न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
Tuesday, August 17, 2010
एक युगल गीत -------समीरलाल (उडनतश्तरी वाले ) के साथ-------एक नया (अभिनव )प्रयोग
आभार समीर जी का !!! जो उन्होंने (मेरे साथ) युगल गीत गाया -------
14 comments:
बेशक अभिनव
बधाई समीर जी और आप को
झूम झूम गया... मुग्ध हो गया इस जुगलबंदी पर..
यह प्रयोग बहुत सफल रहा!
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जुगलबन्दी सुनकर मन प्रसन्न हो गया!
आनन्द तो मुझे भी बहुत आया..अभिनव प्रयोग रहा.
मुग्ध हो गया इस जुगलबंदी पर..
बहुत खूब! समीरलाल के स्वर में सुना था। अब आपको गाते हुये सुना तो और अच्छा लगा। बहुत सुन्दर!
अतिसुन्दर!!!!! मनमोहक, मनभावन!! :)
ये अभिनव प्रयोग बहुत ही सफल रहा..
jugalbandi bahut sundar
सुर का गुरुत्व और कविता की सुरीली शहनाई। मज़ा आ गया।
बहुत ख़ूब... आप और समीर जी को बधाई
चंचल नदी की नटखट धारा सा सुर अर्चनाजी का
भेद भरे गहरे सागर का गांभीर्य लिए स्वर समीरजी का
बेहद खूबसूरत प्रयोग...
अभिनव प्रयोग. ऐसी और पोस्टों का इंतज़ार है।
waah ...bahut sundar prayog ....
badhaii evam shubhkamnayen ...!!
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