Friday, March 6, 2009

अम्मार --- एक श्रद्धांजली

मै आज बहुत ही दुखी हूँ घर में कोई नही है भतीजी जो मेरे पास रह कर पढ रही है , होली की छुट्टियाँ होनेसे मम्मी के पास चली गई है मन बहुत ही घबरा रहा है , किससे कहूँ ? और क्या ? इसलिये सोचा यहीं लिखूँशायद मन हल्का हो जाये ।आज एक ऐसा हादसा हो गया जिसका सामना ग्यारह साल मे पहली बार करना पडाहै ऐसा नही है कि ये हादसा नया हो , आये दिन इसके बारे मे पढने-सुनने मे आता रहता है ।शायद ही कोईशहर इससे अछूता हो।
सुबह रोज की तरह स्कूल पहूँचे थे हम सब स्कूल बस से हँस -हँस कर सभी बच्चो अन्य सहयोगियो से
मिलना हुआ। आज ८वी,९वी,११वी के बच्चो का आखरी पेपर था अपेक्षाक्रत सरल पेपर (हिन्दी) सब बच्चेबहुत ही खुश थे , त्योहार से पहले परिक्षाएं निपट जाने से आपस मे मिलकर बच्चे होली खेलने की प्लानिंगकर रहे थे कुल मिलाकर माहौल बहुत ही खुशनुमा था , मौसम मे भी अछ्छी ठंडक थी। तभी प्रार्थना की घंटीबजी , बच्चे लाईन मे खडे हुए ,१२वी कक्षा का भी (बोर्ड एक्जाम) पेपर था , रोज की तरह सभी बच्चॊ को "बेस्टऒफ़ लक" कहा गया। प्रार्थना शुरू हुई ,खतम हुई , बच्चे कतार में कक्षा मे जा ही रहे थे कि एक शिक्षीकाघबराई हुई सी प्रिन्सीपल मेडम के पास आई उसने उनके कान मे कुछ कहा।फ़िर क्या कहा जानने की जिज्ञासामे मै जल्दी-जल्दी उनके आफ़िस की ओर गई। रिसेप्स्निस्ट बाहर ही मिल गई , पूछा , और जो कुछ उसनेकहा-- सुनकर होश ही उड गए एक साथी शिक्षक (सर) ने फ़ोन पर खबर की थी---"मेडम यहाँ एक्सीडेन्ट होगया है, करीब २०० मीटर फ़ासले पर ,अपने स्कूल के बच्चे हैं।जल्दी किसी को भेजिए।" सब घबरा गये थे, क्याहुआ होगा ? , तब तक ये जानने के लिये कि कौनसा बच्चा होगा , फ़िर से सर को फ़ोन लगाने की कोशीश कीगई, स्कूल का फ़ोन लग पाने के कारण एक शिक्षीका ने अपने मोबाईल से लगाया -- सर कौनसा बच्चा है ? ---"अम्मार" ८वी क्लास जबाब सुनकर वो वहीं गिर पडी (वो बच्चा उन्हीं की बहन का इक्लौता बेटा था,जिसेअपने स्कूल मे २साल पहले ही प्रवेश करवाया था उन्होंने)
सभी लोग दौडकर घटनास्थ्ल पर पहूचे थे ।किसी दुसरे स्कूल की बस का पिछ्ला पहिया उसके सर पर से चलागया था ,घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई थी।
घटना के प्रत्यक्शदर्शी वे सर जब १२ बजे सारी कार्यवाही निपटाकर स्कूल पहूँचे उनसे जो जानकारी मिली----
"एक सेकंड के अंदर सब कुछ मेरे सामने ही खतम हो गया, मै उनसे कुछ मीटर की ही दूरी पर था ,तेज गती सेआती बस ने टक्कर मारी ,एक खट की आवाज आई ,मुझे भी उसने कट मारी ,मै जोर से चिल्लाया,वो नहीरूका, मैने वापस सामने देखा तो ये लोग गिरे हुए थे और वो बच्चा!!!!!, आगे वो बोल नही पाए सिर्फ़ आँसूनिकल पडे। -----फ़िर?---- मै उतरा ,आस-पास के लोगो को रोका,
कोई रुकने को ही तैयार नहीथा,(सब सोचते है पुलिस के पचडे मे कौन पडे?) एक बच्चा जो घायल था बेहोश हो चुका था ,मैने उसे उठाकरहिलाया ,साँस चल रही थी ,फ़िर उसे देखा जो गाडी चला रहा था , उसके पैर मे चोट लगी थी वो उठ नही पा रहाथा ,वो घर फ़ोन लगाने की कोशीश कर रहा था। मैने फ़ोन लिया और कहा-आप जल्दी से इस जगह जाईयेएक्सीडेंट हुआ है ,फ़िर स्कूल और कन्ट्रोल रूम फ़ोन किया
"चूँकि वे चश्मदीद थे इसलिये अस्पताल पोस्ट्मार्टम और थाने रिपोर्ट के लिए गए ,थाने मे उनका अनुभव भीकडवा ही रहा इस थाने का केस नही है वहाँ जाओ वहाँ गए तो- वहाँ गाडी का नम्बर क्यो नही देखा ?
( जबकी घायलो को देखना ज्यादा जरूरी था)
बाद मे अन्य बातें भी पता चली -- रोज उनके पापा मारूती वेन मे छोडने आते थे , आज ही वे दूकान चले गये, दूसरा भाई भी घर पर नही था, इसलिये अपने कजिन के साथ बाईक पर भेजा था , पापा ही सबसे पहले पहूँचेघटनास्थल पर।,एक और छोटी बहन है , देखो उसकी मौत उसे यहाँ खींच लाई , मिनट का ही रास्ता बचाथा, होनी को कौन टाल सकता है , पता नही क्या-क्या सोचा होगा उसने !, कितने प्यार से निकला होगा माँ कोबाय करके ! बस इस जैसी ढेर सारी बातें !!!!!!
और "अम्मार" कितना प्यारा बच्चा था वो--- किसी से कुछ लेन-देना नही ,अपने काम से काम रखने वाला।हमेशा हँसते रहता था।
एक स्पोर्ट टीचर के अनुसार---"कल ही मैने उससे पूछा था--- और ? परीक्षा खतम?----हाँ सर ,--(खुश होकरबोला था), मै हमेशा मजाक किया करता था उसके साथ --- शेख अम्मार बोलूँ या अम्मार शेख? जबाब देता - कुछ भी कह लिजीए आप को जो अछ्छा लगे। मैने उसके कंधे मसलते हुए उसे गुदगुदी करते हुए पूछा था--- और आगे के बारे मे कुछ सोचा है ? ----क्या?---- मतलब बडे होकर क्या बनना है?--- हँसते हुए जबाब दियाथा --- "पायलेट"
बाद मे स्कूल का आज हाफ़ डे कर दिया गया।(कल भी छुट्टी रखी है) हम सब टीचर उसके घर गये बहुतशान्त लेटा था वो--------
बस
उसे एक नजर देख कर आँखे मुंदकर ईश्वर से प्रार्थना ही कर पाई मै "हे ईश्वर इस बच्चे की आत्मा को शांतिदेना और इसके परिवार वालो को इस सदमे को सहने की शक्ती।"
और जो दूसरा बच्चा था ( ५वी कक्षा )--- चोट तो ज्यादा नही आई मगर सदमे से बेहोश था अस्पताल मे तबतक
और इस सबके बाद जो प्रश्न दिमाग मे घूम रहे है वो---
क्या बसवाले को रूकना नही चाहीए था?, आखिर वो भी किसी स्कूल की बस का ही ड्राईवर था। क्या बच्चों से उसे कोई लगाव नही रहा होगा?, स्कूल बसों की गति पर नियंत्रण जरूरी नही है? रास्ते मे आने-जाने वाले मदद के लिए क्यो नही रूकते? क्या रूकने के लिये किसी अपने के साथ ही दुर्घटना घटनी चाहिए ? और क्या ईश्वर को भी अछ्छे लोगो को ले जाने की जल्दी रहती है?
एक जरा सी भूल ने कितना कुछ तबाह कर दिया। अगर एक क्षण का ही जीवन है तो इतनी भागदौड क्यों?????

4 comments:

संगीता पुरी said...

पढकर रूलाई आ गयी ... इस दुनिया का सच .... अब बस यही कह सकती हूं कि ... "हे ईश्वर इस बच्चे की आत्मा को शांति देना और इसके परिवार वालो को इस सदमे को सहने की शक्ती।"

Mired Mirage said...

बहुत दुखद घटना बताई है। पढ़कर ही मन दुखी हो गया। परिवार पर ना जाने क्या बीत रही होगी।
घुघूती बासूती

सागर नाहर said...

सचमुच पढ़ कर मन दु:खी हो गया। एक बच्चा जिसके माता पिता ने उससे क्या क्या सपने सोचे होंगे? कैसे एक पिता ने अपने बच्चे को सुपुर्द-ए-खा़क किया होगा।
एक ही सैकण्ड में सब खत्म...
अल्लाह अम्मार की रूह को सूकून बख्शे...

॥दस्तक॥
गीतों की महफिल
तकनीकी दस्तक

एस.एम.मासूम said...

ऐसे मैं क्या कहा जाए समझ नहीं आता बस यह की अल्लाह सब्र दे. अर्चना जी आप ने बहुत ही सलीके से इस घटना को बताया है.. आप का शुक्रिया.. हम सब को इस से नसीहत भी लेनी चाहिए..
उस परिवार के बारे मैं सोंच के ही मन दुखी हो गया..