Monday, December 4, 2017

यात्रा में क्षणिकाएं

1-

थक चुकी हूँ अब ...
फिर भी मुस्कुराती हूँ,
कि तुम सदा  मुस्कुराओ!
मौन होकर भी
बहुत कुछ कहती हूँ
कि बस! तुम समझ जाओ!
सुनाई नहीं देती
अब कोई भी आहट
किसी हादसे की,कि
चाहे किसी भी धुन में गाओ!
सफर पर हूँ,अकेली,निडर
और अनजान डगर में
एक आस लिए कि
मंजिल पर लेने तुम आओ!
-अर्चना

2-

उम्मीद नहीं थी कि
आँसू बरसकर
कागज पर उकेरे
अक्षरों को बादल में बदल देंगे
अचरज से आँखे फटी रह गई
जब अचानक से अनहोनी घटी!
-अर्चना

3-

कविताएं जन्म लेती है
भावनाओ से
भावनाएं बहती है
मौन के चिंतन से
चिंतन शुरू होता है
एकांत के मिलने से
और एकांत जाने कब
किस कोने में दुबका मिल जाये
नहीं जानता कोई
और अप्रत्याशित रूप से
जन्म ले लेती है
काव्यमय कविता ...👌
-अर्चना

Friday, November 3, 2017

कुछ है,कुछ नहीं

जिंदगी से सवाल कुछ किये, कुछ नहीं
सवालों के जबाब कुछ मिले, कुछ नहीं

मैंने तुमसे कुछ कहा, कुछ नहीं
तुमने मुझे कुछ समझा, कुछ नहीं

दिल का दिल से रिश्ता कुछ है, कुछ नहीं
तुम्हारा मुझसे वास्ता कुछ है, कुछ नहीं

-

Sunday, October 29, 2017

57th जन्मदिन "समरी"

24 की शाम को डिनर हुआ"राजधानी" में ,

फिर 25 को सुबह उठते ही फोन टटोला-मायरा का ऑडियो संदेश था-हैप्पी बड्डे नानी,लव यूऊऊऊ...😊पुच्ची!!फिर स्कूल के लिए रेडी होकर स्टॉप से वीडियो चैट में बधाई दी...👌

"जय श्री कृष्ण"करने के साथ नेहा-वत्सल ने बधाई दी,

फिर माँ को फोन लगाया-मझली भाभी ने उठाया और बधाई देते सबसे पहले बोली-माँ सुबह से याद कर रही हैं,सबको बताया कि आज अर्चना का जन्मदिन है,हमने सोचा कि जरूरी काम निबटा कर आपसे बात करते है,और आपका ही फोन आ गया में देती हूँ सबको फोन और बारी बारी घर मे सबने बधाई संदेश दिया...

माँ ने जीवन का बेस्ट संदेश दिया- "मेरा आज बहुत खुशी का दिन है,आज तेरा जन्म हुआ था",मेरी ढेर सारी शुभकामना!!

  दिन में "वीर जी" ढाई बजे के करीब घर आये,3 घंटे गपशप की,पोहे,सेवैंया की खीर बनाकर खाई,फिर साढ़े 5 बजे "विवेक रस्तोगी" जी के यहाँ गए,वहाँ फिर पोहे और अन्य नाश्ता किया 8 बजे तक खूब गपशप हुई,विवेक जी की पत्नी जी भी शामिल हुई गपशप में,फिर वीर जी ने विदा ली,विवेक जी सपत्नीक मुझे छोड़ने मेरे घर आये,नेहा से मिलकर वापस लौटे,

वत्सल के आने पर नेहा ने बाहर बिरयानी खाने की ईच्छा जताई,हम सब गए ,लेकिन वहाँ मेरे मामा का बेटा-बहू अचानक केक लेकर आए, सरप्राइज़ नेहा के साथ मिलकर प्लान हुआ था....👌

मायरा और बेटी-दामाद को खूब मिस किया ....👌इस बीच सबका इतना स्नेह मिला कि फूली नहीं समां रही अभी तक 😊😊😊😊
बीच-बीच में  परिजनों से फोन पर बधाई मिलती रही...एक सरप्राईज फोन भी मिला "ब्लॉगर प्रियंका गुप्ता जी का ...पहली बार बात हुई फोन पर उनसे....🎂

अब तक संदेश मिल रहे हैं,सोशल मीडिया पर रिटर्न धन्यवाद भी सबको नहीं दे पाई हूँ अभी....
ग्रुप "गाओ गुनगुनाओ शौक से"पर ढेर सारे स्नेहयुक्त संदेशों के साथ 1961 की फिल्मों के गीत गाये गए......

Sunday, October 15, 2017

अपना घर

बात उन दिनों की है जब अपनी बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी, हम होस्टल में रहते थे।
एक दिन उसने स्कूल से लौटकर कहा-
"मम्मी, जब कोई अपने से मिलने आता है ,तो लौटते समय कहता है-हमारे घर आना,और हम तो उन्हें कभी भी कह नहीं सकते कि -आप भी हमारे घर आना।" क्या कभी अपना कोई घर नहीं होगा,हम यहीं रहेंग?(3 साल से हम वहीं थे).......मेरी सारी सहेलियों को चाय बनाना आता है,कुछ तो नाश्ता भी बना लेती हैं अपना,मुझे तो चाय भी बनाना नहीं आता,अपना तो कोई किचन भी नहीं है😢
...और कुछ दिनों बाद मैंने घर लेकर जॉब से इस्तीफा दे दिया ,ये नहीं सोचा कि आगे काम क्या और कौनसा करूँगी,कमाई का जरिया क्या होगा?वो तो स्कूल वालों ने मुझे स्कूल छोड़ने नहीं दिया 😊और हम अपने घर रहने चले आए।
मैंने ठीक किया न !

बच्चों की जो मुस्कान तब देखी थी,आज भी याद है !😊
आज बेटी अपने घर में खुश हैं,ढेर सारी जिम्मेदारियों और "नानी की बेटी "के साथ
अनवरत चलने वाली कहानी का एक टुकड़ा ...

Sunday, October 8, 2017

करवा चौथ

नास्तिक/आस्तिक,
आस्था/अनास्था,
व्रत/उपवास,
चाँद,छलनी...
और करवा चौथ
जिंदा रखने को !

कोई करे,न करे,
उसकी मर्जी!
मगर
फेसबुकी ट्रेंड्स!!! के बीच -
यहाँ मरना भी कौन चाहता है !....😊😊

एक फोटो में पश्चिम में सुबह का चाँद है,तो दूसरी में भले नज़र न आए पर पूरब-और पश्चिम के मध्य बादल की चमक बता रही है कि दूर पूरब में सूरज निकला है...
एक और चित्र में-
इंद्रधनुष बनते-बनते राह गया ...काले बादल नीचे उतर आए हैं...(सारे फ़ोटो आज सुबह के लिए हुए )

Friday, October 6, 2017

फिर तेरी कहानी याद आई

कल वत्सल का जन्मदिन था,वो 32 का हुआ ,शाम की पूजा के समय मेरा दिल भर आया ,जब तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था मैं 32 की थी ... 😢 ये आंकड़े भी न ! चैन नहीं लेने देते कभी ....
और तो और शरद पूर्णिमा का चाँद भी न दिखा बारिश की वजह से ... सबको साथ ही रोना आ गया हो जैसे ...😢
परेशानियां हरसिंगार की तरह खिल आती हैं ,झर ही जाएंगी...

दिन तो सदा एक से नहीं होते,तुम्हें और मुझे एक से रहना है ..😊
हँसो यार !!

-अनवरत चलने वाली कहानी का एक टुकड़ा