Sunday, October 15, 2017

अपना घर

बात उन दिनों की है जब अपनी बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी, हम होस्टल में रहते थे।
एक दिन उसने स्कूल से लौटकर कहा-
"मम्मी, जब कोई अपने से मिलने आता है ,तो लौटते समय कहता है-हमारे घर आना,और हम तो उन्हें कभी भी कह नहीं सकते कि -आप भी हमारे घर आना।" क्या कभी अपना कोई घर नहीं होगा,हम यहीं रहेंग?(3 साल से हम वहीं थे).......मेरी सारी सहेलियों को चाय बनाना आता है,कुछ तो नाश्ता भी बना लेती हैं अपना,मुझे तो चाय भी बनाना नहीं आता,अपना तो कोई किचन भी नहीं है😢
...और कुछ दिनों बाद मैंने घर लेकर जॉब से इस्तीफा दे दिया ,ये नहीं सोचा कि आगे काम क्या और कौनसा करूँगी,कमाई का जरिया क्या होगा?वो तो स्कूल वालों ने मुझे स्कूल छोड़ने नहीं दिया 😊और हम अपने घर रहने चले आए।
मैंने ठीक किया न !

बच्चों की जो मुस्कान तब देखी थी,आज भी याद है !😊
आज बेटी अपने घर में खुश हैं,ढेर सारी जिम्मेदारियों और "नानी की बेटी "के साथ
अनवरत चलने वाली कहानी का एक टुकड़ा ...

Monday, October 9, 2017

एक गीत कराओके पर


https://m.starmakerstudios.com/share?recording_id=4785074250308572

Sunday, October 8, 2017

करवा चौथ

नास्तिक/आस्तिक,
आस्था/अनास्था,
व्रत/उपवास,
चाँद,छलनी...
और करवा चौथ
जिंदा रखने को !

कोई करे,न करे,
उसकी मर्जी!
मगर
फेसबुकी ट्रेंड्स!!! के बीच -
यहाँ मरना भी कौन चाहता है !....😊😊

एक फोटो में पश्चिम में सुबह का चाँद है,तो दूसरी में भले नज़र न आए पर पूरब-और पश्चिम के मध्य बादल की चमक बता रही है कि दूर पूरब में सूरज निकला है...
एक और चित्र में-
इंद्रधनुष बनते-बनते राह गया ...काले बादल नीचे उतर आए हैं...(सारे फ़ोटो आज सुबह के लिए हुए )

Friday, October 6, 2017

फिर तेरी कहानी याद आई

कल वत्सल का जन्मदिन था,वो 32 का हुआ ,शाम की पूजा के समय मेरा दिल भर आया ,जब तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था मैं 32 की थी ... 😢 ये आंकड़े भी न ! चैन नहीं लेने देते कभी ....
और तो और शरद पूर्णिमा का चाँद भी न दिखा बारिश की वजह से ... सबको साथ ही रोना आ गया हो जैसे ...😢
परेशानियां हरसिंगार की तरह खिल आती हैं ,झर ही जाएंगी...

दिन तो सदा एक से नहीं होते,तुम्हें और मुझे एक से रहना है ..😊
हँसो यार !!

-अनवरत चलने वाली कहानी का एक टुकड़ा

Wednesday, October 4, 2017

एक इंटरव्यू

मिग बज़

हालांकि अब तक भी स्पष्ट नहीं हुआ कि ललित चाहर करना क्या चाहते हैं ब्लॉगर्स के लिए ,लेकिन एकदम से प्रश्न भेज उत्तर पूछे तो मैंने भी दे ही दिए ...आप भी पढ़िए -

MiG Buzz Exclusive's Questions

आपने ब्लॉगिंग कब शुरू किया और ब्लॉगिंग में आप कैसे आए?

लिखने की शुरुआत हुई 2007 में और ब्लॉग पर पोस्ट करना शुरू किया 2008 से, ब्लॉग शुरू करने की कहानी रोचक है। बच्चे बड़े हुए तो शहर से बाहर चले गए। 12वीं के बाद ही बेटा नोएडा और बेटी पूना। जब वे छुट्टी में घर आते तो लगता एक हफ्ता इतनी जल्दी खत्म हो जाता है। बहुत सी बातें अनकही रह जाती है, तब बेटे ने ये ब्लॉग बनाकर दिया और कहा- अब जो हमसे कहना रह जाता है यहाँ लिख दिया करो। आपकी बातें सारे बच्चों के लिए अच्छी होंगी और बस शुरुआत हो गई.. एक ढाई साल से बंद पड़े डेस्कटॉप से। "मेरे मन की" के अलावा "नानी की बेटी" पर ज्यादा सक्रिय हूँ।

शुरुआत में आपको किस समस्या का सामना करना पड़ा और अब ब्लॉगिंग कैसी चल रही हैं?

टाईप करना भी नहीं आता था। एक उंगली से अक्षर खोज खोज कर लिखती थी शुरूआत में, "बारहा" से हिन्दी में लिखना आसान हुआ। एक-एक चीज सीखते गई। अनजाने,अपरिचित मित्रों से चेटिंग करते-करते पूछ-पूछ कर सब जुड़ते चले गए और अब तो लिखते लिखते पॉडकास्टिंग को अपना लिया। इन दिनों नातिन मायरा के साथ बहुत व्यस्त हूँ सो समय कम मिल पा रहा है। फिर भी ब्लॉगिंग /पॉडकास्ट के लिए समय मिलते ही पोस्ट करती रहती हूं। अपने मन की.. बहुत से लोगों की मदद मिली।

नए ब्लॉगर के सफल ब्लॉगर्स बनने के लिए कुछ टिप्स?

सफल ब्लॉगर किसे कहेंगे? ये थोड़ा स्पष्ट होना चाहिए, जो अपने मन के विचार अभिव्यक्त कर पा रहा है वो, जो उपयोगी जानकारी निशुल्क साझा कर पा रहा है वो, जो ब्लॉग से पैसा कमा पा रहा है वो या जिसकी पहचान बनी ब्लॉग से वो 😊 हाँ नए ब्लॉगर को सतत दूसरे ब्लॉग पढ़ते रहना चाहिए अलग अलग, अपनी रूचि के.. तो खुद के विचार और बेहतर रूप से साझा कर पाएंगे।

भारतीय ब्लॉगर और विदेशी ब्लॉगर के बीच क्या फर्क देखने को मिलता है?

अब तक तो भारतीय ब्लॉगरों को ही पढ़ा, जो देश में हैं या विदेश में.. अपने यहाँ तो भारतीयता ही महत्वपूर्ण है।

मिग बज़ के लिए कुछ सुझाव/ प्रतिक्रिया

ये बिल्कुल नया है, अभी शुरुआत है ब्लॉग पर अच्छा बुरा पढ़कर चर्चा हो तो बहुत लोग लाभान्वित हो सकते हैं।

मेरा हमेशा प्रयास रहता है कुछ नया करने का    
  - अर्चना चावजी


Sunday, October 1, 2017

कुछ भी लिखा,ब्लॉग की खातिर ..

मुझे लगता है मेरी आँखें अंदर की तरफ घूम गई है,दूरदृष्टि मेरी रही नहीं ,पास का दिखाई नहीं देता ,शायद अब सब अंदर का देखना पड़  रहा है ,इसी का नतीजा मिल रहा है मुझे कविता के रूप में ,कविता बह निकलती है जब-तब इसी ब्लॉग या फेसबुक पर... 

मेरे जैसे कई लोगों की कवितायेँ बहती हुई दिखती हैं यहां ,उसी से पता चलता है -दिल कितना छोटा सा है ,कभी भी फट सकता है , आसपास की बहती कविताओं से टॉनिक लेना पड़ता है ,लोग आर्ट ऑफ़ लीविंग छोड़ आर्ट ऑफ़ डाईंग सिखा रहे हों जैसे। .. 

भला जानबूझकर मधुमक्खी के छत्ते में कौन हाथ डालेगा और वो भी तब ,जबकि दिख रहा हो की छत्ता बहुत बड़ा है और बहुत सी मधुमक्खियां उस पर बैठी हैं| पर क्या करें मीठा खाने की जिसको आदत पड़ गई हो उसे तो भगवान बचाए। ..और वो भी शहद खाना हो तो हाथ तो डालना ही पड़ेगा ... ठीक वैसे ही जैसे -ब्लॉग बनाया तो पोस्ट भी लिखनी ही पड़ेगी ..
यानि बस अभिव्यक्त होना है... जैसे विरोध होने लगा है ... तू हाँ बोल! मैं ना बोलता हूँ, एक तो सही ही होगा .. करोड़ मिले तो बाँट लेंगे...👍

पुरानी टी शर्ट


याद आई बात कोई अपने दरमियानी मुझे
मुस्कुराते लब हैं तो,आँखों में पानी किसलिए।

जल रही है आग बरसों से मिलन की आस में
फिर भला सावन में,इसको बुझानी किसलिए।