Monday, January 17, 2022

गाएं गुनगुनाएँ शौक से ग्रुप और उसकी खासियत



एक ग्रुप बनाया था व्हाट्स एप पर 
"गाएं गुनगुनाएं शौक से " नाम से शौकिया गुनगुनाने वाली महिला ब्लॉगर मित्रों के साथ ,बाद में कई मित्रों की मित्र भी जुड़ती हैं ।कई आकर स्वेच्छा से वापस लौट गईं।लेकिन ग्रुप चलता रहा,चल ही रहा है।
कई गतिविधियां अनायास हो जाती हैं इस पर जिसे सहेजने के लिए ग्रुप की सदस्या पूजा अनिल ने एक ब्लॉग इसी नाम से बना दिया।आजकल उसपर बहार आई है आप भी देखें।


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Sunday, January 9, 2022

बचपन और बचपना

हम फिर से बच्चे बन जाएं
आंगन में खेलें गिल्ली -डंडा,
गोल गोल कांच की गोटियां
छुप जाएं कपास की थप्पी में,
खींच कर भागे एक दूसरे की चोटियां
जब खूब थक जाएं तो
बांट कर खा लें आधी आधी रोटियां...

ऐ दोस्त 
दो मिनट के लिए ही सही
पर जरूर मेरे घर आना 
और हां
अपना बचपन साथ लाना...
अर्चना

Monday, November 29, 2021

जीवन की सांझ में एक विचार


साँझ की बेला, दूर क्षितिज पर
सूरज ले रहा है विदा,अपनी धूप को सिमटा कर

लालिमा ले बादल ने पहन लिए रंगबिरंगी कपड़े
पंछी खेलते उड़ते,लौट चले अपने नीड़ को काम निपटा कर

पसरते ही छांह,आवाज हो गई मद्धम सबकी
मौन करने लगा तैयारी चीत्कार की
दुख को अपने साथ चिपटा कर

मैने जाते सूरज को देख आवाज लगाई
ये कहते कि कल जब आना नया सबेरा लाना
सुख के साथ तरबतर,लिपटा कर
अर्चना
(जन्मदिन की पूर्व संध्या,(25/10/2021) पर नर्मदा किनारे रिसोर्ट के फोटो)


फोटो - वत्सल चावजी 

फोटो -  वत्सल चावजी

Saturday, November 27, 2021

मेरे हिस्से का शून्य

वो जो शून्य है,एक गहरा शून्य है, लाख कोशिश करें पर वो कभी भर नहीं पाता । 

इसमे पीड़ा,बेचैनी,लाचारी,चुप्पी,उदासी,छटपटाहट,तड़प, .....कोई शब्द नहीं समाता,

बस एक मौन ही है जो मरहम का काम करता है।

Wednesday, November 24, 2021

खबर

घटनाएँ बन जाती है खबर,
या बना दी जाती है कविता
फ़िर लोगों तक पहुँचती है,
और कुछ ही दिनों में खो जाती है खबर...
लेकिन वो बात, जो होती है उस खबर का हिस्सा,
या बनती है जिस पर कविता
कई दिनों, बल्कि सालों तक करती है असर...

बस ऐसे ही मन हुआ कि कितनी भी बड़ी दुखद खबर हो उस पर कुछ दिनों तक हर कोई व्यथित होता है लेकिन उसके साथ जुड़े लोग उस घटना को बस भूलने की कोशिश करते रहते हैं ...:-(