Showing posts with label हिन्दी. Show all posts
Showing posts with label हिन्दी. Show all posts

Monday, May 17, 2010

आप भी कर सकते हैं ...............मुहावरों का प्रयोग.................बस थोडी सी कोशीश करके ....

आज मै बहुत खुश हो गई ....जब मेरी पोस्ट " दोनो में कौन बडा " मेरी बेटी सुन रही थी.............बाद मे उसने उस पर आई टिप्पणी पढना शुरू किया , और पहली ही पढकर वो हँसने लगी...........मैने पूछा क्या हुआ ?.............तो बस पेट पकड कर हँसती ही रही...................बोली आपकी पोस्ट से इस टिप्पणी का क्या लेना-देना?...........चूंकि वो कभी ब्लॉग पोस्ट नही पढती ......इसलिए उसका ये सवाल वाजिब था............तब मेरे दिमाग मे एक बात आई ...सोचा भविष्य मे ये बच्चे जो कुछ भी पढेंगे वो ज्यादातर इंटरनेट पर ही उपलब्ध होगा ..........उसके प्रश्न का उत्तर तो देना ही था ..... कहा-- जब मै दादी-नानी बनूँगी तो मेरे नाती-पोते तो हिन्दी इतना भी नहीं जानेंगे जितना तुम जानती हो........तब मै उन्हे ऐसे उदाहरण देकर मुहावरे समझाया करूंगी ................मेरे होने पर तुम्हारे लिए भी आसान होगा ...............
वो भला कैसे???उसका प्रश्न था
तब वो तुमसे कहानी सुनाने को कहेंगे तो मेरी पोस्ट से सुनवा देना ,साथ ही ऐसी टिप्पणी पढकर मुहावरा कहना इसे कहते हैं " बे-सिर-पैर की बातें करना "यानि जिसका वास्तविकता से कुछ लेना-देना हो ऐसी बात कहना ...
.......... ---

Monday, April 26, 2010

इस समस्या का हल सुझाएं.............


विशेष -----यह पोस्ट सिर्फ़ हिन्दी लेखन में होने वाली मात्रा संबंधित अशुध्दियों के बारे में है -------अगर हम हिन्दी का प्रसार चाहते हैं तो ..........

(वैसे तो अंग्रेजी शब्दों के जाने से इस हिन्दी को शुद्ध नहीं कहा जा सकता )पर फ़िर भी ...............

आज एक बात पूछना चाहती हूँ--------मेरी एक बुरी आदत के कारण इन दिनों मै परेशान हूँ..........ज्यादा तो मै पढती नहीं ........पर जितना भी पढती हूँ उसमें ----------जहाँ भी गलती देखी नहीं कि बस लगी सुधारने ......मान तो सब लेते हैं पर कभी -कभी सुधारते नहीं .................एक बारगी लगता भी है कि नहीं बताऊं..........किसी को बुरा लग सकता है ... पर अपनी इस आदत से लाचार हूँ .......वैसे मुझसे भी गलतियाँ होती रहती है ......(मुझे कोई बताता ही नहीं )....पर कोई गलती करे और हम देखते रहें ये भी तो ठीक नहीं ???

"
गलतियाँ मालूम हो जाने पर अपनी आदतें सुधार लेना चाहिए ऐसा मेरे बडों ने मुझे सिखाया है ..........इससे अपना विकास ही होता है "--------.(ये हर तरह से होने वाली गलतियों पर लागू होता है )......

एक चिन्ता भी लगी रहती है कि
ब्लॉग (ब्लॊग --इसे समीर जी की टिप्पणी से लेकर ठीक किया है ....)कैसे टाईप होगा ?नहीं मालूम ) तो दुनिया भर के लोग पढते हैं ........और.......... हिन्दी - लेखन में अगर अशुद्धियाँ होती हैं तो जिन्हें हिन्दी आती है, वे तो समझ लेते है पर जिन्हें नहीं आती वे उसी को सही मान लेते हैं.......................कभी -कभी तो मात्रा की अशुद्धियाँ होने पर अर्थ ही बदल जाता है। .......... ऐसे तो हिन्दी- लेखन भी अशुद्ध होते जाएगा ...................
तो मुझे बताईए क्या मै अशुद्धियाँ बताना जारी रखूँ या बन्द कर दूँ ?????