Tuesday, March 24, 2009

यादें ----कुछ खट्टी----कुछ मीठी

उन्मुक्त जी ने अपने चिठ्ठे मे "जीना इसी का नाम है" नामक पोस्ट मे " रिश्तों "पर आधारित श्रंखला का जिक्र किया है -----हमारी जिन्दगी मे कई तरह के रिश्ते बनते -बिगड्ते रहते हैं ------ये रिश्ते खून के भी हो सकते है, भावनाओं के भी ,जाने-पहचाने भी और अनजाने भी ----ये वे रिश्ते है जिन्हे भुलाए नही भूल पाती मैं---------ऐसे ही रिश्तों की कहानी कडी दर कडी आपके सामने रखना चाहती हूँ----- ज्यादा लिखना मै जानती नहीं इसलिए भाषा बोलचाल वाली ही हो सकती है , यादों को एक क्रम में जमाना बहुत मुश्किल है इसलिए घटनाएँ जिस क्रम में याद आती जाएंगी ,लिखती जाउंगी ।-----------
आज पहली कडी--------

स्पोर्ट्स टीचर होने के कारण मेरा ज्यादातर समय खेल के मैदान में ही बीतता है । पिछले साल की बात है --- दो दिनों तक एक ९ - १० साल का एक बच्चा साफ़ - सुथरा , सफ़ेद कुर्ता-पजामा पहन कर , सिर में तेल लगाकर , अच्छे से बाल बनाकर मैदान के एक कोने मे खडा होकर मेरे स्कूल के हमउम्र बच्चों को फ़ुटबाल खेलते हुए देखा करता था । मेरा ध्यान पूरा समय उस बच्चे की हरकतों पर रहता था । बच्चों के बाल को जोर से मारने पर वह जोर से ताली बजाता , और चूक जाने पर उतनी ही जोर से हँस देता । उस दिन कुछ ऐसा हुआ----- मैदान मे ६ठी कक्षा का गेम्स पिरियड चल रहा था , लडकियों को रस्सी खेलने के लिए देकर मै लडकों को फ़ुटबाल खिला रही थी । वह बच्चा रोज की तरह आकर अपनी जगह पर खडा हो गया था , मैने उसे एक नजर देख लिया था , तभी मुझे पीछे से धीमी-धीमी सी आवाज सुनाई दी -----
---मेडम जीईईई-----------मेडमजीईई
---मैने मुडकर देखा ----वह बच्चा मेरे बहुत पास आ गया था । मैने पूछा----क्या है ?--------
---ये स्कूल कौनसी कक्षा तक है ?
---मुझे उसकी उत्सुकता देखकर हैरानी हुई ,मैने कहा-----ट्वेल्थ ( अंग्रेजी शब्द जबान पर जो चढ चुके है ), फ़िर कुछ संभलकर कहा----१२वीं ,---मैने पूछा क्यों ?
----अगर मै इसमे पढना चाहूँ तो मुझे यहाँ पढाएंगे ?
----यह सुनकर मेरी जो हालत हुई मै बयाँ नहीं कर पा रही हूँ ---------मुझे एक ही समय में जहाँ खुशी हो रही थी कि वो बच्चा कितनी उम्मीद से एक बडे अंग्रेजी स्कूल में पढना चाहता था, वही रोना भी आ गया था कि मेरे पास उसके इस प्रश्न का कोई उत्तर नही था । इस हालात को टालने के लिए मैने उससे पूछा था------- आप स्कूल जाते हो ?-------खुश होकर बोला------- हाँ !!!!!------- कौनसी कक्षा में पढते हो ? ------------
--------तीसरी--------मैने फ़िर पूछा कहाँ रहते हो ?--------उसने सडक के किनारे बने एक तम्बू की ओर इशारा करके बताया -----वहाँ ।-------मैने चौंकते हुए तम्बू की ओर देखा -----वो हर शहर मे सडकों के किनारे लगने वाला आयुर्वेदिक जडी-बूटीयों की दवाई बेचने वाला एक तम्बू था ।--------अब मुझे और उत्सुकता जागी------ पूछा ----और कौन रहता है आपके साथ ?-----------माँ , पिताजी और छोटा भाई।
------------कहाँ से आए हो ?(मेरा अगला सवाल था )-------- अपने गाँव से---- ( वह शहर व राज्य को शायद समझ नही पाया था ) --------यहाँ कैसे आये ?---------पिताजी अलग -अलग गाँव मे जाकर दवाई बेचते हैं , यहाँ भी दवाई बेचने के लिए आए हैं ।--------- ऐसे घुमते रहते हो तो स्कूल कब जाते हो ?------- जब हमारे गाँव में वापस जाते हैं तो मै फ़िर स्कूल जाता हूँ ।-------और बाकी समय ?------मैं अपनी किताबें साथ मे लेकर आता हूँ ।----------------( अब मेरे आश्चर्य का ठीकाना नही रहा ) तुम्हे यहाँ कौन पढाता है ?
------पिताजी ।--------तुम्हे पहाडे आते है ?-------हाँ १५ तक ।------मैने उससे कहा अगर वो अपनी कोपी लेकर आएगा तो मै उसे यही पर पढा दूँगी ।------बहुत खुश हो गया था वो ----- तभी बाल उसके पास आ गई ------उसने धीरे से उसे मार दिया , और मुस्कराकर मेरी ओर देखा ,फ़िर पास आकर पूछा-----मैं एक बार खेल सकता हूँ ?------- मैने तुरंत हाँ कर दी ।(शायद ये मेरे बस मे था ,मुझे खुशी हुई कि मै उसकी एक इच्छा पूरी कर पा रही थी ) मैने सभी बच्चों को फ़िर से इकठ्ठा किया और एक टीम में उसे रख दिया -----उसने अपनी टूटी-सी चप्पल उतार दी और हँसते हुए कहा----बहुत जोर से मारता हूँ मै ।----ये बच्चे तो पकड ही नही पाएंगे ।----- और सच में वह बहुत अच्छा खेला । बच्चे भी उसके साथ इस तरह से मिलकर खेले कि लगा ही नही कि व अपने स्कूल का बच्चा नहीं था । तभी घंटी बज गई । और स्कूल की छुट्टी हो गई , मैने उसे अगले दिन कोपी लाने का याद दिलाया । उसने हँसकर हाँ कहा------ उस दिन उस बच्चे की आँखों मे जो चमक देखी थी आज भी मुझे याद है ------
दूसरे दिन रविवार था । सोमवार को स्कूल के मैदान में जाते ही मेरी नजरें उसे ढूँढ रही थी -------वह बच्चा मुझे कहीं नजर नहीं आ रहा था ------ थोडा आगे आकर तम्बू वाली जगह पर देखा -----जगह खाली थी , वे जा चुके थे । बहुत उदास -सी रही मै उस दिन -------उस एक पिरियड के ३० मिनिट के छोटे से समय मे उसने मुझसे एक रिश्ता बना लिया था जिसका कोई नाम नही हो सकता । आज भी मैदान में जाते ही बरबस सबसे पहले उसकी याद आती है ---------मैं रोज ईश्वर से उसके लिए दुआ करती हूँ------- वो जहाँ भी हो ईश्वर उसकी मदद जरूर करे !!!! और उसे एक अच्छा इंसान बनाए !!!!!!

एक गीत का मुखडा याद रहा है-----हर खुशी हो वहाँ तू जहाँ भी रहे ,जिन्दगी हो वहाँ तू जहाँ भी रहे-----( लता मंगेशकर )(प्लेयर लगाना अभी सीखना है--असुविधा के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ )


२७ मार्च२००९ , गुडी पडवा -----
पुनःश्च :---इस पोस्ट को लिखने के समय तक मुझे किसी की लिन्क देना नही आता था ।आज इसमे सुधार करके लिन्क देना रचना से सीखा है। नववर्ष आपके जीवन मे भी कुछ नया करने (सकारात्मक) का जोश भरे---- ईश्वर से इसी प्रार्थना के साथ आप सभी को नववर्ष की शुभकामनाऐं !!!!!





7 comments:

yaadein! said...

bhagwan kare ki apki ye dua kabul ho..
sachmuch us 30 mins mein aap use jitni khushi de sakti thi apne di..
aapne bachon k dil ko bahut ache se samjha hai...

MANVINDER BHIMBER said...

bahut kuch jaag aa gya .....sunder post

आनंद said...

आमीन....

Manish Kumar said...

आँखे नम हो गईं आपकी इस पोस्ट को पढ़ कर। भगवान करे कि आपकी दुआ कुबूल हो।

रचना. said...

अरे वाह! इसी तरह सारी चीजें सीख जायेंगी...
और आपकी लेखनी भी खूब बोलने लगी है अब!
और हां उस लडके के लिये हमारी भी पार्थनाएं..

उन्मुक्त said...

चलिये लिंक पाने में सही - कहीं तो मैं पहले नम्बर पर पहुंचा :-)

जाने अनजाने में बहुत से रिश्ते बन जाते हैं जो भूलते नहीं - हमेशा याद रहते हैं।

शिवम् मिश्रा said...

:(