Saturday, February 15, 2014

देने वाला - श्री भगवान

मुझसे गीत सुनाने की उम्मीद मत करना
आवाज तो तुमने भी ईश्वर से पाई है...
आँखें भी हो चुकीं होंगी बूढ़ी
पर दे देना किसी को कि
इनमें गज़ब की रोशनाई है....
इन होंठों  से मुस्कुरानें की आदत तुम लेना
इसे लेने की नही मनाई है
क्यों कि मेरे होंठ तब भी मुस्कुराएं हैं
जब मैनें दुश्मनों से भी नजर मिलाई है ......

7 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

मन के भीतर ईश्वर बैठा तो जीवन क्यों न आनन्दित।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत खूब ! लाजबाब प्रस्तुति...!

RECENT POST -: पिता

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत खूब ! लाजबाब प्रस्तुति...!

RECENT POST -: पिता

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत खूब ! लाजबाब प्रस्तुति...!

RECENT POST -: पिता

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस प्रस्तुति को आज की मिर्ज़ा ग़ालिब की 145वीं पुण्यतिथि और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

प्रेम सरोवर said...

रोचक पोस्ट। मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रंण है। धन्यवाद।

Digamber Naswa said...

बहुत खूब ... इश्वर की माया है सब कुछ ...