Saturday, July 27, 2013

दो बूँद ....





हाँ,
दो बूँद गिरी 
मेरे शहर में
भीगी थी जिसमें
मैं,
खुशबू बसी है
अब भी वही
महसूस कर जिसे 
बन्द होती हैं पलकें
मेरी...

8 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

मन दुख से तार तार हो गया, श्रद्धांजलि..

अनुपमा पाठक said...

श्रद्धांजलि!

देवेन्द्र पाण्डेय said...


दुःखों की जब बरसात होती है
भीगते हैं हम
बंद होती हैं पलकें
गिरती हैं
दो बूँद
......आपकी इन दो बूँदों ने हमे भी भिगो दिया। विनम्र श्रद्धांजलि।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

विनम्र श्रद्धांजलि।

ताऊ रामपुरिया said...

सभी बहुत दुखी हैं, घर पर संवेदना व्यक्त करने आये लोगों के हुजूम से मार्मिकता और इनकी मिलनसारिता का पता लगता है.

विनम्र श्रद्धांजलि.

रामराम.

Anju (Anu) Chaudhary said...

श्रद्धांजलि

काजल कुमार Kajal Kumar said...

नि‍तांत दुखद

संजय भास्‍कर said...

विनम्र श्रद्धांजलि...!!