Tuesday, September 23, 2014

अनजान चेहरा

ये बाबा मिले थे पिछले साल वैष्णो देवी की पहाड़ी चढ़ते समय.... जब थोड़ा सुस्ताने के लिए मैं वत्सल और पल्लवी रूके एक शेड में तो ये आकर कहने लगे पैर की मालिश करवा लीजिए ...दर्द कम हो जायेगा ..इनकी उम्र और इनके काम को देखकर दर्द तो वैसे ही दूर हो गया था.....वे जब गुहार लगा रहे थे तब वत्सल ने फोटो निकालने का पूछा ...खडॆ होकर पोज़ दिया .... वे सोच रहे थे काम मिल जायेगा .... तब ये भाव थे चेहरे पर ...
 फ़िर इन्हें पचास रूपये देकर कहा कि एक फोटो और लेना है ...मालिश नहीं करवानी ..... तो ये भाव आये इनके चेहरे पर ....
 आज न जाने कहाँ होंगे ....दुबारा मुलाकात भी होगी या नहीं, नहीं मालूम,.... लेकिन इस उम्र में इतनी ऊंचाई पर दिल जीत ले गए ये हमारा ....
दो पल ही सही इनके चेहरे पर मुस्कान लाने में सफ़ल हुआ वत्सल ...अच्छा लगा ...
काश कि इनका नाम भी जान लिया होता .....

Monday, September 22, 2014

जीवन-मृत्यु

जीवन -मृत्यु  

किसी अपने के 
सदा के लिए चले जाने पर
वक्त ठहर जाता है
पर .... 
ठहरना वक्त का 
कभी अच्छा नहीं होता 
खो जाता है इसमें 
एक नन्हा सा बचपन 
बचा लो उसे 
अनचाहे दर्द से
कि साँसों का चलना ही तो
जिन्दगी नहीं  ......

Thursday, September 18, 2014

कलाकारी

न जाने कितनी चीजें सीखी लड़की होने के कारण ...
ये दो फ्रेम शादी के बाद मेरे साथ ही ससुराल आई थी ....मैं तो इधर-उधर होती रही ...मगर ये आज भी उसी जगह टंगी हैं जहाँ नवम्बर 1984 में मैंने टांगी थी ......
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जब भी  यहाँ आती हूँ .... बहुत कुछ याद दिलाती हैं .......

Tuesday, September 16, 2014

पोर-पोर पीर बोई ...

सुनिए एक विरह गीत ...गिरिश बिल्लोरे "मुकुल" जी का लिखा हुआ,जिसे आप पढ़ सकते हैं- उनके ब्लॉग इश्क-प्रीत-लव  पर

Monday, September 15, 2014

सुप्रभात







सितारों की दुनिया से
हमको लौटा लाया सूरज
अंधेरी सुनसान रात को
फ़िर भगा आया सूरज

देखो किरन कैसे 
जगमगाई है
नन्ही सी चिरैया भी 
चह्चहाई है
ओस का बोझ 
नन्ही दूब ढो नहीं पा रही
और कीचड़ से सने अपने पैर 
धो नहीं पा रही


कहीं-कहीं बादल 
अब भी कड़क रहे हैं
सूरज के डर से 
दूर ही बरस रहे हैं....
अपनी- अपनी रोटी तलाशने को
फ़िर भी मजदूरों को जगा आया सूरज
सपनों की दुनिया से 
हमको लौटा लाया सूरज !