मुझे ऐसा लगता है कि हम अपनी हर बात किसी से प्रेरित होकर ही कहते हैं,या तो वो कोई घटना होती है, या अनुभव ।
अब मुझे ही लीजिए- मैनें पिछली पोस्ट लिखी एक ब्लॉग पर आई टिप्पणी से प्रेरित होकर ..पर सिर्फ़ उस ब्लॉग के लिए नहीं --सबके लिए और जिस ब्लॉगपोस्ट से प्रेरणा मिली,वो कहीं और से प्रेरित होकर लिखी गई थी ।
यही नहीं मेरी बोरियत से प्रेरित होकर बेटे वत्सल ने अपना ब्लॉग मुझे दिखाया था ,और मेरा ब्लॉग बना दिया था ,मैने छोटी बहन रचना जो बहुत पहले से लिखती थी, से प्रेरित होकर चार -छ:लाईन लिखकर शुरुआत की लिखने की..
इस तरह सीखते-पढ़ते आज एक पोस्ट का पॉडकास्ट बनाया है ..अब ये नया इसलिए है कि मैं आमतौर पर ऐसे पॉडकास्ट नहीं बनाती ....( नशे/वशे या नेता/वेता के नाम वाले)......पर ये सामयिक लगा और फ़िर ...कहीं पढ़ी एक लाईन - "देखी जाएगी" से प्रेरणा लेकर पोस्ट कर ही दिया है आज ....सुनिए दीपक बाबा की बकबक नामक ब्लॉग से एक पोस्ट ---
नशा बुरी बात .......नहीं तो सब कुछ उल्टा-पुल्टा .