न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे, न ही किसी कविता के, और न किसी कहानी या लेख को मै जानती, बस जब भी और जो भी दिल मे आता है, लिख देती हूँ "मेरे मन की"
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Friday, July 14, 2017
Tuesday, July 11, 2017
हिमांशु कुमार पाण्डेय जी की कविता बादल तुम आना -
आज चलिए मेरे साथ हिमांशु कुमार पाण्डेय जी के ब्लॉग सच्चा शरणम् पर , सुनिए उनकी कविता -
बादल तुम आना -
Thursday, July 6, 2017
Monday, July 3, 2017
Sunday, July 2, 2017
संजय झा मस्तान के लिखे व्यंग्य - "मैं टॉपर कैसे बना " का पॉडकास्ट
इन दिनों फेसबुक की वॉल का उपयोग व्यंग्य की जुगलबंदी के तहत-तरह तरह के विषय पर कलम चलाने के लिए किया जा रहा है। ..उसी के अंतर्गत एक विषय था - टॉपर , इस विषय पर फिल्मकार संजय झा मस्तान के लिखे व्यंग्य - "मैं टॉपर कैसे बना " का पॉडकास्ट आप यहां सुन सकते हैं -
Thursday, June 29, 2017
मेल मुलाकात और गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी का गीत
गिरिजा दी से इस बार फिर मुलाकात हुई बंगलौर में ,इस बार रश्मिप्रभा दी के घर हम मिले।ऋता शेखर भी साथ थी, गिरिजा दी और रश्मिप्रभा दी पहली बार एक -दूसरे से मिल रही थी, और फिर जो दिन भर बातों में बीता पता ही नहीं चला शाम के 6 बजे पहली बार घड़ी देखी और फिर देर हो गई,देर हो गई करते करते 7 बज गए ।बहुत आत्मीय रही मुलाकात सबकी,बहुत अच्छा लगा ,खास बात ये की चारों ब्लॉग लिखती हैं।
वहीं ऋता जी ने भी अपनी कुंडलियों का और गिरिजा दी ने अपना गीत संग्रह - "कुछ ठहर ले और मेरी जिंदगी"भेंट दिया , आज उसी संग्रह से एक गीत - "सर्वव्यापक" गाने का प्रयास किया है आप सब भी सुनियेगा -
वहीं ऋता जी ने भी अपनी कुंडलियों का और गिरिजा दी ने अपना गीत संग्रह - "कुछ ठहर ले और मेरी जिंदगी"भेंट दिया , आज उसी संग्रह से एक गीत - "सर्वव्यापक" गाने का प्रयास किया है आप सब भी सुनियेगा -
(प्लेयर को सक्रिय करें, एक बार में न हो तो पुनः करें)
Wednesday, June 28, 2017
रविशंकर श्रीवास्तव जी के व्यंग्य का पॉडकास्ट
व्यंग्य की जुगलबंदी के अंतर्गत "खेती" विषय पर लिखे गए रविशंकर श्रीवास्तव जी
के ब्लॉग "छींटे और बौछारें " पर प्रकाशित व्यंग्य -
भारतीय खेती की असली, आखिरी कहानी
यहाँ सुनिए -इसे आप यहां भी सुन सकते हैं -
हास्य-व्यंग्य पॉडकास्ट - जुगलबंदी - खेती
Wednesday, June 21, 2017
Thursday, June 8, 2017
Wednesday, May 31, 2017
इक तो सजन मेरे पास नहीं रे - गौतम राजऋषि की कहानी का पॉडकास्ट
गौतम राजऋषि किसी परिचय के मोहताज नहीं। ...
उनके ब्लॉग -पाल ले एक रोग नादाँ से एक कहानी का पॉडकास्ट बड़ी मेहनत के बाद बना पाई हूँ ,.. तकनीकी जानकारी न के बराबर ही है , जो सीखा यहीं ब्लॉग पर सीखा , ..... गलतियां संभव हैं। .. आशा है उन्हें अनदेखा करेंगे। ...
सुनियेगा। .. कहानी बहुत बड़ी है। ..प्रयास किया है हर पात्र को आप महसूस करें ,मैं इसमें कितना सफल हुई ये आपकी प्रतिक्रया ही बताएंगी। ..
कहानी का समय है ४४मिनट १७ सेकण्ड और
शीर्षक है - इक तो सजन मेरे पास नहीं रे ...
(कहानी मासिक हंस के नवंबर 2012 अंक में प्रकाशित हो चुकी है )
(अगर सुन न पा रहे हों -प्लेयर को एक बार सक्रीय करें फिर दुबारा प्ले करें )
उनके ब्लॉग -पाल ले एक रोग नादाँ से एक कहानी का पॉडकास्ट बड़ी मेहनत के बाद बना पाई हूँ ,.. तकनीकी जानकारी न के बराबर ही है , जो सीखा यहीं ब्लॉग पर सीखा , ..... गलतियां संभव हैं। .. आशा है उन्हें अनदेखा करेंगे। ...
सुनियेगा। .. कहानी बहुत बड़ी है। ..प्रयास किया है हर पात्र को आप महसूस करें ,मैं इसमें कितना सफल हुई ये आपकी प्रतिक्रया ही बताएंगी। ..
कहानी का समय है ४४मिनट १७ सेकण्ड और
शीर्षक है - इक तो सजन मेरे पास नहीं रे ...
(कहानी मासिक हंस के नवंबर 2012 अंक में प्रकाशित हो चुकी है )
(अगर सुन न पा रहे हों -प्लेयर को एक बार सक्रीय करें फिर दुबारा प्ले करें )
Friday, May 12, 2017
ब्लॉग एक कली दो पत्तियाँ से एक पॉडकास्ट
आज ब्लॉग बुलेटिन की लिंक्स पढ़ते हुए जा पहुंची दीपिका रानी के ब्लॉग -
एक कली दो पत्तियाँ पर
सुनिए इनके ब्लॉग से पढ़ी गई दो रचनाएं मेरी आवाज में -- पसंद आये तो उनके ब्लॉग पर जाकर सराहें
एक कली दो पत्तियाँ पर
सुनिए इनके ब्लॉग से पढ़ी गई दो रचनाएं मेरी आवाज में -- पसंद आये तो उनके ब्लॉग पर जाकर सराहें
Friday, May 5, 2017
सुनिए दिलीप की लिखी एक कविता-"दो पातीयां"
२०१० में ये पॉडकास्ट ब्लॉग पर पोस्ट किया था , कुछ तकनीकी कारणों से पुराने पॉडकास्ट सुने नहीं जा पा रहे थे। ... आज ये रिकार्डिंग मिल गई , फिर से प्रयास किया है सुनवाने का -
इस कविता को आप यहाँ पढ सकते हैं............दिल की कलम से ....
ब्लॉग है दिलीप का -
बेटी और माँ का एक संवाद............पत्र के माध्यम से......
इस कविता को आप यहाँ पढ सकते हैं............दिल की कलम से ....
ब्लॉग है दिलीप का -
बेटी और माँ का एक संवाद............पत्र के माध्यम से......
Wednesday, May 3, 2017
चढ़ता सूरज धीरे-धीरे
"गाओ गुनगुनाओ शौक से" एक ग्रुप क्या बनाया ... संगम हो गया गीतों,ग़ज़लों,कव्वालियों का , आज गिरिजा दी को गेस्ट एडमिन बनाया और उन्होंने थीम दी - गैर फिल्मी भजन, ग़ज़ल, स्तुति
और एक से बढकर एक भजन ग़ज़ल सुनाई गई। ... हालांकि कव्वाली के बारे में स्पष्ट नहीं था गा सकते हैं या नहीं। ..
फिर भी ये कोशिश की... पसंदीदा कव्वाली। ... एक समय था जब इसकी गूँज थी। अज़ीज नाज़ा की आवाज में
... आज भी दिल पर राज करती है ये कव्वाली - आप भी सुनिए - (ध्यान रहे मैं कोई गायिका नहीं हूँ )
Sunday, April 30, 2017
Wednesday, April 26, 2017
Saturday, November 5, 2016
Thursday, October 27, 2016
प्रेमचंद की कहानी
प्रेमचंद की कहानी -
ये कहानी जब रिकार्ड की थी तो लग नहीं रहा था कि इतनी अच्छी तरह से हो पाएगी। ..
इसे मैंने रिकार्ड किया इंदौर से और अनुराग शर्मा जी ने किया पिट्सबर्ग में। ...
ख़ास बात ये कि पहले पूरी कहानी मेरी आवाज में रिकार्ड करके भेज दी और उन्होंने बाद में अपना वाला हिस्सा रिकार्ड करके एडिट किया। ..
और आवाज फाइनल करने के लिए उन्हें जी मेल की वॉइस चेट पर सुनाया था। ..
आप सुनिये और बताइयेगा प्रयोग सफल रहा या नहीं
Tuesday, March 29, 2016
Sunday, February 7, 2016
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