Friday, February 20, 2015

स्व-चिंतन

इतने रंग है भरे -जीवन में
सब एक -दूसरे से सटे -जीवन में
कब किस रंग का गुब्बारा फूटे
कब कौन किससे रूठे
सबके लिए बैठे मेले में
स्व चिंतन है अकेले में......
- अर्चना

Sunday, February 15, 2015

बेबसी


बहुत फर्क हो गया दिनचर्या में
पर कोई फर्क नहीं पड़ा
उस दिन की
और आज की उदासी में

टूटा,गिरा,बिखरा,
दूर तक छिटक गया
दिल जो कांच का था
पत्थर का हो गया

चुभती है फांस-सी
कोई किरचन ,
बहता है लहू,,रिसता है घाव
बढ़ती है फिसलन

गिरने से बचने की कोशिश में
टकरा जाती हूँ
खाली पड़ी कुर्सी से
छलक जाती है चाय
यादें दस्तक देती है
उड़ जाता है अखबार
सोचती हूँ,चिढ़ती हूँ-
ये दिन क्यूँ निकल आता है यार!

-अर्चना

Friday, February 6, 2015

वही घर नई दुल्हन का ...












लड़ना ,झगड़ना फिर मिल जाना
आखिर चुगना है सबको दाना ...

मिलकर बिछड़ना और फिर मिल जाना
हर रिश्ते का यही फ़साना ....

मनभेद भुला कर प्यार बढे तो
लगा रहेगा आना जाना .......


Sunday, February 1, 2015

शादी का गीत

सतीश सक्सेना जी का लिखा शादी का गीत आज मिल गया ...गाया था करीब एक साल पहले ...
समय भी कैसे निकल भाग रहा है ...... फिर भी कुछ लोग फिट हो गए हैं दिमाग के खाँचे मे ...... ब्लॉगिंग....पॉडकास्टिंग की बदौलत..... शुक्रिया ..शुक्रिया...शुक्रिया ....