Wednesday, April 26, 2017

लालबत्ती - अनूप शुक्ला जी का व्यंग

आज एक  पॉडकास्ट अनूप शुक्ला जी का- लालबत्ती 





Tuesday, April 25, 2017

छम -छम नाचे "नानी और मायरा"



कोयल बोले कुहू -कुहू ,मोर बोले पीहू -पीहू 

इधर-उधर की बातें करती चिड़िया बोले चूंचूंचूं 

यदि कोयल बोले पीहू-पीहू और मोर बोले कुहू-कुहू 

तो बोलो बच्चों क्या होगा?,क्या होगा भई क्या होगा ?

बेपेंदे का लोटा तो लुढ़केगा ही लुढ़केगा,

तो इसीलिये ------------

कोयल बोले कुहू -कुहू ,मोर बोले पीहू -पीहू 

इधर-उधर की बातें करती चिड़िया बोले चूंचूंचूं  ..... 



मुर्गा बोले कुकड़ू कूँ ,बोले कबूतर गुटरू गूँ 

दोनों दाना चुगकर खाते,पकड़ों होते-उड़नछू 

यदि मुर्गा बोले गुटरू गूँ और बोले कबूतर कुकड़ू कूँ 

तो बोलो बच्चों क्या होगा?,क्या होगा भई क्या होगा ?

बेपेंदे का लोटा तो लुढ़केगा ही लुढ़केगा,

तो इसीलिये ----------------

मुर्गा बोले कूकडू कूँ ,बोले कबूतर गुटरू गूँ 

दोनों दाना चुगकर खाते, पकड़ों होते-उड़नछू 



बाजे  पायलिया, गाए बाँसुरिया 

छम -छम नाचे "नानी - मायरा"

यदि बाजे पायलिया गाए बाँसुरिया 

ताल पे नाचे काली हिरनिया 

तो बोलो बच्चों क्या होगा?,क्या होगा भई क्या होगा ?

नाच न जाने आँगन टेढ़ा तो होगा ही होगा। ..  

तो इसीलिए ----------------

बोले पायलिया, बाजे बाँसुरिया 

छम -छम नाचे "नानी और मायरा"



Monday, April 24, 2017

सीखने की कोई उम्र नहीं होती

बचपन की बात है,काका के यहाँ जाती थी तो वे क्लब के स्विमिंग पूल ले जाते तब बहुत डर लगता बाहर से देख देख मन में एक इच्छा ने घर कर लिया कि कभी मौका मिला तो सीखूँगी ...
समय बीता .... वार्डन रहते छुट्टी के दिन होस्टल के बच्चे स्विमिंग करते और मैं बाहर से सिर्फ ड्यूटी देती तैरना न आते हुए भी 
स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर बनी .... जब स्विमिंग टीचर छुट्टी करती तो मेरा अरेजमेंट लग जाता ... और क्लास लेना पड़ती ,डर लगता मगर बाहर से नियंत्रण रखती और बच्चों की क्लास मिस न होती,बच्चे खुश और मै डरी हुई ....

एक बार गर्मी की छुट्टियों में स्विमिंग केम्प लगा स्कूल में ,जो कोच थी उनके पिताजी का अचानक देहांत हो गया,,जिम्मेदारी मुझ पर आ गई ,तब तक थोड़ा हाथ पैर चलाना सीख लिया था मैंने..... करीब एक हफ्ते पानी में उतर कर सिर्फ बच्चों को पकड़ पकड़ सिखाया पूल में पानी थोड़ा कम रखवाया और दो हेल्पर पूल साइड खड़े रहते ,बहुत बड़ा रिस्क लिया पर सिखाया ,खुद तब भी ठीक से नहीं आती थी। 😢
कभी सोचा न था अब स्विमिंग सीखूँगी.,...पिछले वर्ष वत्सल के यहां बंगलौर आई तो ये मौका हाथ लगा। 
स्विमिंग सीखना अच्छा लगा . और सीखने की तो कोई उम्र नहीं होती .. पानी पर सोकर रेस्ट किया था तभी पहली बार....




एक बात तो तय है की सीखने की कोई उम्र नहीं होती ,और सीखी हुई कोई चीज या बात कभी बेकार नहीं जाती। ..
अबकी कार चलाना सीखना है। .. :-)

.....




😁

Sunday, April 23, 2017

लाल बत्ती ,लाल रंग - खतरा या ठहराव

लाल बत्ती यानी खतरा। .. बचपन में सबसे पहले लाल बत्ती का मतलब सीखा सड़क पर। ..जब गांव से कभी शहर आते तो चौराहे पर खड़े हो बत्ती को बड़े प्यार से देखते कब हरी हो......... और सड़क पार करते समय , पहले दाएँ देखो फिर बाँए देखो और कर लो सड़क पार।

लाल रंग खतरे का निशान कब से हुआ शायद ही किसी को पता हो मगर ये तो बचाता है खतरे से आगाह करके। ... 

फिर बत्ती को देखा सिनेमा में जब कोई सीन एक्सीडेंट या बीमारी वाला होता तो एम्बूलेंस लालबत्ती घुमाते तेज भागती और सीधे अस्पताल पहुंचकर ही दम लेती ऑपरेशन थियेटर की बत्ती जलती -बुझती दिखाई देती और हम हाथों से कुर्सियों के हत्थे भींच लेते। ..

जब थोड़े बड़े हुए तो कॉलेज में सामना हुआ इस लालबत्ती से - कोई गर्ममिजाज लड़की को देखकर मेरे दोस्त कहते वो देख लालबत्ती आ रही है। .. :-)



तब तक समझ आ गया था की ये लाला रंग ही खतरे की पहचान है , किशोर दा भी सुनाया करते थे -=ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा। ... 

फिर शादी हुई तो लाली इस कदर छाई की जित देखूं तित लाल नज़र आने लगा। ... मांग भरी ,बिंदिया सजाई ,लाल चूनर ,लाल चूड़ियाँ पहनी होंठ लाल किये। ... 

लेकिन लालबत्ती का असल मतलब तब समझा - जब दो महीने तक हर दिन अस्पताल के आई सी यू के बाहर बैठना पड़ा। ... हर पल उस बत्ती पर निगाह ठहरी रहती। ... जो लाल होती। ..अंदर जो शख्स होता उसके साथ जाने कितनी जिंदगियां ठहर जाती। ... लाल रंग लहू का तब समझा जब दौड़ दौड़ कर लोग रक्तदाता को खोजते। ... 

जीवन का अंत होता है , तो हर जगह से लाली गायब हो जाती है। .. कोई भागम भाग नहीं। .सब कुछ ठहर सा जाता है। 

एक बात बचपन से लेकर आजतक कभी समझ नही आई - नेता लाल बत्ती की गाड़ी में सायरन बजाते हुए सदा भागते क्यों रहते हैं। .... क्या उनके लिए लाल बत्ती मतलब भागो भागो भागो। ..पब्लिक से ,पब्लिक के सवालों से। ... :-) क्या उनके लिए ये बचाव का तरीका है ?

काश वे समझें - लालबत्ती रूकने का सबब है। .... इससे निजात पाकर वे ठहरें। ..और फिर समझें ठहराव वाली जिंदगियां आखिर कितनी ठहर गई हैं कि लाल रंग आँखों में उतर आया। ..

Saturday, April 22, 2017

गर्मी आई गर्मी आई





गर्मी आई गर्मी आई
छुप गया कम्बल
छुपा दी गयी रजाई
रसभरी लीची ,हरे -काले अंगूर,
और रसभरा तरबूज खाओ
केरी-पुदीने का शरबत
और आम का ठंडा रस
कूलर वाले कमरे में
पियो चटखारे ले लेकर
लू भरी दोपहरी को छकाओ
इमली की चटनी
और खीरे का रायता
नानी को पटाकर,
नानी से बनवाओ
दोपहर में नानी की बात मानो
बाहर न निकलो
शाम को नानी को साथ घुमाओ
खुद आईस्क्रीम खाओ
नानी को ठंडी-ठंडी
लस्सी पिलाओ। ..
बस!! ऐसे ही मस्ती में
गर्मी को दूर भगाओ !!!
-अर्चना