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Monday, October 31, 2011

बस धन्यवाद कहना है ....

पिछले दिनों जन्मदिन पर  इतनी बधाईयाँ और प्यार मिला जिसे भूला नहीं पाउंगी कभी..और ये सिलसिला अब तक नहीं रूका है ...

मेरे बच्चो, भाईयों और परिवार ने चकित कर दिया पूरे २४ घंटों तक ...
जैसा उधर पा रही थी वैसा ही इस ब्लॉग परिवार में भी  ..

 इस स्नेह की शुरूआत हुई थी गत दिनों मेरी रायपुर ट्रिप के साथ ....... 
(रायपुर ट्रिप पर लिखना बाकी है इन रिश्तों की अगली कड़ी में.).....

कहा था मैनें पहले भी कि--------- आभासी रिश्ते आभासी नहीं होते 

सब कुछ तो लिख नहीं पा रही अभी न  फोटो ही हैं मेरे पास..........

..फ़िर कभी सही पर क्या कहूँ आभार व्यक्त करने को शब्द नहीं हैं मेरे पास ...बहुत देर हो गई है ............पर बस धन्यवाद कहना है सबको....
और ये तरीका ही नज़र आ रहा है.........




Wednesday, March 16, 2011

खुश खबर.....................मै तो सास बन गई.........एक और रिश्ता......आभासी.....नहीं...सच्ची...


ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्
म्म्म्म्म्म्म्म
मिलिए मेरे बेटे-बहू से-

                                                                          संजय और प्रीती
ले आई मै अपनी बहू......इत्ती प्यारी......                               


                                                                      
 

व्यस्त हो गया है मेरा बेटा..............
जिसे थी "आदत मुस्कुराने की"--------हा हा हा    
और अब दे दो आशीष ढेर सारे........................  
जैसे मैंने दिए------            

आपके जीवन में सदैव उमंग हों,
खुशहाली के ही चारों तरफ़ रंग हों,
पवन सदैव मंद-मंद ही बहे,
और आप दोनों हमेशा ऐसे ही मुस्कुराते रहें।


पंछियों
ने फ़िर से है मधुर गान गाया,
फ़ूलों ने फ़िर से है रंग बरसाया,
ये पंछी हमेशा चहकते रहें,
और आप दोनो हमेशा ऐसे ही महकते रहें।


जीवन की बगीया में फ़ूल ही फ़ूल खिले,
कांटों को कहीं भी जगह ही ना मिले,
और तो और खिले हुए फ़ूल कभी ना सूखे,ना झडे, ना टूट के बखरे,
और आप उन्हीं कि तरह खिले-खिले से रहे।

 

अभी सासों में गरमी हाथ नम होंगे,
उठते होंगे जज़बात शब्द भी कम होंगे,
सूझता ही नहीं होगा कि क्या और कैसे कहें,
बस यूँ ही चुप-चुप से एक -दूसरे को निहारते रहें।

आप दोनों ने खुद को ही नहीं दो परिवारों को जोड़ा है,
एक -दूजे को जितना जाना है-- थोडा है।
मगर जो सम्बन्ध अभी बने है,हमेशा प्रगाढ ही रहें,
और आप के साथ सब यूँ ही मुस्कराते रहें।

-----स्नेहाशीष --मासी की ओर से...