१
स्वागत तेरा
आँगन आँगन में
मेरे बसन्त ...
२
पीली सरसों
और लाल पलाश
केशरिया मैं...
३
प्रीत उमगे
उर में साजन के
मैं शरमाउँ...
४
बसन्त आया
बिछ गई धरा पे
पीली चूनर...
५
कोयल बोले
आम के पेड पर
मधुर बोली...
६
पीली सरसों
चमक उठे खेत
महके मन..
७
मेरी कोयल
कूकती,चहकती
बसन्त संग...
और अब रविन्द्र संगीत--
इन हायकु को हाइगा के रूप मे बदलने के लिए ॠता शेखर‘मधु’ जी का आभार ...
स्वागत तेरा
आँगन आँगन में
मेरे बसन्त ...
२
पीली सरसों
और लाल पलाश
केशरिया मैं...
३
प्रीत उमगे
उर में साजन के
मैं शरमाउँ...
४
बसन्त आया
बिछ गई धरा पे
पीली चूनर...
५
कोयल बोले
आम के पेड पर
मधुर बोली...
६
पीली सरसों
चमक उठे खेत
महके मन..
७
मेरी कोयल
कूकती,चहकती
बसन्त संग...
और अब रविन्द्र संगीत--
इन हायकु को हाइगा के रूप मे बदलने के लिए ॠता शेखर‘मधु’ जी का आभार ...