न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,न ही किसी कविता के---,और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,लिख देती हूँ "मेरे मन की"-----
Thursday, June 7, 2012
चंदा की डोली...
सब कुछ भुला देती है,
सपने सजा देती है,
ये चंदा की डोली ...
7 comments:
☺☺☺
:):)
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी लगाई जा रही है!
सूचनार्थ!
अहा..
bahut badiya
बहुत सुन्दर .. कर्णप्रिय
खुबसूरत कर्णप्रिय
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