Friday, November 12, 2010

जरा सोचो तो भला----

 आज सुनिये एक रचना ,  'सुज्ञ' जी के ब्लॉग  सुबोध से------

6 comments:

राजीव तनेजा said...

मधुर आवाज़ में जीवन के फलसफे को समझाता सुन्दर गीत

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

गीत और स्वर का अद्भुत समागम!

संजय कुमार चौरसिया said...

ek baar firse , geet aur aawaj dono hi bahut sundar

सुज्ञ said...

गीत आपकी स्वर-लहरी से सार्थक हो गया।
मधुर आवाज से समृद्ध है आप।

क्षितिजा .... said...

बहुत ख़ूबसूरती से लिखी और स्वरबद्ध की हुई रचना ...

प्रवीण पाण्डेय said...

मर्म छूती कविता व संगीतमयी स्पर्श देती आपका स्वर।