Monday, December 19, 2011

मेरे दो अनमोल रतन ..

अरे कब बड़े हो गए पता ही नहीं चला ......
 
देखो तो जरा ----वही हैं ये ..... 

9 comments:

रश्मि प्रभा... said...

aise hi bade ho jate hain ... jane kab aur dheere dheere hum chhote ho jate hain , hai n ?

प्रवीण पाण्डेय said...

आपके गर्व को अनुभव कर रहा हूँ।

Rahul Singh said...

अब तो दो के चार होने की तैयारी है, शायद.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

फेसबुक वाला ही कमेन्ट यहाँ भी कर रहा हूँ... अपने चश्मे का नंबर चेक करवा लो, बच्चे कभी बड़े नहीं होते!! न माँ की नज़रों में - न माँ-माँ (मामा) की नज़रों में!!!
:)

anju(anu) choudhary said...

खुशी के पल ...छोटे बच्चे हो या बडे ...वो पल वैसे ही रहेंगे

Rakesh Kumar said...

बच्चों की मासूम छवि में प्रभु नजर आते हैं.
आपके पोता पोते हैं या धेवता धेवती.
फोटो अच्छी लगी.

आप मेर ब्लॉग पर क्यूँ नही आतीं हैं अर्चना जी.

मनोज कुमार said...

शुभकामनाएं और आशीष।

संजय भास्कर said...

शुभकामनाएं शुभकामनाएं शुभकामनाएं शुभकामनाएं

देवेन्द्र पाण्डेय said...

इस पोस्ट को देख अपने ही गीत की दो लाइन याद आ रही है...

माँ के आँचल में छुप जाना
घुटनों के बल चलते-चलते
बचपन था एक खेल सुहाना
कहीं खो गया चलते-चलते।