न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
मै,
सबसे पहले एक बेटी,फ़िर बहन,फ़िर सहेली,फ़िर पत्नी,फ़िर बहू, फ़िर माँ,फ़िर पिता,फ़िर वार्डन, फ़िर स्पोर्ट्स टीचर और फ़िलहाल "ब्लॊगर" के किरदार को निभाती हुई,"ईश्वर" द्वारा रचित "जीवन" नामक नाटक की एक पात्र।
चूँकि मै शिक्षा जगत से जुडी हूँ इसलिए ये बात कह रही हूँ----------कॄपया ध्यान दें-------- मेरे सामने हमेशा एक गम्भीर समस्या आई है शायद इसका सामना आप लोगों को भी करना पडता हो, इसलिए इस बात की ओर सबका ध्यान दिलाना चाहती हूँ---------
" हम अंग्रेजी स्कूलों में पढते हैं , इसलिए रोज जाने क्या-क्या नये शब्द गढते हैं । अंग्रेजी कुछ इस तरह बोलते हैं --- और करते हैं भूल , जैसे-- यू नो--- जिस लडके ने कल डांस किया था---ही वाज सोSSS कूSSSल !!! या फ़िर----- कल जिस लडकी ने गाना गाया था ----शी वाज हाऊ ब्यूटीफ़ूSSSल !!! ये तो थी पहली समस्या ........... अब दूसरी की ओर बढते हैं, और समस्या नम्बर दो की पायदान चढते हैं---- बिहारी, पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली, हरियाणवी, आदि भाषाएं हम सुनते हैं , और चूँकि मध्य-प्रदेश के वासी हैं, तो इस भाषा में पूछे गये प्रश्नों का उत्तर देने के लिए -- हिन्दी को ही चुनते हैं , और अन्त में ---तीसरी समस्या के रूप में आती है ,साऊथ की बारी -- और ये समस्या पहली दोनो समस्याओं से भी है भारी , वहाँ की भाषाएँ बहुत मधुर ,मीठी और सुरीली है , क्योंकि वे हमारी जड यानि संस्कॄत से जुडी हुई हैं , वहाँ के लोग जो भाषाएँ बोलते है --- वो हमारे ऊपर से जाती है , और हमारी भाषा , उनके उपर से जाती है , जब हम आपस में मिलते है तो--- खडे रहते हैं दोनो आमने -सामने मुस्कुराते हुए , और एक दूसरे की बात समझ गये-- ये जताते हुए , तो आओ इन समस्याओं का हल निकालें, हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है---ये सबको दिखा दें, हम सब कहीं भी रहें ,कैसे भी बोलें--पर अन्याय, अत्याचार , और आतंकवाद से निपटने के इरादे से आगे आएँ --- और जब भी मौका मिले ---राष्ट्रगीत ऊँचे परन्तु समवेत स्वर में गाएँ --- इन तीनों समस्याओं को दूर करने का यही है एक उपाय ,ऐसी मुझे आशा है --- क्योंकि आखिर "हिन्दी हमारी मातॄभाषा है ! ! ! ! !"
अरे कायर है ये आतंकी, खुद तो जीते नही है, दूसरो को भी नही जीने देते, तभी तो हमेशा अकेले मरने से डरते है, और मासूम लोगों का साथ चुनते हैं, अगर हिम्मत है -तो जिन्दगी से लडकर दिखाएं, फ़ाके मे अपने बच्चों को रोटी खिलाएं, माँ -पिताजी को दवाई दिलवाएं, और अपनी प्यारी बहना की शादी करवाएं, इनके दिल में कोई प्यार नही होता, इसलिए ये ममता,प्यार,मजहब को नही जानते, अगर इनके दिल में प्यार होता, तो ये औरों की नही, अपने दिल की मानते, और अपने अन्दर की आवाज को पहचानते ,
"अरे आतंकियों-- समय रहते सम्भल जाओ , अपने प्यार,ममता,और मजहब को पहचानो, और अपनी जिन्दगी सफ़ल बनाओ ! तब देखना दुनिया तुम पर नाज करेगी, और तुम्हारी मौत के बाद भी तुम्हे सुनेगी !!!"
खेल ही जीवन है?, या जीवन ही खेल है? कभी इस पहेली में न खुद को डुबोना, मेरी एक बात सदा याद रखना--- खेलों को जीवन से कभी न खोना, क्योंकि --जबहमबच्चेहोतेहैं, तोचाहतेहैं--बडाहोना , और बडेहोजानेपरदिलचाहताहै-- फ़िरसेएकबारबच्चाहोना ! ! !
येएकबहुतबडाप्रश्नहैमेरेलिए।दरअसलमैजहाँरहरहीहूँ,वहाँकभीरहूँगीऐसामैनेसपनेमेभीनहीसोचाथा,मैजहाँरहतीथीवोजगहमजबूरीमेंमुझेछोडदेनीपडी,जहाँमैरहनाचाहतीथीवोजगहमुझेनहीमिली,अबमैकहाँरहूँगीयेमुझेनहीमालूम,मैएकदमसचकहरहीहूँ--- कलभाषाकोलेकरजोखबरसुननेमेंआईतोसबकुछयादआगयाअपनेबारेंमें------- मेराजन्ममध्यप्रदेशकेछोटेसेगाँवखरगोनमेंहुआ,पढाईभीयहींकी।शादीहुई,---ससुरालनागपूर, (महाराष्ट्र) मेंहै।हमारेपूर्वजगुजरातमेंरहतेथे ,कईपीढीपहलेवेशायदरोजीरोटीकीतलाशमेवहाँसेचले-------कुछलोगमध्यप्रदेशमे, वकुछलोगमहाराष्ट्रमेंजाकरबसगये-------जोलोगमालवा,निमाड, मेआकरबसेउनकेरीतीरिवाज,बोली, खान-पान,पहनावा, सबमेंयहाँकेरहन-सहनवबोली,खान-पान,पहनावामिलगये ,जोलोगमहाराष्ट्रकीतरफ़गयेउनलोगोनेवहाँ का पहनावा,रहन-सहनखान-पानबोलीसबअपनालियाहमलोगोंकाआपसमेंसंपर्कभीबहुतकमरहगया। मेरीशादीहमारेआपसीरिश्तेकोमजबूतीदेनेकेउद्द्येशसेकीगयीथी।हमनेएक-दूसरेकॊबहुतसमझाभाषाकीपरेशानीहोतेहुएभीआपसीसामंजस्यआजतकबरकराररखाहै।जबमैपहलीबारससुरालगईतोशादीकीपार्टीमेबधाईकेसाथएकसवालसेमेरासामनाहुआथा-----तुम्हेमराठीनहीआती ?अबभलामैक्याजबाबदेती?मगरयेसवालकुछइसतरहपूछागयाकिमैआजतकभीमराठीनहीबोलपाई ,मेरीसासुजीमराठीमेकुछपूछ्तीहैंतोमैहिन्दीमेजबाबदेतीहूँऔरजबमैकुछपूछ्तीहूँतोवेमराठीमेंजबाबदेतीहैहमदोनोकोहीआजतकबातकरनेऔरसमझनेमेंकोइपरेशानीनहीआईहै| जबशादीहुईथीपतिदेवआसनसोल( बंगाल ) मेंकार्यरतथे, तीनवर्षबादतबादलाहुआ----हमराँची(बिहार) मेंआगये।ओफ़िसकेकार्यसेपतिगोहाटी( आसाम) गयेथे, वहाँसेकिसीकार्यवशशिलोंग (मेघालय) जानापडा-----रास्तेमेंएक्सीडेन्टहॊगया-------बहुतगम्भीरचोटआई-----फ़िरगोहाटी, आसामकेबहुतबडेन्यूरोलॊजीअस्पतालमेंदोमहीनेकोमामेरहनेकेबाद(याददाश्तचलीगईथी) चिकित्सकॊकेभरसकप्रयासकेबाद, टूटेहाथकाओपरेशनकरवानेतबबाम्बे( महाराष्ट्र) वापसआये----दसबारहदिनॊंकेबादघरनागपूर(महाराष्ट्र)मेंहोनेकेकारणनागपूरआनातयकिया।दो - ढाईमाहतक CIIMS (अस्पताल का नाम) मेंरखनेकेबादचिकित्सकोनेघरपरहीरखनेकीसलाहदीसोघरलेआये।कुछपरिस्थितियाँऐसीबनीकीवापसखरगोनलौटनापडा।अथकप्रयासोंकेबादभीउन्हेंबचायानजासका।आजइसबातको१४वर्षबीतचुकेहैं। येहादसाहुआतोजिनलोगोनेमेरीवहमारेपरिवारकीमददकीवेभारतकेहरप्रान्तकेसदस्यथेमैउनसबकीआभारीहूँ ,एक-दूसरेकीभाषानजाननेपरभीसहयोगभरपूरमिला, हमएकदूसरेकीसारीबातेंभीसमझगये। मुझेआजभीयादहैक्रष्ण्न साहब नेमुझेइसहादसेकीखबरसुनाईथी ,सिंगजीकेयहाँमैदोनोबच्चो---५वर्षीयबेटीपल्लवीऔर७वर्षीयबेटेवत्सलकोअकेलेछोड्करशाशिदादा(मेरेकजिनजेठजी) केसाथपहलीबारहवाईयात्राकरकलकत्तापहूँचीथी ,वहाँसेदूसरेदिनहीउडानथीगौहाटीकेलियेइसलिएदाससाहबकेघरमुझेरुकवायागयाथावहाँमेरीदादीऔरनानीजैसीउनकीमाँजीऔरबुआजीरातभरमेरेसिरपरहाथफ़ेरतेहुएमेरेसिरहानेजागतेबैठीरही।सुबहइनकेसाहबरामचन्द्रनसाहबभीहमारेसाथगौहातीकेलिएरवानाहुएथे-----जबमैहोस्पिटलमेपहूंचीतोडाक्टरचक्रवर्तीसीढीपरहीअपनेसाथियोकेसाथमेरीराहदेखरहे थे।रातगेस्टहाऊसमेआनेपरजबघबराकरमेरीरुलाईरोकेनहीरुकरहीथीतक२बजेरातमेंगेस्टहाउसमेकामकरनेवालेपूर्वोत्तरकेभाईयोनेमुझेचायबनाकरपिलाई, वेभीमेरेसाथजागतेरहेथे । सुबहएककारओफ़िसकीओरसेअस्पतालआने -जानेकेलिएवदवाईवगैराकीव्यवस्थाकेलिएदी गई।उसकेड्राईवरविजययादवकॊमैमरतेदमतकनहीभूलसकतीदिनरातजागकरविजयनेहमारेलिएजोकुछभीकियाउसकेलिएमैउसेनमनकरनाचाहतीहूँ।विजयजबचौथीकक्षामेंपढताथा ,बिहारकेएकगाँवसेभागकरवहाँपहूंचाथा,उसनेहमसेपारिवारिकरिश्ता~कायमकियाथा| वहाँजो दो बडे साहब मुझसे मिले वे चालना साहब पंजाब व वर्मा साहब उत्तरप्रदेश के रहने वाले थे ,दो माह तक इन दोनो परिवारों ने मेरा, मेरी माँ,भाई सास-ससु्र जी का अपने परिवार के सदस्यों की तरह ध्यान रखा । खैर!!!
आज भी मुझसे जब ये प्रश्न पूछा जाता है कि आप कहाँ के है? तो मै खुद सोच में पड जाती हूँ कहती हूँ वैसे तो हम गुजराती ब्राह्नण हैं मगर ससुराल में मराठी रिति-रिवाज माने जाते हैं,पर मुझे वहाँ रहने का मौका नही मिला, मै बंगाल,बिहार मे महाराष्ट्र से ज्यादा रही, लेकिन अभी मध्यप्रदेश मे रहती हूँ ...........अगले २-३ सालो मे बच्चों की नौकरी जहाँ लगेगी वहाँ रहूँगी इसलिए मैं कहाँ की हूँ????पता नहीं .................. और अब बच्चे बडे हो गये हैं ये सवाल उनके सामने भी आयेगा और वे फ़ोन पर मुझसे पूछेंगे हम कहाँ के हैं मम्मी ?????
पिछले दिनों मेरे स्कूल में एक नवम्बर सेचारनवम्बर तक सीबीएसई नॅशनल " Taekwondo "चेम्पियनशिप आयोजित की गई थी |पहली बार इतने बड़े स्तर पर कोई आयोजन किया गया था| इस आयोजन को लेकर हम सब बहुत उत्साहित थे | ईस्ट, वेस्ट, नार्थ वन, नार्थ टू वसाऊथ झोन के करीबचारसौबच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया| तीस अक्टोबर से ही टीमो का आना शुरू हो गया था, इकतीस तारीख़ की शाम को सभी प्रशिक्षको की मीटिंग रखी गई थी,चूँकि बहती गंगा में सभी हाथ धोना चाहते है, इसीलिए हमने भी इसी कार्यक्रम के साथ हमारा वार्षिकोत्सव का कार्यक्रम निपटाना उचित समझा |एक तारीख़ की सुबह औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात प्रतियोगिता का शुभारम्भ हुआ ,सभी प्रतियोगियों ने खेल भावना के साथ खेलने की शपथ ली और उसका पालन भी किया |शाम को वार्षिकोत्सव के अर्न्तगत सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा गया था ,सभी आयु वर्ग के बच्चों ने शानदार प्रस्तुति दी ,खासकर ड्रम व बासुरी की जुगलबंदी तथा सभी प्रान्तों के डांस को मिलाकर बने फ्यूजन डांस की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया |विजेताओ को पुरस्कार वितरित किए गए | दूसरे व तीसरे दिन सभी मुकाबले समयानुसार दो सत्रों में सम्पन्न हुए रात्रि को सबकी थकान दूर करने के लिए हल्का फुल्का मनोरंजन कार्यक्रम किया गया जिसमे प्रतियोगी बच्चों ने भी गानों व न्रत्यो की अनुपम प्रस्तुति दी |इन कार्यक्रमों में हम सब शिक्षको ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और इन बच्चों के साथ गाना गाकर व नृत्य करके अपना बचपन जिया, दूसरे दिन मैंने भी एक गाना बच्चों की पसंद का गाया.........................
चूँकि कार्यक्रम में १९ वर्ष आयुवर्ग के बच्चे भी थे इसलिए मैंने तीसरे दिन अपनी कविता "खेल-खेल में "सुनाई ,कविता बहुत पसंद की गई और कई लोगो ने उसकी फोटोप्रति लेने की इच्छा जताई, मुझे बहुत खुशी हुई और उन सबसे वादा किया की अपने ब्लॉग पर मै इसे पोडकास्ट करुँगी और इसीलिए ये मेरी कविता पोडकास्ट के रूप में ...........................