Thursday, June 7, 2012

चंदा की डोली...

सब कुछ भुला देती है,
सपने सजा देती है,
 ये चंदा की डोली ...


 



7 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

☺☺☺

Mukesh Kumar Sinha said...

:):)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी लगाई जा रही है!
सूचनार्थ!

प्रवीण पाण्डेय said...

अहा..

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut badiya

M VERMA said...

बहुत सुन्दर .. कर्णप्रिय

Ramakant Singh said...

खुबसूरत कर्णप्रिय