Thursday, July 22, 2010

मै चुप रहूंगी ......................................................न जाओ सैंया.....................

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आज ...........कुछ न कह पाउंगी................बस सुनिए......................


6 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

भावुक गीत।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

दोनों ही फिल्मी-गीत बहुत मार्मिक है!
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ऐसे सदाबहार गीत मुझे भी बहुत अच्छे लगते हैं!

Parul said...

ohho..aaj man gunguna raha hai :)

राज भाटिय़ा said...

बहुत मधुर लगे दोनो गीत लेकिन आप की आवाज बहुत हि धीरे सुनाई पढ रही है

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

Nice Post


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तख़लीक़-ए-नज़र
तकनीक-दृष्टा
चाँद, बादल और शाम
गुलाबी कोंपलें
The Vinay Prajapati

MUFLIS said...

dono geet bahut achhe haiN
"qasam tumhari..."
kyaa ye geet film (mai chup rahungi) se hi hai...??