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Friday, May 15, 2015

तप रहे सूरज से -एक विनती ..

आज सुबह ६ बजे से ही तप रहे सूरज से एक विनती ..

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तप रही धरती बहुत 
ऐ! सूर्य क्यों इतना ताकते 
बादलों की खिड़कियों से 
थोडा छुप के क्यों न झांकते 
नन्हे पौधे कुम्हला रहे 
तुम्हारी किरणों के ताप में 
ओस की बुँदे बदल जाती 
सुबह ही भाप में 
इस धरा की ओर तुम 
देखो ज़रा सा प्यार से 
पंछियों को बख्श दो 
अपनी नज़रों के वार से 
चाँद से ही मांग लो 
थोड़ी शीतलता तुम उधार 
देखो फिर तुमसे भी 
हर कोई करेगा प्यार .......
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कुछ ही समय बाद -

सूरज ने विनती सुन ली !
 पानी का हल्का छिड़काव करा दिया है,
 बादलों से कहकर 
और धरा ने भी सौंधी खुशबू से महका लिया है
 आँगन अपना ......
आखिर दिल से निकली विनती की 
अनदेखी नहीं की जा सकती .....
और प्रेम के बस में कौन नहीं ?
-अर्चना

Wednesday, June 5, 2013

पर्यावरण दिवस...

सुबह गज़ब का नजारा देखा
घूमने के समय अजब तमाशा देखा
गुलमोहर गुमसुम खड़ा था
दूब खिलखिला रही थी
बादल नंगे पाँव दौडे चले आ रहे थे
हवा उनको पीछे से दौड़ा रही थी
हम अपनी धुन में चले जा रहे थे
प्रकॄति संग में गुनगुना रही थी
गुलमोहर और दूब की छेड़छाड़ के बीच
गुलमोहर के लाल फूल झड़े जा रहे थे
ये देखकर उनकी माँ कभी उन्हें डरा
और कभी मना रही थी..
शायद स्कूल के लिए देर हो रही थी
और वो दोनों को नहाने के लिए बुला रही थी
सूरज दादा बदली की चादर ताने
झूठ-मूठ ही सोने का नाटक कर रहे थे
तभी चिडिया रानी ने चीं-चीं का शोर मचाया
देर हो जायेगी ऐसा बताया...
बादल नें दौड़कर उनको पकड़ लिया
उनकी धक्का-मुक्की में मुझको भी धर लिया..
नहलाना था उन दोनों को
साथ-साथ मुझे भी नहला दिया
भीगे बदन से घर लौटना पड़ा
पर सिहरन को समेटना बहुत अच्छा लगा
आते ही मौसम ने ली अँगड़ाई
और पर्यावरण दिवस पर दी सबको बधाई.....
-अर्चना
(०५-०६-२०१३,नासिक)

Monday, August 30, 2010

सुहानी भोर ................................




चित्र गूगल से साभार .....

फिर आया सावन,
हुई रिमझम बारिश,

था गाँव में जो तालाब,
पूरी हुई उसकी ख्वाहिश,

याद आया उसे अपना किनारा,
जहां बसा था एक घर प्यारा,

नजर जो घुमाई उस ओर,
बस दिखी थी एक आस की डोर,

बरसों पहले बसा करते थे जहां,
हंसों के जोड़े,

ले उड़े थे उन्हें,
इच्छाओं के घोड़े,

अब एक लंबी आह भरता है,
और ये आशा करता है,

हंसों के वे जोड़े,
वापस आयेंगे,

रिश्तों के टूटे मोती,
साथ लायेंगे,

गूथेंगे माला,
पह्नायेंगे दादी को,

सुनेंगे कहानी,
और याद करेंगे नानी को,

खेलेंगे खेल और,
सूने घर में भर देंगे शोर,

होगी एक दिन,
फिर वही सुहानी भोर .....................

Saturday, June 5, 2010

प्रकृति की सुन्दरता -------------------------------गानों में ----------------मेरी पसंद ...........

आज सुनिए बल्कि देखिए मेरी पसंद के ये गीत ...............प्रकृति की सुन्दरता लिए ...............( यू -ट्यूब से साभार ..).



और इसका नया रूप भी .........


एक विनती भी --------समय निकालकर -------------एक बार किसी पेड़ के नीचे बैठे .............वे खुश होंगे .........