Monday, March 23, 2009

टाईम-पास वार्तालाप

कुछ समय पहले एक फ़िल्म "वक्त "(नई )देखी थी,उसमें एक किरदार था जो बहुत सवाल करते रह्ता है,ऐसे किरदारों से हम जिन्दगी में कई बार टकराते हैं -----
आज मैं एक ऐसे टाईम-पास वार्तालाप की चर्चा करना चाहती हूँ, जिसका सामना मैंने करीब साल भर तक किया है -------आपको भी कई बार इनका सामना करना पडता होगा,जिसमे पूछने वाला ही सब कुछ बताते रहता है ------

---अरे!!!! आप!!!! नमस्ते ।
---नमस्ते !
---और ?,कैसे हैं?
---बढिया !
---कहाँ हैं आजकल ?
---यहीं !
---कोलंबिया में ही ?
---हाँ !
---अच्छा-अच्छा ,और सब अच्छे हैं ?
---हाँ ,एकदम बढिया !
---बच्चे कैसे हैं ?
---बढिया !
---कहाँ है आजकल ?---बाहर ही पढ़ रहे हैं ?
---हाँ !
---बेटा बडा़ है ना आपका ?
---हाँ !
---नोएडा में पढ रहा है ना ?
---हाँ !
---इंजिनियरिंग कर रहा है ना ?
---हाँ !
---आखरी साल होगा ना उसका ?
---हाँ !
---चलो बढ़िया ।--- और एक बेटी भी थी ना ?
---हाँ !
---वो कहाँ है ?
---पूना !
---क्या कर रही है ?
---बी.बी.ए.!
---पूना से ?
---हाँ !
---क्यों ?
---ऐसे ही !
---बी.बी.ए. तो इंदौर मे ही हो जाता है ना?
---हाँ !
---पुणे युनिवर्सिटी लगती होगी ना वहाँ ?
---हाँ !
---चलो बढिया ,ऐम.पी. से तो बढिया होगा ?
---हाँ ,देखो!!!
---तो फ़िर आप यहाँ अकेले ?
---नही, मेरी भतिजी है साथ !...
---यहीं एड्मिशन लिया है?
---हाँ !
---कौनसी क्लास में?
---इलेवन्थ !
---चलो बढिया,ये आपकी भतिजी है ?
---हाँ !
---क्या नाम है ?
---प्रान्जली !
---क्या सब्जेक्ट लिया है ?
---मेथ्स !
---अच्छा!! ,फ़िर कोचिंग-वोचिंग ?
---हाँ ,लगाई है !
---कहाँ ?
---पलासिया !
---अरेरे,तो वो तो दूर पडता होगा ?
---हाँ !
---फ़िर गाडी ?
---नहीं मै छोडती हूँ !
---अरे तो आपको तो चार राउंड हो जाते होंगे ?
---हाँ !
---चलो फ़िर भी अच्छा है ,आपको साथ तो है !!!
---हाँ!
---अपका खाना तो स्कूल में ही होता होगा ?
---हाँ !
---फ़िर इसका ?,ये भी वहीं खाती है ?
---नही ,इसका टाईम अलग है !
---फ़िर ?
---मेरी मम्मी भी है साथ में ।इसी के लिए आई है !
---चलो बढिया ,फ़िर तो आपको मदद मिल जाती होगी ?
---हाँ !
--- दिन में तो वो अकेले रहती होंगी ?
---हाँ !
---फ़िर क्या करती है ?दिन भर बोर हो जाती होंगी ?
---हाँ !
---उनको गाँव की याद आती होगी ,जाती होंगी कभी-कभी ?
---हाँ ,जाती रहती है !
---अकेले चली जाती है ?
---हाँ !
---इसकी मम्मी ? खरगोन में रहती है ?-------(*। *)--------
---और इस तरह अनवरत प्रश्नों का सिलसिला चलता रहता है -----
---

---कहिए--- आपको भी तो किसी ऐसे परिचित की याद नहीं आ रही है ?

8 comments:

Anonymous said...

हां हां ऐसा भी होता है

जब आदमी बेमतलब समय खोता है

और जवाब देने वाला पहले बोर होता है

और ज्‍यादा सवालों पर रोता है

श्यामल सुमन said...

आपकी टाइम पास रचना अच्छी लगी। सचमुच खाली समय बिताने का बढ़िया उदाहरण। कहते हैं कि-

ऐसी वैसी बातों से तो अच्छा है खामोश रहो।
या फिर ऐसी बात करो जो खामोशी से अच्छी हो।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

zindagi k panno se... said...

mai samajh sakti hu mom ki apka kitna time aise pass hua hai....
mere yaha ane k baad to jada he..

मुकेश कुमार सिन्हा said...

ek haan haan ka cassette chala kar chhutti :D

संगीता पुरी said...

सालभर झेला इन्‍हें ??
और अब ??

ब्लॉग बुलेटिन said...

आज की ब्लॉग बुलेटिन ऐसे ऐसे कैसे कैसे !!! मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Tamasha-E-Zindagi said...

हा हा हा हा हा - एक की याद तो आई जो हर समय झक मारता रहता था | हा हा हा हा | बहुत बढ़िया |

Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Akash Mishra said...

अरे तुरंत याद आई मुझे भी ऐसे ही एक दोस्त की :)

सादर