Thursday, August 17, 2017

भला कर भले मानुष

आजकल जिस एप्प की चर्चा चल रही है, उसके बारे में एक ही विचार आया कि कोई किसी को पीठ पीछे गाली क्यों देना चाहता है ?
अगर व्यक्ति कोई गलत बात कह रहा है, तो उसे जब तक सामने नहीं बताया जाएगा उसमें सुधार संभव नहीं है, पीठ पीछे कही बात जब तक उस तक पहुंचती है तब तक या तो वो व्यक्ति कईयों को नुकसान पहुंचा चुका होता है,या खुद नुकसान उठा चुका होता है ...
ये जरूरी नहीं कि आपको जो बात गलत लगी वो उसके लिए भी गलत हो लेकिन आगाह करना हमारा कर्तव्य होना चाहिए अगर हमें महसूस हो,एक विचार के हर नकारात्मक पक्ष को सामने लाये जाने पर ही उसकी सकारात्मकता को बढ़ाया जा सकता है ,ऐसा मैं सोचती हूँ।
अनजान बनकर दूसरों का भला करना सबके बस का नहीं 😊ये भी कटु सत्य है।
एक गीत याद आ रहा है ,मालूम नहीं किसका लिखा हुआ है -

भला किसी का कर न सको तो,बुरा किसी का मत करना
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम- काँटे बनकर मत रहना ....

6 comments:

ज्ञान चक्षु said...
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ज्ञान चक्षु said...
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ज्ञान चक्षु said...

भला करने की प्रवृति अब मानव से दूर होती जा रही है।

kuldeep thakur said...

दिनांक 18/08/2017 को...
आप की रचना का लिंक होगा...
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
आप की प्रतीक्षा रहेगी...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (18-08-2017) को "सुख के सूरज से सजी धरा" (चर्चा अंक 2700) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
स्वतन्त्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Upasna Siag said...

एकदम सही