Friday, May 5, 2017

सुनिए दिलीप की लिखी एक कविता-"दो पातीयां"

२०१० में ये पॉडकास्ट ब्लॉग पर पोस्ट किया था , कुछ तकनीकी कारणों से पुराने पॉडकास्ट सुने नहीं जा पा रहे थे। ... आज ये रिकार्डिंग मिल गई , फिर से प्रयास किया है सुनवाने का -


इस कविता को आप यहाँ पढ सकते हैं............दिल की कलम से ....

ब्लॉग है दिलीप का -



बेटी और माँ का एक संवाद............पत्र के माध्यम से......






2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-05-2017) को
"आहत मन" (चर्चा अंक-2628)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Onkar said...

बहुत सुन्दर रचना