Friday, June 29, 2018

रेलयात्रा में चोरी,दानापुर,पटना,बिहार

बहुत दुखी मन से घटना लिख रही हूं,जो हुआ वो किसी के साथ न हो, जरूर कोई पुण्य आड़े आया होगा जो जान बची वरना चलती ट्रेन से एक महिला के गिरने की खबर भर होती मैं .......इस घटना ने बिहार के प्रति मेरे विश्वास की धज्जियां उड़ा दी ....
हुआ ये की मैं,भाभी,बेटी और मायरा के साथ मुम्बई-आसनसोल के ए सी थर्ड क्लास के बी वन कोच में सफर कर रहे थे ,खंडवा से पटना तक ....
पूरा सफर अच्छा रहा,आप सबसे शेयर भी करती रही मायरा की शैतानियां...
और सबसे अहं लाइव लोकेशन शेयर करने की जानकारी भी बातचीत के दौरान दी ...कुछ दोस्तों ने सीखा भी ...
दानापुर से गाड़ी धीमी हो गई,बीच में दो बार रूक भी गई पटना उतरने  वाले साथ के लोग दरवाजे पर आने लगे,हमने भी पूछा-आ गया क्या?जबाब मिला जी 5 मिनिट में,चूंकि हमारे साथ कोई पुरुष नहीं था ,हम अपना सामान गेट पर ले आये ,मायरा सो रही थी ,बेटी उसे गोद में लेकर पहले कंपार्टमेंट तक आ गई,अब मैं और भाभी बाहर थे AC के अपने बेग और हैंडबैग और पर्स के साथ,तभी हमारे साथ एक हादसा हो गया ,पटना उतरने से पहले एक चोर गिरोह से सामना हुआ... जान बची लाखों पाए समझिये
[वे 7-8 लोग थे 25 से 30 उम्र के,गेट पर सामान लेकर उतारने को तैयार खड़े थे हम,तभी अचानक दानापुर से धीमी चलती ट्रेन में वे आए हमें गेट से हटने को कहा, मुझे और भाभी को लगा उन्हें यहीं उतरना होगा तो हमने रास्ता दिया उन्होंने गेट खोल दिया मुझे आगे की ओर हटाया और हमारे 3 बेग जो रास्ते में थे उठाकर टॉयलेट के पैसेज में सरका दिए,3 लोग बेग के आगे खड़े हो गए हमें बेग दिखाई नहीं दे रहे थे तभी मैंने पूछा यहीं उतरना है क्या ,वे बोले पटना ,तो मैने कहा जब हमें भी यहीं उतरना है तो क्या फर्क पड़ता है आप पहले उतरें या हम ?अगर हम ही उतर जाते तो क्या होता ,हम तो यहां के मेहमान हैं,आप तो यहीं के लोग हैं, वे पीछे हट गए...साथ की महिला को भी आगे निकाल दिया ,
इस बीच मैं भाभी से कहती रही कि हमारे बेग दिख नहीं रहे, हमारे साथ आये एक दंपत्ति भी वहीं उतरने वाले थे उनमें से पुरुष ने कहा आप टेंशन न लें मैं आपके बेग दे दूंगा ,लेकिन तब बेग उन्हें भी न दिख रहे होंगे उनका भी एक बेग सरकाया था...
. इस बीच उनमें से एक ने पूछा आप कहाँ से आये?मैंने एम.पी. बताया ,बोले यहाँ? मैंने कहा यहाँ की बेटी है हमारी बहू,बल्कि अब बेटी ही है बहू क्या?..उसने हमारा एक बेग वापस आगे की ओर करके रख दिया
पूछे -होटल वगैरह में रूकियेगा? मैंने कहा-नहीं घर है..
तभी भाभी ने कहा-अब हमारे बेग आपने पीछे किये तो आप ही मदद कीजियेगा उतारने में ...जी..जी.. जबाब मिला .. तभी अंदर की ओर से 2 लड़के आये हमें क्रॉस कर दूसरी ओर जाने को हमने उनसे कहा-आप अभी वहीं रुकिए जगह नहीं है बाद में जाईयेगा, इतनी बातचीत सुन बेटी भी मायरा को गोद में लेकर बाहर आ गई, तब इधर के वे 3 लड़के जो पीछे टॉयलेट की ओर थे आगे निकलकर AC कोच के अंदर दूसरे गेट की तरफ हमें किसी तरह क्रॉस करते चले गए ,अब इधर जगह बन जाने से आगे वाले 1 को छोड़ बाकि 2 भी AC कोच के दूसरे गेट की ओर चले गए , जैसे ही ट्रेन रूकने को हुई पहला वाला भी तेजी से अंदर चला गया, हमें आश्चर्य हुआ ,मैंने कहा -जब यहां से उतरना ही नहीं था तो बेग इधर उधर हड़बड़ी क्यों मचाई ? ट्रेन अभी भी धीमी थी  तभी ये सुनकर एक अन्य लड़का जो था बिहार का था भोपाल में जॉब कर रहा था हमारा सहयात्री बोला यही होता है यहां आकर ट्रेन भी लेट होती है ...मैंने कहा यही बेसिक फर्क है,हमारे इधर अगर मदद का कहा तो बिना उतारे नहीं जाते लोग वो बोला जी बिलकुल यही अनुभव हुआ है ,साथ के दंपत्ति जो इंदौर से बाढ़ जॉब के लिए आये थे उन्होंने भी हामी भरी और इतने में ट्रेन प्लेटफार्म पर रुकी, हम उतरे जो हमारे सहयात्री थे उन्होंने हमारे बेग हाथ में पकड़ाए ..

हमें रिसीव करने आये भाई साहब सामने ही खड़े थे हालांकि पहली बार मिल रहे थे लेकिन पल्लवी को देखते हुए ही "रानू" कह आगे आ गए  हम उनके साथ निकल आये बाहर ...

हमें तो घटना का पता घर आकर लगा,बेग से सामान चोरी हो गया,
बेग बाहर से वैसे ही थे,बंद ,बल्कि मेरे बेग में ताला भी लगा था
लेकिन जब ताला खोला तो सारे कपड़े अस्त व्यस्त
ऊपर - नीचे और ढक्कन के साइड की जाली फटी हुई,उस ओर रखे गिफ्ट के खाली लिफाफे भी कपड़ों की तरफ ढूंसे हुए,कपड़े भी गोल- गोल रोल कर ढूंसे हुए
सिर्फ एक साड़ी जो मैंने नेहा के लिए गिफ्ट करने को ली ,वो गायब, जो ऊपर रखी थी, बाकी कुछ नहीं गया
,लेकिन जो सामान मेरे बेग में था वो पल्लवी के बेग से निकला
[😰😰😰 पैसे कार्ड सब हमारे साथ पर्स में थे तो बच गए ,शायद उन दो पुरुषों की वजह से हमारे पर्स छीनने की कोशिश नहीं की वरना हमें धकेलते हुए खुले गेट से बाहर फेंक देते .. बस यही हो सकता था मैं गेट पर ही थी 🙄 और अखबार की खबर आप पढ़ रहे होते अगले दिन ....😢

कहाँ और कैसे हुआ होगा सोचते ही पूरा घटनाक्रम आंखों में घूम गया उनमें से 3 के चेहरे अब भी दिख रहे हैं,स्कैच बनाने की कोशिश भी करूँगी ...😊

आप सबको बताकर हल्का हो जाऊंगी सोचकर संस्मरण लिखा ही दिया 🙌😘 कोशिश में हूँ संयत होने की.... दहशत के कारण नींद नहीं आई  है,सो ... तकलीफ हो रही है,मायरा के भविष्य को लेकर भी चिंतित हूँ....
जान बची लाखों पाए ...यहां चरितार्थ हुआ ,

लौट के बुद्धू घर को आये की कहानी भी इसी यात्रा में हुई तो उसे भी लिखूंगी ....आपको पोस्ट पढ़कर दुख हुआ होगा तो खुश करने का जिम्मा भी मेरा होगा ,बताऊँगी रेलवे के कारण हद्द की हद्द की भी कहानी ....👍👍👍थ्री चियर्स फ़ॉर #स्त्रीसुरक्षा और #रेलवे #दानापुरपटना...

8 comments:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

एक बहुत पुरानी घटना याद आ गयी! उसका ज़िक्र पहले भी किया है. तुम्हारे साथ जो भी हुआ उसका बेहद अफ़सोस है. मुझसे लोग पूछते थे कि दिल्ली से पटना कितने घण्टों का सफ़र है, तो मेरा जवाब होता था कि दिल्ली से दानापुर तक 12 घण्टे और दानापुर से पटना का भी इतना ही रख लो!
क्यों? कितने स्टेशन हैं दानापुर और पटना के बीच! तो मैं कहता - स्टेशन तो बस एक है फुलवारी शरीफ़, लेकिन स्टॉपेज बहुत से हैं!
इस तरह की घटना दानापुर के पास नहीं सुनी, बक्सर के पास कई बार सुना है, हमारे साथ भी हुआ है. लेकिन फिर भी इस घटना को बिहार से जोड़कर देखना मुझे अभी भी उचित नहीं लगता. इससे पहले भी तुम कई बार पटना आ जा चुकी हो! ऐसा पहले तो नहीं हुआ.
बेंगलुरु जाते समय विजयवाड़ा स्टेशन पर सारे यात्रियों में खलबली मच गयी कि जूते चप्पल बचाओ, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आंध्रप्रदेश के लोग चप्पल चोर हैं!
रेलवे स्टेशन के आसपास जो गिरोह सक्रिय होते हैं, उनका तरीका पूरे देश में एक जैसा होता है और इस एक घटना से किसी प्रदेश की छवि नहीं बनती! जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था, जो हुआ वो बुरा हुआ, जो हुआ वो टल सकता था, लेकिन फिर भी हुआ और बिहार में हुआ, इसलिए पूरे बिहार के प्रतिनिधि के रूप में तुमसे क्षमा माँगता हूँ.

Usha Kiran said...

अर्चना जी...खुद को शांत करिए...ट्रॉमा से बाहर आइए...आप सब सकुशल हैं...और क्या चाहिए...ईश्वर का धन्यवाद 🙏

SKT said...

एक साड़ी का नुक़सान, एक पोस्ट का नफा.....इसे एकदुर्घटना समझ भूलने की कोशिश करें। सावधान रहें!

Kajal Kumar said...

यही हाल कानपुर का भी है

vibha rani Shrivastava said...

मैं बिहारी हूँ , मुझसे मिलना तो अब आप चाहेंगी ही नहीं... मिलने की इच्छा वर्षों से है... 09162420798 गर मिलना चाहें तो...

देवेन्द्र पाण्डेय said...

हम्म। दुखद है। ऐसा बिहार में ही नहीं होता। हम रोज के यात्री अक्सर इसी घटनाओं से रूबरू होते रहते हैं। अभी चार दिन पहले की बात है। जौनपुर सिटी स्टेशन से ज्यों ही गाड़ी आगे बढी एक रोज के यात्री के हाथ में जोरदार डंडा पड़ा। मोबाइल चला रहा था। मोबाइल गिरी और मारने वाला भाग गया। बाद में चेन पुलिंग भी हुई, चोर को दौड़ाया भी गया लेकिन वो भाग गया। साथी के हाथ में जोरदार चोट लगी है। हड्डी नहीं टूटी बस।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

हमारे यहाँ झाँसी के आसपास अक्सर चोरी की शंकाएँ जताई जातीं हैं हालांकि ऐसा अभीतक तो नहीं हुआ . वास्तव में ऐसा कहीं भी हो सकता है .कुछ अपनी असावधानी भी हो सकती है जैसे दो साल पहले इटारसी पर कुछ गड़बड़ होजाने के कारण ट्रेन सूरत रतलाम कोटा होती हुई दिल्ली गई थी . कोटा रतलाम के बीच एक आदमी पानी की चार पाँच बोतलें थामे आया। मुझे पानी की जरूरण थी .मेरे पास सौ का नोट था वह बोला -मैडम चेंज कराके लाता हूँ तब तक ये बोतलें यही रखी हैं वह पाँ बोतलें छोड़कर जो गया तो लौटा नहीं. मैने सोचा कोई बात नहीं . पाँच बोतलें तो हैं ही सफर के लिये काफी है तभी एक सहयात्री बोला मैडम बोतल पैक्ड हैं कि नहीं . मैंने देखा ढक्कन सचमुच पैक नहीं थे पानी ठण्डा भी नहीं था . वह यहीं कहीं से पानी भरकर मुझे टीप गया था सौ रुपए बनाकर .लोग होते हैं ऐसे भी पर यहाँ गलती मेरी थी .तब मुझे एक नया पाठ मिला .तुम्हें भी मिला है . ज्यादा
मत सोचो . पोस्ट भी काफी हड़बड़ाहट में लिखी गई लग रही है .

ghughuti basuti said...

दुखद.देखा जाए तो सस्ते में निपट गईं आप लोग. अपने बारे में अधिक जानकारी देना भी खतरनाक है. ध्यान रखिए.