Showing posts with label ओम आर्य. Show all posts
Showing posts with label ओम आर्य. Show all posts

Sunday, December 18, 2011

मौन का खाली घर देखा है ???

और जब सपने टूट जाते थे ,
और जरूरते रोती थी ,
तब सरकार सपनों की गिनती कर,
जरूरतों के हिसाब से कागज पर,
आंकडे भरती थी.......... मौन थी मै ओम जी की ये कविता पढकर........



 कई दिनों से लिखा नहीं क्यों ??आप भी मिस क़र रहें होंगे मेरी तरह...
 अब मौन न रहो...----ओम आर्य ...