ने भी अपना ही पढ़ा होगा।
हम शुरू से ऐसे ही हैं - दूसरे के हिस्से को नहीं छेड़ते,सिर्फ़ अपना और अपनी पसन्द का ही लेते हैं, बाकी का जिसका होता है उसके पास ही रहने देते हैं।( एक पन्ने पर मेरा व रचना का नाम भी देखा -पता नहीं वहाँ कैसे आ गया!! )
लम्बा पढ़ने से हमेशा से परहेज रहा है मुझे, एक तरफ़ा संवाद पसंद नहीं( शायद एक तरफ़ा जीवन जीने के अनुभव के कारण)...
बहुतों ने कुछ कहा भी कुछ इस तरह ----
देख लूँ तो चलूँ का विमोचन समारोह ----१८ जनवरी
मुझे समीर लाल एक शैलीकार लगते हैं: श्री ज्ञानरंजन जी: ‘देख लूँ तो चलूँ’ के विमोचन पर---२० जनवरी
ऐसी कौन सी जगह है जहाँ समीर का अबाध प्रवाह नहीं है:आचार्य डॉ हरि शंकर दुबे ----२४ जनवरी
ऐसी कौन सी जगह है जहाँ समीर का अबाध प्रवाह नहीं है:आचार्य डॉ हरि शंकर दुबे ----२४ जनवरी
विमोचित पुस्तक ' देख लूँ तो चलूँ ' महज यात्रा वृत्तांत न होकर उड़न तश्तरी समीर लाल समीर के अन्दर की उथल-पुथल, समाज के प्रति एक साहित्यकार के उत्तरदायित्व का सबूत है - विजय तिवारी ' किसलय ' ---२४ जनवरी
देख लूँ तो चलूँ...समीर जी को पढ़ने से पहले की तैयारी...खुशदीप---२९ जनवरी
समीर जी की किताब- इतना पहले कभी नहीं हंसा...खुशदीप---३० जनवरी
देख लूँ तो चलूँ...समीर जी को पढ़ने से पहले की तैयारी...खुशदीप---२९ जनवरी
समीर जी की किताब- इतना पहले कभी नहीं हंसा...खुशदीप---३० जनवरी
"देख लूँ तो चलूँ"-समीर लाल "समीर" : डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
Sunday, October 31, 2010
एक गज़ल ---समीर जी की...
समीर जी के बारे मे ज्यादा जानना चाहें तो फ़िलहाल यहाँ पढ़िये---
और दिव्यांशी बिटीया को अब तक जिसने जन्मदिन की बधाई न दी हो वे बधाई दे राजेन्द्र जी के ब्लॉग पर ...सुने उनकी एक रचना बेटी....
(अगर प्लेयर न चले तो शिर्षक पर एक बार क्लिक करें)
Tuesday, August 17, 2010
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