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Saturday, June 30, 2012

अपनापन - एक कहानी



कहानी -- अपनापन  
लेखिका -- रचना बजाज
पॉडकास्ट-- अर्चना चावजी





इस कहानी और कई सारी अन्य कहानियों को  आप रेडियो प्लेबैक इंडिया पर  "बोलती कहानी"
कार्यक्रम के अन्तर्गत सुन सकते हैं 

Friday, March 30, 2012

जन्मदिन मुबारक-- छोटी बहना!!!

रचना को जन्मदिन की बधाई व शुभकामनाएं ---         
    ‘ हमारी फ़ितरत ही ऐसी है कि
       एक जैसी ठहर नही पाती है   हर नये दिन के साथ वो भी बदल जाती है!’....! 
                                                             
                                                                               





 सदा यूँ ही हँसती रहो....और लिखती रहो......  


                   "मैं आम नहीं खास हूँ "

क्या पता मै कौन हूं!
वाणी या कि मौन हूं!
मै एक उजली आस हूं,
मै एक अथक प्रयास हूं!
अलगाव हूं, रूझान हूं,
जिम्मेदारी हूं, एहसान हूं!
मै सतह हूं, थाह हूं,
शक्ति मै अथाह हूं!
मै दुख हूं, हर्ष हूं,
साहस हूं, संघर्ष हूं!
प्रचूर हूं, अल्प हूं,
प्रयोग का प्रकल्प हूं,
समस्या हूं, विकल्प हूं!
मै एक द्रूढ संकल्प हूं!
मै एक तीव्र चाह हूं,
खुद ही अपनी राह हूं!
मै प्यार का सम्बन्ध हूं,
या कि मै अनुबन्ध हूं!
मै कर्म हूं और साधना,
और मै आराधना!
मै काव्य हूं और छन्द हूं,
और मै निबन्ध हूं!
आरंभ हूं और अन्त भी,
सूक्ष्म हूं, अनन्त भी!
कही गयी, अभिव्यक्त हूं,
या कि मै अव्यक्त हूं!
सत्य हूं, और स्वप्न हूं
भाग्य हूं, प्रयत्न हूं!
सफ़ल भी हूं, विफ़ल भी हूं,
प्रश्न मै और हल भी हूं!
कठिन हूं मै, सरल भी हूं,
कठोर भी, तरल भी हूं!
गूथी हुई, उलझन भी हूं,
और मै सुलझन भी हूं!
विचार की उत्प्रेरणा ,
मै कर्म की हूं प्रेरणा!
न्यून हूं, समग्र भी,
शांत हूं, और व्यग्र भी!
वेदना, संवेदना हूं
जड़ भी हूं, हूं चेतना!
सुनहरी उजास हूं !
मै आम नही खास हूं !!
 -  रचना बजाज
 और मेरी ओर से एक गीत तुम्हारे लिए...

Saturday, May 14, 2011

कभी धूप -कभी छाँव

जून २००९ में मैंने और रचना ने एक साथ गाया था ये गीत.........बहुत मुश्किल आई थी...एक तो गाना आता नहीं था...रिकार्ड करना भी तभी सीखा था..हेडफ़ोन को हम दोनों नेबीच में पकड़ लिया था हाथ में .........और जैसे ही गाना शुरू करते हँसी भी शुरू.........ऊपर से पल्लवी और निशी भी कम नहीं थे हँसाने को...पर वो सेर तो हम भी सवा सेर .....उन्हें कमरे से बाहर निकालकर ....कम से कम .२५-३० बार कोशिश की तब हो पाया था.....
आजकल पुराने गीत ही सुन रही हूँ ...उसी में मिला....याद ताजा कर गया.............आप भी सुने ---




Tuesday, November 2, 2010

हाड़ी रानी --रचना की आवाज में

आज सुनिए रचना की आवाज में मन्नाडे द्वारा फ़िल्म "नई उमर की नई फ़सल " के लिए गाई गई एक कविता जिसे हमने पहली बार सुना और देखा ज्ञान दर्पण  पर जिसे रतनसिंह शेखावत जी ने प्रस्तुत किया था। विस्तॄत रूप से कविता पढिये व विडियो देखिये ब्लॉग  ज्ञान दर्पण पर..




 हम सहॄदय आभारी है शेखावत जी के ---इस रचना से रूबरू करवाने के लिए..

Friday, July 30, 2010

हिन्दी----------------या मराठी------------------------------या फ़िर गुजराती-----------क्या सुनेंगे आप----???

सीखने को नहीं मिला --------------पर गाने का जूनून हमें यहाँ तक ले आया---------------------

१---हिन्दी -----देवेन्द्र पाठक(भाई)



मराठी--- रचना बजाज (बहन)


गुजराती--- अर्चना चावजी (मैं)
विशेष:-- ये गीत सागर नाहर जी के ब्लॉग पर सुना था मैने उनका आभार !!!

Saturday, June 12, 2010

उसने लिखा...................बहुत दिनों के बाद.......................

आज वो लौट आई है ...................बडे दिनों के बाद..........मै खुश हूँ..............

Sunday, July 12, 2009

कविता जो यूं ही बन गई ------------------

मुझे पता था , तुम न बचोगी
"शब्दों " के इस चक्रव्यूह में ,
फंस कर ही तुम रह जाओगी
" अक्षरो " के इस जंगल में |

" प्रश्न " तुम्हे कहीं जाने न देगा
जब तक तुम उत्तर न लिखोगी ,
"विस्मय " तो सबको तब होगा
जब तुम अपने " कोष्ठक " खोलोगी |

नन्ही " बिंदी " भी खुशबू दे देगी
जब " चंद " को तुम अपना " न " दोगी ,
"व्यंजन " भी " स्वर " से मिल खुश होंगे
जब " चंद्रबिन्दु " संग तुम हँस दोगी |

"अल्पविराम " ले "भाव " भी आ जाएंगे
"मात्रा " संग जब " वाक्य " रचोगी ,
"पूर्णविराम " भी खड़ा हो झूमेगा
जब "अवतरण " में तुम उसे दिखोगी |

बात तो है कुछ ख़ास ही तुममे
मेरे संग सब भी जान ही लेंगे ,
"कविता जो न बन पाई " तो क्या
लेखनी को तो मान ही लेंगे |

मेहनत का फल मीठा होता
लिखोगी , तभी जानोगी ,
"सरस्वती " दादी थी तुम्हारी
बात तो ये मेरी मानोगी |

पकडो शब्दों को ,लिखती जाओ
बोलो ? लिखने से क्या अब तुम बचोगी ,
कहती हूँ मै बहन तुम्हारी --
" डेश "(- रचना ) संग इतिहास रचोगी |



Wednesday, July 1, 2009

भला किसी का...

बड़ी मुश्किल से रचना ने सागर जी की मदद से ये ड्राफ्ट तैयार करके मुझे भेजा है , अब मै आपको सुनवाती हूँ ये गीत मेरा रचना का गाया -------
विशेष --- गलतियों पर ध्यान देकर गीत की भावनाओं पर ध्यान दीजियेगा |यदि गीत पढ़ना चाहते हो तो यहाँ पढ़े .........


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