Tuesday, February 24, 2009

समझा क्या ?????

ईश्वर ने हर किसी ,को कोई काम दिया है ,
अगर काम ठीक से किया, तो फ़िर नाम दिया है |
पेडो से कहा है -देना ,
पक्षियों से -गाना |
पर्वत को कहा- खड़े रहना,
नदियों को कहा- बहना |
चाँद को कहा- ठंडक देना ,
सूरज को - चमकना |
हवा से कहा- संभलकर चलना,
बादल से - बरसना ,
धरती से कहा -सबको समेट लेना ,
आसमान से -ढकना|
फूलो को कहा- सुगंध बिखेरना ,
बच्चों को कहा- हँसना |
नर को कहा-संभालना ,
नारी को कहा - सहना |
मैंने अब तक ऐसा समझा, है तुझे ये बताना ,
अगर तू इसे समझा हो तो ,औरो को भी बताना |
चप्पे-चप्पे पर रहने वाले का नाम लिखा है ,
और दाने-दाने पर खाने वाले का नाम लिखा है|
खुदा ने अपनी हर एक चीज पर ,
बन्दे के लिए कोई न कोई पैगाम लिखा है |

5 comments:

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

सरल शब्दों में बड़ी अच्छी कविता
बधाई, अर्चना जी !!

MANVINDER BHIMBER said...

ईश्वर ने हर किसी ,को कोई काम दिया है ,
अगर काम ठीक से किया, तो फ़िर नाम दिया है |
पेडो से कहा है -देना ,
पक्षियों से -गाना |
पर्वत को कहा- खड़े रहना,
नदियों को कहा- बहना |
चाँद को कहा- ठंडक देना ,
सूरज को - चमकना..... बड़ी अच्छी कविता

संगीता पुरी said...

बहुत सही विचार....सुंदर ढंग से लिखा !!

Archana said...

धन्यवाद,सतीश जी,मनविन्दर जी,एवं संगीता जी हौसला अफ़जाई के लिये।

परमजीत बाली said...

रचना के बहुत सुन्दर भाव है।बधाई।