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Sunday, December 13, 2015

मधुर याद







रात के उन लम्हों की बात बताउँ

जिनमें मौन ही मैं सब बोल गई...



एक-एक उलझन जो मन में थी 

तेरे आगे सुलझाकर कर खोल गई...



झंकॄत हो मन .गया थिरक-थिरक

सिहरन हुई और देह भी डोल गई...



साँसों की सरगम पे ताल मिली जब

मधुयामिनी मन में मधुरस घोल गई..


-अर्चना

Saturday, October 17, 2015

हे भगवान !

इतने पुरस्कार 
आदान-प्रदान 
जान -पहचान
तू मेरा मेहमान 
मैं तेरा मेहमान 
किसकी आन
किसकी शान
झकास जलपान
सब बेईमान
मेहरबान
कदरदान
क्या गीता
क्या कुरआन
गूंगा करे बखान
करो गंगा स्नान
ठुकरा कर सम्मान
कुछ दान
कुछ ध्यान
बनो महान
करो कल्याण
पकड़ो कान
बख्शो जान
हे भगवान !

Wednesday, July 8, 2015

आँखों ही आँखों में ..

उस दिन बंद किया था तुम्हें

अपनी दो आँखों में

और तुम दिल में उतर गए 

छोटे से सफर में

आमने -सामने बैठे थे

मंजिल पर बिछड़ गए

आज तक भूली नहीं

उन नज़रों की शैतानी

जब आँख मारकर भी मुकर गए

समय बीता ....बदल गए रास्ते

आज 12 लाइनें लिखने की बारी आई

तो जाने क्यों वो पल अक्षरों में सँवर गए.....



Wednesday, June 24, 2015

सुन मेरे...दोस्त,भाई ,बेटे...

तू इधर-उधर मत देख,सीधे-सीधे चलता जा।
इसकी -उसकी मत सुन,अपने दिल की करता जा।
अगर इस जीवन में कुछ करने का , ठाना
है।
तो लक्ष्य को देख और आगे बढ़ता जा।
सुखों को बांटता चल और दुखों को सहता जा।
नदिया की तरह रह -निर्मल, और शांत बहता जा।
ख़ुद व्यसनों से दूर रह ,और सबको कहता जा।
गर आसमां को छूना है ,तो ---------------
पंख हिला कर उडता जा।

Tuesday, June 16, 2015

शुभदिन

शुभदिन...
अब न रूको जल्दी जाओ
जाकर खुशियाँ साथ में लाओ
दिए है तुमने गहरे घाव
कुछ नासूर कौड़ी के भाव
उनकों हौले से मलहम लगाना
टीस न उभरे ऐसे सहलाना
पड़े न किसी को यूं भरमाना
जाते- जाते आंसू ले जाना
और सुनो अब जब आना
ख़ुशियों संग प्यार भी लाना .......
-अर्चना

Friday, February 20, 2015

स्व-चिंतन

इतने रंग है भरे -जीवन में
सब एक -दूसरे से सटे -जीवन में
कब किस रंग का गुब्बारा फूटे
कब कौन किससे रूठे
सबके लिए बैठे मेले में
स्व चिंतन है अकेले में......
- अर्चना

Sunday, October 5, 2014

ये रात


ये रात
शुरू कब होती है
पता नहीं चलता ....
भागादौड़ी
के चक्कर में

और दिन ...
रात के आंचल में
दुबक के छुपा
रहता है
....
सुबह
पता चलता है कि
आँखों ही आँखों में
गुज़र गई रात ये .......
-अर्चना

Monday, September 22, 2014

जीवन-मृत्यु

जीवन -मृत्यु  

किसी अपने के 
सदा के लिए चले जाने पर
वक्त ठहर जाता है
पर .... 
ठहरना वक्त का 
कभी अच्छा नहीं होता 
खो जाता है इसमें 
एक नन्हा सा बचपन 
बचा लो उसे 
अनचाहे दर्द से
कि साँसों का चलना ही तो
जिन्दगी नहीं  ......

Wednesday, July 2, 2014

छोटी सी बात

रिश्ते निभाना /चोटें सहलाना बड़ा आसान होता है मगर
बस! इनको निभाने/सहलाने को एक आँचल होना चाहिए....

Wednesday, June 11, 2014

छोटी सी बात .....

फिर एक नए दिन का इंतज़ार
कि सुबह सूरज अलसाया सा उठे
.
.
.
ओढ़कर बादलों की चादर....
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निकले पंछी कलरव करते
कि पशुओं से भी छूट गए खूंटे
.
.
.
खुश हो थोड़ा घूमें बाहर.........
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ठंडी सी बयार आए
लेकर के संदेसा बूंदों का
.
.
.
भीनी सी महक मन ले हर ......
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यादों का पुलिंदा सर पर बोझ सा
अश्रु संग बह जाए अकेले में
.
.
.
तू अपनों को जब चाहे याद कर ....

Sunday, June 1, 2014

चित्र-कविता



सूरज, की तरह स्थिर रहो
सबके जीवन में
नदी की तरह बह निकलो
सबके जीवन से

पेड़ जैसे छाया दो
सबको जीवन में
धरा सा बसेरा दो
सबको अपने मन में
...
   

Wednesday, March 19, 2014

छटपटाहट.......

हलचल

गिरते हुए पत्तों की सरसराहट से
होती है दिल में हलचल
रूकते हुए क़दमों की आहट से
होती है दिल में हलचल
यूं ही पतझड़ में गिरे पत्तों पर
कोई चला नहीं करता
कदम उठ पड़ते हैं किसी की याद में जब
होती है दिल में हलचल ..........

समंदर

तुमने देखा नहीं मेरी आँखों का समंदर
किनारे पर आकर जहाँ रूक जाती है लहर
गहराई भी इतनी कि डूब सकता है कोई,
बिता सकता है शाम, किनारे पर ठहर.....

पतझड़

गिरते हुए पत्ते डाली से कहे
भले ही दर्द हमारा तू अकेले ही सहे
हम तो साथी इन हवाओं के
रूक नही पायेंगे तेरे रोकने से
उम्र भर ,सदा इसके संग ही बहे
आयेंगी नन्हीं कोपलें सावन के साथ फिर
मगर यहाँ कौन है जो उम्र भर संग रहे ............

Saturday, March 8, 2014

स्त्री....

नहीं तुम नहीं डरना
अन्धकार से
वही करना जो तुम चाहो
पूर्ण अधिकार से

सम्मान देकर
सम्मान ही पाना
राह के रोड़े
ठोकर से हटाना

उजाला करेंगे
मिलकर के सारे
आत्मविश्वासी जुगनू
बनाकर कतारें

चाँद-सूरज साथ
जब न होंगे तुम्हारे
अँधेरे में रोशन होंगे
तुम्हारे सितारे...............
-अर्चना

Saturday, February 15, 2014

देने वाला - श्री भगवान

मुझसे गीत सुनाने की उम्मीद मत करना
आवाज तो तुमने भी ईश्वर से पाई है...
आँखें भी हो चुकीं होंगी बूढ़ी
पर दे देना किसी को कि
इनमें गज़ब की रोशनाई है....
इन होंठों  से मुस्कुरानें की आदत तुम लेना
इसे लेने की नही मनाई है
क्यों कि मेरे होंठ तब भी मुस्कुराएं हैं
जब मैनें दुश्मनों से भी नजर मिलाई है ......

Tuesday, January 14, 2014

रात और दिन ....

जब आई तेरी याद
एक लम्हे ने बिताई रात
दूजे ने बिताया दिन
थके मेरे नैन
पल-पल, छिन-छिन....
सांसो की ताल पर
थिरकता रहा मन
मेरे सजन
तुम बिन ,तुम बिन....
पलकों की कोरों से
बिखर गए घूंघरू
बजती रही दिल से
आह! की धुन ...
सुबह की लाली
पूरब से आई
एक नया संदेसा
तेरा फ़िर लाई
फ़िर एक लम्हा
भेज दिया तुमने
संजो लिया फ़िर से
उसको भी गिन
बीत रहे  ऐसे
बस
रात और दिन ....
.......


Thursday, January 9, 2014

जब लिखो -

कम लिखो,अपना लिखो
जागी आँखों का सपना लिखो

कम लिखो ,सरल लिखो
बातें सच्ची और तरल लिखो

कम लिखो ,सटीक लिखो
गलत न हो बस ठीक लिखो

बातें जो लिखो कोरी न हो
तुमने किसी से चोरी न हो ....

जरूरी नहीं है कवि बनना
बनना ही है कुछ तो रवि बनना.................

- अर्चना (8/1/2014)

Friday, December 20, 2013

ठंड...

१)
ये सरसराहट
और
ठंड़ी हवा की
छुअन
बीते पल
याद दिलाती है...
क्योंकि
रजाई में दुबके ही
सुबह-सुबह
कहते थे तुम-
तू बड़ी अच्छी
चाय बनाती है........
-अर्चना

२)
कड़ाके की ठंड
और ठंड में ठिठुरते बच्चे
सड़कों पर ....
काश कि कभी
सूरज ले लेता
किराए का कमरा
इन दिनों
फ़ुटपाथ पर
धूप की रजाई
ओढ़ा देती माँ
काम पर जाने से पहले .....
-अर्चना


३)
फ़िर ठंड का मौसम आया है
बचपन की गलियों में घुमा गया है
सुबह देर से उठना
अपनी हथेलियों को रगड़ना
माँ के हाथ का बना स्वेटर
और पापा वाला मफ़लर
सुबह गरम जलेबी और पोहा
शाम को उबला दूध और मेवा
दादी की गरम रजाई में घुस जाना
और फ़िर उनसे राजा-रानी की कहानी सुनना
उफ़्फ़ कितना कुछ याद दिला गया है
फ़िर ठंड का मौसम आया है ...
-अर्चना

४)

ठंड के मौसम में
माँ का पकड़कर नहलाना
ना ना करते मेरा नहाना
और लपेट कर फ़र वाला तौलिया
भाग कर हल्की धूप में जाना
फ़िर मुँह और कान बन्द कर
बिना बदन पौंछे
घुटनों पर सर को दबाना
और दाँतों का किटकिटाना
याद आता है हर बार

ठंड के मौसम में ....
-अर्चना

Wednesday, October 30, 2013

चल मेरे साथ ही चल ....

अतीत के अँधेरे से बाहर निकल
एक नया सबेरा नजर आयेगा
खुशबुओं से महकेगी फ़ुलवारी
हर पत्ता ओस को सहलायेगा
उजली किरण से रोशन होगा आशियां
और हर तरफ तू ही तू नजर आएगा
जमाना करेगा तुझे याद हमेशा
और ज़माने में तेरा नूर जगमगाएगा.......

Monday, June 18, 2012

ह्म्म्म...

यादों के मौसम की गुनगुनी धूप के बीच
तसवीर हाथ में ले
मेरा हौले से पुकारना
ह्म्म्म.. कह कर तुम्हारा आना
और मेरी बन्द पलकों की नमीं में ही छुप जाना
धीमे से मुस्कुराना
मुझसे मिलना,और
मुझे तनहा छोड़
चुपके से गुम हो जाना
रोज़ मिलकर बिछड़ जाना
अच्छी आदत नहीं........

-अर्चना

Thursday, May 24, 2012

सपना मेरा ...



किसी अपने का सपना हो तो अच्छा लगता है 


कोई सपने वाला अपना हो तो भी अच्छा लगता है 


किसी सपने का अपना हो जाना जिंदगी बना देता है 

और किसी अपने का सपना हो जाना जिन्दगी मिटा देता है ....