Saturday, September 10, 2011

इंस्पीरेशन..यानि प्रेरणा...


मुझे ऐसा लगता है कि हम अपनी हर बात किसी से प्रेरित होकर ही कहते हैं,या तो वो कोई घटना होती है, या अनुभव ।
अब मुझे ही लीजिए- मैनें पिछली पोस्ट लिखी एक ब्लॉग पर आई टिप्पणी से प्रेरित होकर ..पर सिर्फ़ उस ब्लॉग के लिए नहीं --सबके लिए और जिस ब्लॉगपोस्ट से प्रेरणा मिली,वो कहीं और से प्रेरित होकर लिखी गई थी ।
यही नहीं मेरी बोरियत से प्रेरित होकर बेटे वत्सल ने अपना ब्लॉग मुझे दिखाया था ,और मेरा ब्लॉग बना दिया था ,मैने छोटी बहन रचना जो बहुत पहले से लिखती थी, से प्रेरित होकर चार -छ:लाईन लिखकर शुरुआत की लिखने की.. 

इस तरह सीखते-पढ़ते आज एक पोस्ट का  पॉडकास्ट बनाया है ..अब ये नया इसलिए है कि मैं आमतौर पर ऐसे पॉडकास्ट नहीं बनाती ....( नशे/वशे  या नेता/वेता के नाम वाले)......पर ये सामयिक लगा और फ़िर ...कहीं पढ़ी  एक लाईन - "देखी जाएगी" से प्रेरणा लेकर पोस्ट कर ही दिया है आज ....सुनिए दीपक बाबा की बकबक नामक ब्लॉग से एक पोस्ट ---

नशा बुरी बात .......नहीं तो सब कुछ उल्टा-पुल्टा .



13 comments:

संजय @ मो सम कौन ? said...

बड़ी प्रेरणा-प्रेरणा वाली पोस्ट है आपकी:)

दीपक बाबाजी की ये पोस्ट मस्त लगी थी और उस पोस्ट पर दिये अनुराग जी के लिंक वाली पोस्ट भी मस्त थी। उसमें कामेडी टच था तो दीपकजी वाली सामयिक हालात पर एक कटाक्ष। इसे पढ़ने में भी आनंद आया था और सुनने में भी। इस पोस्ट के बाद वाली पोस्ट भी वर्थपॉडकास्ट लगी वैसे मुझे तो।

बधाई हो दीपक भाई को और आपका आभार इसे हमें सुनवाने के लिये।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

Badhiya podcost hai.

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर पौडकास्ट..आभार

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अच्छी इंस्पिरेशन है... इसी प्रेरणा में पॉडकास्ट भी बदला बदला सा लगा! ये बदलाव भी अच्छा है!!
पढते समय तो बस एक ही बात दिमाग में घूम रही थी कि एक बेहतर और अच्छे विचारों को जन्म देनी आली वास्तु के स्वाद से वंचित रह गए हम!!
पढ़ना और सुनना दोनों आनंददायक रहा!!

दीपक बाबा said...

अर्चना जी, प्रणाम. बहुत बहुत आभार इस प्रेरणादाई पॉडकास्ट के लिए, प्रेरणादायक इसलिए कह रहे है कि यह पोस्ट आते आते कई प्रेरणादायक बातें हो गयी ....... .. बकिया हमारे पुरे परिवार और मित्र मण्डली की और से आपको बहुत बहुत साधुवाद.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वाह मज़ा आ गया। ऐसे सम-सामयिक और सटीक व्यंग्य कम ही सुनने में आते हैं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

प्रवीण पाण्डेय said...

इस बक बक में भी कितने सत्य छिपे हैं।

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

bilkul sahi bakbak me hi insan sahi baten kah deta hai.......badhai prerak post ko lane ke liye vyngya bahut kuchh sikha gayi ....

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

देख लिया हमने भी।

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत ही अच्छी पोस्ट

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत ही अच्छी पोस्ट

sanjeev said...

Archanaji Namaskar , aapki post padi, ye aam gharo ki sachhai hai, mughhe bhi shayad chaska lag raha hai blogpost padane ka,aur aap jariya hai , bahut bahut aabhar