Saturday, November 28, 2009

मुझे भी बहुत गुस्सा आता है उन पर .......................इसलिए.......क्या कोई मेरा सन्देश उन तक पहुँचायेगा ? ? ? ..

अरे कायर है ये आतंकी,
खुद तो जीते नही है,
दूसरो को भी नही जीने देते,

तभी तो हमेशा अकेले मरने से डरते है,
और मासूम लोगों का साथ चुनते हैं,
अगर हिम्मत है -तो जिन्दगी से लडकर दिखाएं,
फ़ाके मे अपने बच्चों को रोटी खिलाएं,
माँ -पिताजी को दवाई दिलवाएं,
और अपनी प्यारी बहना की शादी करवाएं,
इनके दिल में कोई प्यार नही होता,
इसलिए ये ममता,प्यार,मजहब को नही जानते,
अगर इनके दिल में प्यार होता,
तो ये औरों की नही,
अपने दिल की मानते,
और अपने अन्दर की आवाज को पहचानते ,

"अरे आतंकियों-- समय रहते सम्भल जाओ ,
अपने प्यार,ममता,और मजहब को पहचानो,
और अपनी जिन्दगी सफ़ल बनाओ !
तब देखना दुनिया तुम पर नाज करेगी,
और तुम्हारी मौत के बाद भी तुम्हे सुनेगी !!!
"

10 comments:

सैयद | Syed said...

पर अफ़सोस... आपकी ये पुकार आतंकियों के दिल तक नहीं पंहुचेगी... क्यूँ उनके तो दिल होता ही नहीं..

राज भाटिय़ा said...

यह आतंकियों इंसान के रुप मे भेडिये है या शेतान कह ले इन्हे, बहुत अच्छी कविता लिखी आप ने धन्यवाद

Udan Tashtari said...

ये लातों के भूत हैं..बातों से नहीं मानते..आप खामखां अपना समय जाया कर रही हैं और इधर हमारी सरकार उनको मेहमान बना कर बिरयानी परोस रही है.

vatsal said...

The blame game ...everybody plays very well...the indian say its he terrorist...terriosts say its our planners ...planners blame its their govt and other developed countries which have pushed them to take these extreme steps the developed say its the poor education and narrow minds the narrow minded say its the past and leaders...leaders argue that you select us ......but end of all we all win in this game as we all have someone to blame and we all are at some point lost as somebody is pointing a finger at you too... :)...open to opinions...

M VERMA said...

एक अच्छा आह्वान --
सन्देश ग्रहण की ताकत जब खत्म हो जाती है, सम्वेदनाए जब मर जाती है तभी तो ये आतंकवादी बनते हैं.

हिमांशु । Himanshu said...

आपके भीतर की संवेदना ने लिखवा दिया आपसे ।
शायद ही समझेंगे वह । उनकी चेतना गिरवी रख दी गयी है । शायद ही वापस पा सकें वो ।
कविता का आभार ।

पी.सी.गोदियाल said...

कविता बढ़िया है लेकिन एक सुधार के लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ ;
कायर आतंकी नहीं, कायर हम है जो पाल पोस रहे है !

Nirmla Kapila said...

सही कहा है उनका दिल होता तो संवेदनायें होती तभी वो प्रेम भाव मजहब सब कुछ की समझ रखते अच्छी रचना है बधाई

Truth or Dare said...

AAP BHI GUSSE ME MAT AANA NAHI TO AAP BHI .....

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

जिनकी संवेदनाएं ही मर चुकी हों...उन पर ऎसे संदेशों का कोई असर नहीं होने वाला... ।