Thursday, May 24, 2012

सपना मेरा ...



किसी अपने का सपना हो तो अच्छा लगता है 


कोई सपने वाला अपना हो तो भी अच्छा लगता है 


किसी सपने का अपना हो जाना जिंदगी बना देता है 

और किसी अपने का सपना हो जाना जिन्दगी मिटा देता है ....




9 comments:

Anjani Kumar said...

शब्दों की ज़ादूगरी ...
बहुत सुन्दर

संजय भास्कर said...

सुंदर शब्दों में सुंदर सी कविता

सदा said...

बिल्‍कुल सच कहा ...

दिगम्बर नासवा said...

शब्दों का उलट फेर ...
ये जीवन भी तो उलट फेर है ...

प्रवीण पाण्डेय said...

अपनों का सपना और सपनों का अपना, दोनों ही अच्छे लगते हैं।

अरुण चन्द्र रॉय said...

सपने के बारे में सच कहा आपने...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

हलके-फुल्के अंदाज़ में बहुत ही गहरी बात!!

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

सपने आखिर सपने हैं, चाहे अपने हों या पराए।

BS Pabla said...

सपनों की दुनिया