Thursday, August 22, 2013

सिक्के का दूसरा पहलू - एक कहानी

 संगीता जी को कौन नहीं जानता ...




आज यहाँ सहेज ली है मैंने संगीता पुरी जी के ब्लॉग गत्यात्मक चिंतन से उनकी लिखी कहानी          "सिक्के का दूसरा पहलू"

5 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (23-08-2013) को "ईश्वर तू ऐसा क्यों करता है" (शुक्रवारीय चर्चामंचःअंक-1346) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Girish Billore said...

बहुत उम्दा

Lalit Chahar said...

बहुत सुन्दर रचना @ हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} के शुभारंभ पर आप को आमंत्रित किया जाता है। कृपया पधारें आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |

Lalit Chahar said...

बहुत सुन्दर रचना @ हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} के शुभारंभ पर आप को आमंत्रित किया जाता है। कृपया पधारें आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |

प्रवीण पाण्डेय said...

कहानी सुनकर आनन्द आ गया, अपने घर की ही कहानी लगती है।