Sunday, February 22, 2009

सबकी माँ

तीन----
सबकी माँ,
हाँ भाई हाँ,
माँ तो माँ,
बोले कभी - ना,
दिल पुकारे गा-
उई-माँ,उई-माँ,
मन को गयी भा,
उनको भी दो ला,
जिनकी ना हो माँ,
खुश हों वो भी पा,
जीवन भर करे--हा,हा,हा।

5 comments:

Udan Tashtari said...

माँ तो माँ है....उससे बड़ी कोई पूँजी नहीं.

प्रशांत मलिक said...

:-)
achhi rachna hai

परमजीत बाली said...

बहुत सही।अच्छी रचना है।

Archana said...

समीर जी,प्रशांत जी,बाली जी धन्यवाद टिप्पणी के लिये।

Archana said...
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