Saturday, May 25, 2013

तोहफे में मिला आख़िरी हर्फ़

आज आपकी मुलाक़ात एक नए ब्लॉग से --
पोस्ट यहाँ पढ़ सकते है आप - पहला साल 
सुन  है सकते है यहाँ --

Wednesday, May 22, 2013

कालजयी कविता की खोज ...

शब्दों की तलाश में मेरी कविता 
निकल पडी है दूर तलक 
कालजयी होना है, 
कहा था उसने मुझसे 

समझी नहीं -
मेरे समझाने पर भी 
बहुत रोका मैंने 
ये कहकर 
की कालजयी कविताएँ 
जा चुकी है 
काल के ही साथ . . . 
और ले गई है साथ अपने 
गूढ़ अर्थों वाले 
आलंकारिक शब्दों को भी 
जिन्होंने पकड़ रखा था 
हाथ समासों का 
जो घिसटते चले गए 
उसी के साथ ...

सुना है काल के साथ ही 
स्वाहा हो गए थे अरण्य भी ...
नतीजतन अब 
मेरी कविता भटक रही होगी 
सादे सपाट मैदान में ही कहीं 
आशंकित हूँ ,
लौटेगी या नहीं 
मेरे एकाकी जीवन में ........
कही बचे -खुचे 
शब्द भी फुर्र न हों जाएं 
उसके लौटने से पहले ....

Thursday, May 16, 2013

लहरें


प्रवीण पाण्डेय जी का नाम खुद अपने आप में परिचय है उनका ---
और उसी तरह उनके ब्लॉग का नाम- न दैन्यं न पलायनम भी ....
प्रस्तुत है उनकी एक रचना लहरें -

Monday, May 13, 2013

अहसासों के पंख...एक ब्लॉग नया सा ...

एक परिचय शरद कुमार जी और उनके ब्लॉग से --
कुछ शेर बेटी के नाम
एक मासूम सा ख्वाब
और
माँ

ये रचनाएं हैं शरद कुमार जी के ब्लॉग अहसासों के पंख से ..



Friday, May 10, 2013

दास्तान - ए - आशू दा ....

प्रकाश गोविन्द जी को तो आप सब जानते ही हैं ,परिचय देने की जरूरत नहीं है ...पहेलियों को हल करने की विशेष योग्यता रखते हैं .... गाते भी बहुत बढ़िया हैं.....
एक बार इनसे बात हो रही थी मुझे अचानक  बैंक के काम से जाना पड़ा , मैंने मेसेज लिखा-
बैंक होकर आती हूं ...
जबाब आया -
वाह! आनन्द आ गया !...किजीए जमा ,जोड़ते रहिए पैसा ...
वापस आने पर मैंने पढ़ा मेसेज फ़िर पूछा-
किसने कहा ,पैसे जमा करती हूं,जोड़ती हूं पैसा ?
जबाब लिखते हैं-
आपकी मस्तिष्क रेखाओं ने... मैंने साफ़ पढ़ा..... :-)

तो इसका  मतलब है ये अन्तर्जाल पर मस्तिष्क रेखाएं भी देख सकते हैं ..... :-)

खैर ! ये तो थी मजाक की बातें ---
बहुत कोमल दिल वाले इन्सान हैं ,फ़िल्मों में विदाई के दॄष्य देखकर छुपकर रोने लगते हैं ---
आज एक मार्मिक कहानी इनकी कलम से - इनके ब्लॉग आवाज से -

Thursday, May 9, 2013

अन्तिम ईच्छा

लघुकथा-

 
टेक्नोलॉजी के युग में भगवान ने टेब ऑन किया , मेरा मुस्कुराता चेहरा प्रोफ़ाईल में देखकर खुश हो गए ...



मेरी वॉल पर स्टेटस लिखा- वरदान माँग...


मैंने मौके की नज़ाकत को समझा और वरदान में अन्तिम ईच्छा लिख दी - मेरी मौत की खबर या फोटो फ़ेसबुक पर शेअर न की जाए.... अगर कहीं गलती से किसी स्टेटस पर आ भी जाए तो वो आपका स्टेटस हो ... और उसे सिर्फ़ लाईक करने का ऑप्शन खुला हो ...



मेरी वॉल पर अगला स्टेटस था --- तथास्तु...


Tuesday, May 7, 2013

जिन्दगी ---

जिन्दगी ---
जिन्दगी एक पड़ाव - न शहर न कोई गाँव...
जिन्दगी एक बहाव -जिसमें डगमगाती नाव...
जिन्दगी एक बिछाव -जिसपे लगता हर दाँव...
जिन्दगी एक झुकाव -संभलकर रखो अपने पाँव...
जिन्दगी है तो अनमोल -पर हर वक्त बे-भाव...
जिन्दगी एक दरख़्त - ढूँढता हर कोई यहाँ ठांव...
-अर्चना

Saturday, May 4, 2013

रे मन!...

तन की तल्लिनता को तौल कर मत निहार
मन की मलिनता को मौन हो मत स्वीकार

घन की घनिष्ठता का सुन तू घोर घर्षण
छन-छन छनकती पायल का मत रख आकर्षण

धन की धौंस से न धर धीमे से गतिरोध
जन की जड़ता का कर पुरजोर विरोध....

Tuesday, April 23, 2013

एक व्यंग्य रचना -व्यंग्यलोक से ....

आज प्रमोद ताम्बट जी के ब्लॉग से एक व्यंग्य रचना -- मेरे गहरे साहित्यप्रेमी दोस्त और मैं

जब पॉडकास्ट बनाने के लिए कहानियों की खोज में थी तो फ़ेसबुक पर स्टेटस लिखा ---

"मैं कुछ अच्छी कहानियों की खोज में हूं, जिनका पॉडकास्ट बना सकूं, १० से १५ मिनट की ...
अगर लिंक खोजती हूं और अनुमति लेने के लिए इन्तजार करती हूं तो बहुत समय लग जाता है ... अगर आप (जो कहानियां लिखते हैं)अनुमति दे दें तो ... ब्लॉग से कहानियां मैं खुद खोज लूंगी ... :-)
"


पता नहीं था बहुत फ़ायदा होने वाला है ,प्रमोद जी ने मेसेज में बताया कि हम तो व्यंग्य लिखते हैं ,और तब मिला उनका ब्लॉग ----व्यंग्यलोक ....

एक प्रयास किया पॉडकास्ट बनाने का और भेज दिया अनुमति के लिए हमेशा की तरह ,ये थोड़ी न पता था कि वे थियेटर से भी जुड़े हैं.... :-)
उन्होंने समय देकर सुना ,और कहा- "बहुत बढ़िया है, कर्णप्रिय स्‍वर एवं स्‍पष्‍ट उच्‍चारण । मैं थियेटर से हूँ इसलिए कहना चाहूँगा कि थोड़ा Voice Modulation और होता तो आनंद आ जाता।"अब अपने पल्ले तो कुछ पड़ा नहीं तो सीधे पूछा-
Voice Modulation =?
आवाज और जोर से रखनी थी क्या ?:-)

और फ़िर उन्होंने उतनी ही आत्मियता से बताया -- "नहीं, इसका मतलब है, आवाज़ का उतार-चढ़ाव, ड्रामा वगैरह। कन्‍वर्सेशन तो प्‍लेन नहीं हो सकता ना।......... देखिए जब सुनने वाले आपके सामने न हों तो रिडिंग में एक बात महत्‍वपूर्ण होती है कि कहां श्रोता का लाफ्‍टर आऐगा, उस पंच को पहचानना और उसे सही Modulation के साथ पढ़ना। श्रोता के रिएक्‍शन के लिए पॉज़ देना। सबसे बड़ी बात खुद ही रचना का आनंद लेना, आनंद लेते हुए पढ़ना। इससे पॉडकास्‍ट और ज्‍यादा श्रवणीय हो सकता है।"

 तो बस! फ़िर क्या था दिमाग के घोडे़ दौडा़ए और फ़िर एक बार किया रिकार्ड ,फ़िर भेज दिया ...
अबकि बार जबाब मिला -- सुन रहा हूँ। स्‍टार्ट में ही भारी परिवर्तन दिख रहा है। बधाई हो।
 
 और बस इस तरह तैयार हुआ ये पॉडकास्ट आप सबके लिए ....



आदरणीय़ प्रमोद जी का आभार इस सुझाव व सहयोग के लिए ....