Tuesday, January 6, 2015

तेरे हैं दो रूप.....

2 comments:

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 8-01-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1852 में दिया गया है
धन्यवाद

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

यह गीत सीधा दिल में उतर जाता है... तुमने भी बहुत मन से गाया है.. संगीत का साथ न होते हुए भी आवाज़ में जो असर है वह दिल को छू जाता है!! बहुत सुन्दर!! जीती रहो!