Showing posts with label बाल कविता. Show all posts
Showing posts with label बाल कविता. Show all posts

Tuesday, April 25, 2017

छम -छम नाचे "नानी और मायरा"



कोयल बोले कुहू -कुहू ,मोर बोले पीहू -पीहू 

इधर-उधर की बातें करती चिड़िया बोले चूंचूंचूं 

यदि कोयल बोले पीहू-पीहू और मोर बोले कुहू-कुहू 

तो बोलो बच्चों क्या होगा?,क्या होगा भई क्या होगा ?

बेपेंदे का लोटा तो लुढ़केगा ही लुढ़केगा,

तो इसीलिये ------------

कोयल बोले कुहू -कुहू ,मोर बोले पीहू -पीहू 

इधर-उधर की बातें करती चिड़िया बोले चूंचूंचूं  ..... 



मुर्गा बोले कुकड़ू कूँ ,बोले कबूतर गुटरू गूँ 

दोनों दाना चुगकर खाते,पकड़ों होते-उड़नछू 

यदि मुर्गा बोले गुटरू गूँ और बोले कबूतर कुकड़ू कूँ 

तो बोलो बच्चों क्या होगा?,क्या होगा भई क्या होगा ?

बेपेंदे का लोटा तो लुढ़केगा ही लुढ़केगा,

तो इसीलिये ----------------

मुर्गा बोले कूकडू कूँ ,बोले कबूतर गुटरू गूँ 

दोनों दाना चुगकर खाते, पकड़ों होते-उड़नछू 



बाजे  पायलिया, गाए बाँसुरिया 

छम -छम नाचे "नानी - मायरा"

यदि बाजे पायलिया गाए बाँसुरिया 

ताल पे नाचे काली हिरनिया 

तो बोलो बच्चों क्या होगा?,क्या होगा भई क्या होगा ?

नाच न जाने आँगन टेढ़ा तो होगा ही होगा। ..  

तो इसीलिए ----------------

बोले पायलिया, बाजे बाँसुरिया 

छम -छम नाचे "नानी और मायरा"



Sunday, March 26, 2017

बाल कविता

मास्टरजी ने बच्चों को बुलाया
कक्षा में ये फरमान सुनाया
कल सबको विद्यालय अनिवार्य है आना
साथ में अपने एक हास्य कविता भी लाना
सुन कर मास्टरजी का ये फरमान
बबलू बाबा हो गए हैरान
चिंता से उनका सर भन्नाया
घर जा माँ को मास्टरजी का फरमान सुनाया
बोले - माँ कल जरूर से स्कूल जाना है
और साथ में हास्य कविता को भी ले जाना है
अब हो गई माँ परेशान
जानकर ये बहुत हुई हैरान!
कविता तो मिली ढेर सारी
सूरज ,फूलों,जानवरों वाली
कहीं बन्दर था कहीं था भालू
कहीं कद्दू और कहीं था आलू
तुकबंदी थी,भाष्य नहीं था
कविता मिली पर हास्य नहीं था,
तब माँ ने किया तकनीकी इस्तेमाल
फेसबुक पर स्टेटस ठेला और मंगवाया लिंकित ज्ञान
अब दोनों बैठे टकटकी लगाए
टिपण्णी ताकते,कि कोई कविता-
कविता में  हास्य लेकर आए
तभी मिला ये अद्भुत ज्ञान कि

अपनों संग जब समय बिताओ
हास्य से खुद सराबोर हो जाओ
अब बबलू से फूटी हास्य की झड़ी है
और हास्य कविता बबलू के मुंहबाएँ खड़ी है ...