Friday, December 20, 2013

ठंड...

१)
ये सरसराहट
और
ठंड़ी हवा की
छुअन
बीते पल
याद दिलाती है...
क्योंकि
रजाई में दुबके ही
सुबह-सुबह
कहते थे तुम-
तू बड़ी अच्छी
चाय बनाती है........
-अर्चना

२)
कड़ाके की ठंड
और ठंड में ठिठुरते बच्चे
सड़कों पर ....
काश कि कभी
सूरज ले लेता
किराए का कमरा
इन दिनों
फ़ुटपाथ पर
धूप की रजाई
ओढ़ा देती माँ
काम पर जाने से पहले .....
-अर्चना


३)
फ़िर ठंड का मौसम आया है
बचपन की गलियों में घुमा गया है
सुबह देर से उठना
अपनी हथेलियों को रगड़ना
माँ के हाथ का बना स्वेटर
और पापा वाला मफ़लर
सुबह गरम जलेबी और पोहा
शाम को उबला दूध और मेवा
दादी की गरम रजाई में घुस जाना
और फ़िर उनसे राजा-रानी की कहानी सुनना
उफ़्फ़ कितना कुछ याद दिला गया है
फ़िर ठंड का मौसम आया है ...
-अर्चना

४)

ठंड के मौसम में
माँ का पकड़कर नहलाना
ना ना करते मेरा नहाना
और लपेट कर फ़र वाला तौलिया
भाग कर हल्की धूप में जाना
फ़िर मुँह और कान बन्द कर
बिना बदन पौंछे
घुटनों पर सर को दबाना
और दाँतों का किटकिटाना
याद आता है हर बार

ठंड के मौसम में ....
-अर्चना

12 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

ठंड में ठिठरते मन के भाव..

Ramakant Singh said...

अपने से बिछुड़ना और मीठी यादों को पुनर्जीवित कर उसे सांझा कर जी उठना अर्चना की जिजीविषा का ही कमाल हो सकता है
बेहतरीन

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

यहाँ तो ठण्ड नहीं वैसी, लेकिन तुम्हारी सारी कविताओं ने ठिठुरा दिया और साथ ही बचपन की और उन तमाम यादों की, जिनका तुमने ज़िक्र किया, गर्मी में गुनगुना एहसास भर दिया!! बहुत सुन्दर!!

vandana gupta said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

rahul misra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (22-12-2013) को "वो तुम ही थे....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1469" पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!!

- ई॰ राहुल मिश्रा

कालीपद प्रसाद said...

ठण्ड में इंसान ठिठुर सकता है भावनाएं नहीं -बहुत सुन्दर संस्मरण !
नई पोस्ट चाँदनी रात
नई पोस्ट मेरे सपनों का रामराज्य ( भाग २ )

Onkar said...

वाह, बहुत सुन्दर शब्द-चित्र

Reena Maurya said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। .....

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन भारत का सबसे गरीब मुख्यमंत्री और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Digamber Naswa said...

जिए ठण्ड का केनवस खड़ा कर दिया आंखों के सामने ...

yugal said...

सम्बन्धो की ऊष्मा में भीगी हुई,अच्छी रचनाये है,बधाई

yugal said...

सम्बन्धो की ऊष्मा में भीगी हुई,अच्छी रचनाये है,बधाई