कई साल बीत गए जब सुना करती थी विविध भारती पर "हवामहल".....बस उसका संगीत ऐसा रचा-बसा कि अब तक याद है वो नाम ....
बस कुछ नया करने को मन किया और भा गई
संजय अनेजा जी की कहानी "इंतजार".....
"साथी हाथ बढ़ाना " गीत की तर्ज पर .......याद आये
सलिल भैया और उन्होंने बदला कहानी को नाटक में ....(मुझे पता नहीं था कि वे ये काम कर सकते हैं मैनें तो बस ये बताया था कि कहानी रिकार्ड करनी है,और दूसरी आवाज भी चाहिए)...
अब करना था रिकार्ड तो दूसरी आवाज के लिए भी मना लिया भैया को .......(बहुत कुछ सीखना भी तो था) .....
काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी ...कभी मैं बिमार तो कभी भैया ....हाय-तौबा करके एक दिन तय कर ही लिया ..वॉईस चेट का इस्तेमाल करना था ..झूमा और भाभी को डिस्टर्ब किए बिना(टी.वी. दखने से) ....
बहुत आवाज आ रही थी सिरियल की ....बेचारे भैया ....लेपटोप लेकर कमरा बदलते रहे ...आखिर दोनों के सोने के बाद शुरूआत हुई.....रिकार्ड किया (एक ही बार मे).......ताम-झाम करके .....
हुआ तो ठीक अब संगीत की कमी खल रही थी .......ये काम सौंपा-
-पदमसिंग जी को ....वे माहिर हैं इसमें(शायद किसी को पता न हो )....और घर से घूम के आने पर किया वादा पूरा उन्होंने भी ....
इस तरह कई परेशानियों के बाद भी पूरा हुआ
"हमारा -हवामहल" ......आभासी रिश्तों का एक और सम्मिलित प्रयास...
चाहा तो था कि इसी ब्लॉग पर पोस्ट करूं ....पर
"हिन्दयुग्म" टीम की मेहनत को देखकर इसे वहाँ पोस्ट करना उचित समझा....(
अनुराग शर्मा जी का सहयोग भी तो लेना था )
अभी तक किसी से मुलाकात तो नहीं हुई है पर..कार्य आपके सामने है .....
मै अपने सभी सहयोगियों की आभारी हूँ (बहुत परेशान किया है सबको)......आशा है आप सबको हमारा ये सम्मिलित प्रयास पसन्द आयेगा ...सुनिये यहाँ -----
"हमारा -हवामहल" ..