२०१० में ये पॉडकास्ट ब्लॉग पर पोस्ट किया था , कुछ तकनीकी कारणों से पुराने पॉडकास्ट सुने नहीं जा पा रहे थे। ... आज ये रिकार्डिंग मिल गई , फिर से प्रयास किया है सुनवाने का -
इस कविता को आप यहाँ पढ सकते हैं............दिल की कलम से ....
ब्लॉग है दिलीप का -
बेटी और माँ का एक संवाद............पत्र के माध्यम से......
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