Monday, June 24, 2019

आईये मेहरबान ...

बहुत दिनों से ब्लॉग पर कुछ नहीं लिखा....
ऐसा नहीं है कि लिखने को कुछ नहीं बल्कि लिखने को  बहुत कुछ ऐसा है कि हाथ कलम तो उठाते हैं पर मन का नरम कोना जाने दो यार कहके रोक देता है ....कुछ कड़वी बातें बाहर न आये और लेखनी अपने सरल रास्ते से न भटके इसलिए ठहराव जरूरी लगता है मेरे लिए मुझे लेकिन आप सबको आज से फिर ब्लॉग बुलेटिन ब्लॉग लेखन की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत हुआ है,तो सोचिए मत  आईए और लिखिए ब्लॉग पर अपने और अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए ....

7 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (26-06-2019) को "करो पश्चिमी पथ का त्याग" (चर्चा अंक- 3378) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Sagar said...

मैंने अभी आपका ब्लॉग पढ़ा है, यह बहुत ही ज्ञानवर्धक और मददगार है।
मैं भी ब्लॉगर हूँ
मेरे ब्लॉग पर जाने के लिए यहां क्लिक करें (आयुर्वेदिक इलाज)

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

सच कहा अर्चना . लिखने को बहुत कुछ है पर उसकी गहराई में उतरने से हम कतराने लगे हैं यह लेखन के लिये बहुत नुक्सानदेह है . मैं भी फिर कोशिश करने की सोच रही हूँ यहाँ पढ़कर .

सु-मन (Suman Kapoor) said...

सही कहा

Onkar said...

सच कहा

Arshia Ali said...

Bahut sundar. Ye shama jalti rahe.
Shayad ye bhi apko pasand aayen- Dry farming in india, Salkhan fossil park

Misha Jane said...

ati sunder dhanywaad


You may like - Dream to Become a Credible Blogger? Let’s Find Out How to be One