न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
गीत को स्वर देने के लिए आभार। बहुत सुंदर।
आपको सपरिवार होली की शुभकामनायें ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!आपको सपरिवार होली की मंगलकामनाएँ!
बेचैन आत्मा जी की कविता सुनकर आत्मा तृप्त हुयी!!
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4 comments:
गीत को स्वर देने के लिए आभार। बहुत सुंदर।
आपको सपरिवार होली की शुभकामनायें ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सपरिवार होली की मंगलकामनाएँ!
बेचैन आत्मा जी की कविता सुनकर आत्मा तृप्त हुयी!!
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