Sunday, September 1, 2013

.... की औलाद

सरिता नई शिक्षिका के रूप में मेरे स्कूल में आई थी।पति का इस शहर में तबादला होने पर उसने भी पुराना शहर ,पुराना स्कूल छोड़ दिया था। समय बीतते-बीतते हम कब सहेली बन गए ; पता ही नहीं चला ।
कल वो पुराने शहर की अपनी यादें, मेरे साथ ताजा कर रही थी ।
बातों की बातों में उसे अपनी पॉश कॉलोनी के घर की याद आई ,बताने लगी-
बहुत ही अच्छी कॉलोनी थी, सभी अच्छी जगहों पर काम करने वाले लोग थे। हमारे पड़ोस का घर जिन दंपत्ति का था ,वे अपने बच्चों के पास विदेश चले गए थे । एक दिन उसमें एक यंग लड़का किरायेदार बनकर आया, किसी कंपनी में अच्छी नौकरी थी। थोड़े परिचय के बाद कभी - कभी बात हो जाया करती थी लेकिन हम भी जॉब करते थे, तो ज्यादा मिलना नहीं होता था ।
एक महीने के बाद एक लड़की उसके साथ आ गई थी ,हमसे मुलाकात हुई कि पत्नी है , कम उम्र ही थे दोनों कभी -कभी अनबन की आवाजें आ जाया करती थी घर से ... दूर से देखकर हम  अपनी बालकनी से मुस्कुरा लिया करते ,लेकिन वो लड़की बात नहीं करती थी कभी...
फ़िर एक दिन पता चला कि वो गर्भ से है ... और वो लड़का टूर पर गया है... ७-८ दिन बीत गए ..इस बीच वो कम ही दिखती बाहर ...दिखती भी तो कुछ अनमनी सी .....
और एक दिन जब मैं स्कूल के लिए निकल रही थी, तो गार्ड को चिल्लाते हुए पाया वो लड़की गेट पर थी और गार्ड से कहासुनी हो रही थी ...बीच-बीच में गालियाँ भी दे रही थी ... कभी सड़क की तरफ़ दौड़ पड़ती .. गार्ड ट्रकों से उसे बचाकर खींच कर वापस लाता ....
उस वक्त तो देर हो रही थी गार्ड से समझा-बुझा कर घर भिजवाकर मैं स्कूल निकल गई ...फोन पर पतिदेव से खबर भी मिल गई थी बीच में कि उनके ऑफ़िस जाने से पहले तक घर में ही थी।
शाम को जब वापस पहूँची तो गार्ड नें बताया कि सड़क पर ही निकली हुई है ,और कुछ दूर तक चली गई है दिखाई नहीं दे रही ... मैं भी घर लौट आई ये सोच कर कि किसी परिचित के पास चली गई हो ...
रात होते ही फ़िर गेट के पास हंगामा हुआ ,गार्ड नें पुलिस को बुला लिया , और पुलिस पकड़कर ले गई ...
गार्ड बता रहा था कि वो साहब तो भाग गए लगते हैं ,फोन भी नहीं उठा रहे थे ..न मेरा न उनकी मेडम का .... और मेडम चिल्लाते हुए कहती भी जा रही थी कि उस औरत को मार डालूंगी - बीबी कहता है अपनी साला .........की औलाद ......

अब मैं सोच रही थी कि जिन्दगी भी कैसी यादों के पन्ने सहेज लेती है, जाने कहाँ - कहाँ से उफ़्फ़! ....

8 comments:

Sriram Roy said...

आपको बहुत -बहुत बधाई इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए। …. कभी मेरी रचनाएँ भी देखें। …।

Anurag Sharma said...
This comment has been removed by the author.
Anurag Sharma said...

जिन्दगी कितने रूप अपनाती है
कभी ज़ुल्म कभी कयामत ढाती है

प्रवीण पाण्डेय said...

जीवन के हैं रंग अनोखे।

Ramakant Singh said...

SAB BHALE KAHAN HOTE HAIN AAP BHI APANI AANKH BAND NA KAREN ANYATHA YE KUCHH BHI NAHIN PARINAM ISASE BHI BHAYANKAR

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

रूप की आराधना ही जिन्दगी है
प्यार की प्रिय कामना ही जिन्दगी है,
स्नेह सुधियों में किसी के डूबना ही
बस किसी को चाहना ही जिन्दगी है ,,,

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राजीव कुमार झा said...

सही कहा आपने 'जिन्दगी कितने रूप अपनाती है'.
जीवन के कितने रंग हैं.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

मार्मिक