Saturday, May 29, 2021

शतायु की कामना

ये मेरे छोटे फूफाजी हैं।बुआ और फूफाजी की जब शादी हुई तो रितिरिवाज और रहनसहन ,भाषा सब कुछ अलग था दोनों काा

, फूफाजी महाराष्ट्र केऔर बुआ मध्यप्रदेश की ।
उस समय में जब लड़कियां बहुत कम पढ़ती थी हमारे समाज में ,बुआ ने एमएससी किया था।
शादी के बाद वे पूरी तरह से महाराष्ट्रीयन लगती थीं। भाषा भी मराठी ,और चंद्रपूर में भुसारी मैडम (टीचर)के नाम से उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
समय बीता और दो बेटियों को इंजिनियर बनाया।
वही उनके बेटे भी हैं।
बुआ रिटायर हुई ,और डायबिटीज की गिरफ्त में आने पर हम उनके सानिध्य से वंचित हो गए।
बुआ की बड़ी बेटी को करीब 11 वर्ष पहले किडनी डोनेट की फूफाजी ने।
 आज वे और फूफाजी दोनों स्वस्थ हैं और फूफाजी अपना 80वा जन्मदिन मना रहे हैं।
यही बड़ी बेटी भावना है 


ईश्वर उन्हें शतायु करे।

Tuesday, May 25, 2021

अपनों के लिए



बिछुड़ना उदासी फ़ैला रहा है 
हम सबके बीच..
कोई हँसाओ तो ज़रा सबको ..

हँसती हुई तस्वीर देखो ..
ज़रा तुम भी ...
कैसे रंग भरती है जीवन में 

और ये देखो !!
इंद्र धनुषी रंग............
जाने का मन नहीं करता मेरा...

Wednesday, May 19, 2021

अनमना मन


अनमनी सी बैठी हूं,
चाहती हूं खूब खिलखिलाकर हंसना
कोशिश भी करती हूं हंसने की
पर आंखें बंद होने पर  वो चेहरे दिखते हैं
जिन्हें मेरे साथ खिलखिलाना चाहिए था
अपनी राह में साथ छोड़ बहुत आगे निकल गए वे
और मैं चाहकर भी हंस नहीं पा रही

चाहती हूं इस बारिश के बाद 
इंद्रधनुष को देखूं
पर आसमान में काले बादल ही छंट नहीं रहे
सातों रंग अलग न होकर सफेद ही सफेद शेष है
हर तरफ गड़गड़ाहट के बीच चीत्कार गूंजती है
बाहर से न भीग कर भी अंदर तक भीगा है मन
और मैं ताक रही अनमनी सी...

Wednesday, April 14, 2021

मेरा बच्चा और उसके बच्चे

यही पल ऐसे हैं जो लाते हैं चेहरे पर मुस्कान।

Monday, February 15, 2021

शुभकामनाएं निशी



ऐ! छुटकी बंजारन
रूहानी मौलिमणी!
या कहूँ-मौली दी
धड़कन रोक देती है
तेरी वात्सल्य भरी
अक्षरों में पगी पोटली
प्रेम,प्यार,दुलार
और तेरा मनुहार
सदा शरारत को 
छुपा लेता है तेरी
सच! कोई धैर्य रखे 
तो कितना? 
और विश्वास भी करे 
तो कैसे?
तेरा मंतव्य तो 
मंज़िल पाने का होता है
और हम भ्रम में 
"दीदी" का सहारा 
बनने की ख्वाहिश में 
हिमालय की चोटी से 
धरा पर आ गिरते हैं ....
जरूर तुझमें 
ॐ का तत्व छुपा है
माँ की दुआएं तेरे साथ है...

ग़म और विरह 
में जकड़ी मैंं ठूँठ -सी
संदेश समझ न पाई तेरा
आह!...

मनुष्यता की सफ़ल सलाया
तेरी जिजीविषा से 
खिल उठा मेरा भी
संतोषी गुलमोहर
अनुपम..

आप कहूँ या आत्मन!
मेरी दी ... छुटकी स्वच्छंद बंजारन .... 
जीयो जीयो .....खूब जीयो ...
- अर्चना (मासी)

(निशी के जन्मदिन पर उसे समर्पित )

Wednesday, February 3, 2021

चाय और हम

चाय घर पर 6 लोगों के लिए
1...मेरे लिए बिना शक्कर, आधा कप
2...मेरे लिए कम शक्कर ,ज्यादा दूध ,पूरा कप
3...मेरे लिए कम शक्कर,कम दूध,बड़े वाला कप
4...मेरे लिए शक्कर ज्यादा ,प्लेट के साथ कप
5...और 6 को जैसी और जितनी बार बनी किसी भी कप में चल जाती है हमेशा 😁

चाय घर से बाहर वही 6लोग
1...नहीं
2...नहीं
3...चलेगी
4...चलेगी आधा
5 और 6 हां चलेगी ...😁😁